योगी सरकार बनने के बाद ओम प्रकाश राजभर ने लगातार दिये थे अपनी नाराजगी के इशारे

  योगी सरकार बनने के बाद ओम प्रकाश राजभर ने लगातार दिये थे अपनी नाराजगी के इशारे
Om Prakash Rajbhar Displeasure

बेटे की हार कसे पड़ी थी नाराजगी की नींव, भाजपा की चमक के बीच भासपा की मौजूदगी बरकरार रखने की भी है चिंता।Because of the displeasure of Om Prakash Rajbhar

वाराणसी. भारतीय जनता पार्टी की महत्वपूर्ण सहयोगी पार्टी भारतीय समाज पार्टी के मुखिया और योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर मान गए हैं। उन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ गाजीपुर में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को स्थगित कर दिया है। लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तकरीबन आधे घंटे मुलाकात के बाद ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि सब ठीक है और वह धरना नहीं देंगे। फिलहाल बीजेपी ने उन्हें मनाकर गुस्सा और विरोध शांत कर दिया है। पर ओम प्रकाश राजभर का विरोध अचानक नहीं उबल गया। यूपी चुनाव के बाद योगी सरकार बनने से लेकर कई बार उन्होंने इशारों में अपनी नाराजगी जता दी थी। उनके कई भाषणों में तो स्पष्ट संकेत भी थे ऐसा राजनीतिक पण्डित बताते हैं।


ओम प्रकाश राजभर का बयान



दरअसल यूपी चुनाव में ओम प्रकाश राजभर को आठ सीटें मिली थीं। इसमें से चार सीटें उनकी पार्टी ने जीतीं, जिसमें खुद ओम प्रकाश भी शामिल हैं। पर उनके बेटे अरविंद राजभर जो बलिया के बांसडीह विधानसभा से चुनाव मैदान में थे उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। राजनीतिक गलियारों में यह बात फैली के इस हार के लिये ओम प्रकाश राजभर स्थानीय भाजपा नेताओं को कसूरवार मान रहे हैं। खुद ओम प्रकाश ने बलिया में मंच से इस हार के लिये स्थानीय बीजेपी नेताओं के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की और अपने समर्थकों से कहा कि वह केवल उनकी बात मानें।


ओम प्रकाश राजभर का बयान


बेटे की हार से नाराज ओम प्रकाश को उम्मीद थी कि अरविंद को जल्द ही किसी आयोग का चेयरमैन बनाकर राज्यमंत्री का पद वह दिलवा देंगे। इसके लिये उन्होंने कवायद भी तेज कर दी। बलिया की सभा में तो उन्होंने मीडिया के सामने यहां तक दावा किया कि उनके बेटे को लालबत्ती दिलाने के लिेय खुद पीएम और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पैरवी कर रहे हैं। उनकी पार्टी के हिस्से में 10 लालबत्ती आ रही है।


ओम प्रकाश राजभर का बयान


पर इसी दौरान कुछ ऐसी राजनीतिक करवट हुई कि वीवीआईपी कल्चर समाप्त होने की हवा चली और पंजाब में इसकी शुरुआत के बाद यूपी सरकार ने भी अपने यहां लालबत्ती कल्चर समाप्त कर दिया। मंत्री जी की बेटे को लालबत्ती दिलाने की उम्मीद जाती रही। इसके बाद वह कई बार अचानक थानों पर भी जा पहुंचे, अफवाह उड़ी कि वह किसी की पैरवी को पहुंचे थे, पर वहां उन्होंने पुलिस से यह कहकर सबको चैंका दिया कि कोई भी आए चाहे वह उनकी ही पार्टी का क्यों न हो पैरवी या दबाव बनाए तो चार डंडे मारिये। पर उन्हें यह बात क्यों कहनी पड़ी यह भी चर्चा का विषय रहा।



उधर भासपा के समर्थकों की शिकायतें रहीं कि सरकार में होने के बावजूद उनकी चलती नहीं। इसके बाद गाजीपुर में डीएम का तबादला उनके लिेये नाक का विषय बन गया। आरोप यह कि उनके लोगों की बात नहीं सुनी जाती और राजनीतिक हलके में भासपा जिलाध्यक्ष के खिलाफ दलित उत्पीड़न के मुकदमे को भी इसका कारण बताया गया। इस मामले को लेकर तो विधायक त्रिवेणी राम और भासपा जिलाध्यक्ष विरोध प्रदर्शन तक पर उतर आए।


इन पर्याप्त कारणों के बाद आखिरकार मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अपना मुंह खोला और सरकार के खिलाफ ही बयान दे डाला। इसके अलावा अपनी सरकार होते हुए गाजीपुर में धरने-प्रदर्शन पर बैठने का ऐलान कर दिया। एक ऐलान से उन्होंने अपनी ताकत दिखायी और मुख्यमंत्री को उनसे मिलकर मामले को सलटाना पड़ा। बताया गया कि उनकी मांगें मान ली गयीं और डीएम का तबादला भी हो गया। कुल मिलाकर ओम प्रकाश राजभर इस बात को बखूबी जानते हैं कि इस बड़े जनादेश में उन्हें जनता के बीच में अपनी पार्टी की उपस्थिति किसी भी हाल में बनाए रखनी है, यदि ऐसा न हुआ तो उन्हें बड़े दल की चकाचैंध में खो जाने का डर भी सताता हो ऐसा कहा जा सकता है।
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