सुनो मोदी-सुनो अखिलेश, काशी में कुपोषण की गाथा

सुनो मोदी-सुनो अखिलेश, काशी में कुपोषण की गाथा
modi and akhilesh

पीएम के संसदीय क्षेत्र में एक लाख से अधिक बच्चे कुपोषित, अखिलेश सरकार कैसे बनाएगी प्रदेश को उत्तम प्रदेश

विकास बागी

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जारी आंकड़े में वाराणसी में एक लाख से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार है। स्थिति इतनी गंभीर है कि बारह हजार से अधिक बच्चे कुपोषण की लाल श्रेणी में रखे गए हैं जिनका शीघ्र उपचार नहीं हुआ तो इनके बचने की संभावना कम होगी। बाल विकास विभाग अपनी ओर से पुष्टाहार तो मुहैया करा रहा है लेकिन यह उन कुपोषित बच्चों के लिए पर्याप्त नहीं है। जब तक उन्हें समुचित चिकित्सकीय सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जाएगी उनका कुपोषण से बाहर निकलना मुश्किल होगा। 
काशी तो नजीर भर है पूर्वांचल समेत पूरे प्रदेश में कुपोषण की भयावह स्थिति है। ऐसे में अखिलेश सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठते है जो प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने का दावा कर रहे है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कोई भी सरकार तब विफल मानी जाती है जब उसके यहां कुपोषण अपने पांव पसारे। कुपोषण का दूसरा नाम भूखमरी भी है। गरीब परिवार के बच्चों को पर्याप्त मात्रा में संतुलित आहार न मिलने के कारण वह कुपोषण की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में यह कहने में तनिक भी संकोच नहीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सूबे के मुखिया अखिलेश यादव दोनों ही देश के नौनिहालों को लेकर उतने गंभीर नहीं दिख रहे। प्रदेश सरकार अपने पांच साल पूरे करने की तैयारी में जबकि मोदी अपनी सरकार का दूसरा कार्यकाल मनाने की तैयारी में है। 

क्या कहते हैं आंकड़े
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की रिपोर्ट की माने तो जिले में इस समय कुल 105224 है। 12566 बच्चे अतिकुपोषण का शिकार हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या नगर क्षेत्र 3658 है। ब्लाकवार रिपोर्ट की बात की जाए तो नगर क्षेत्र के बाद आराजीलाइन ब्लाक में 2278 बच्चे अतिकुपोषित हैं। सेवापुरी में 1325, चिरईगांव 1144, पिंडरा में 773, काशी विद्यापीठ में 1161, हरहुआ में 722, बड़ागांव में 795 और चोलापुर ब्लाक में 829 बच्चे अतिकुपोषण का शिकार हैं। जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 97158 है। 

क्या है कुपोषण 
कुपोषण कोई बीमारी नहीं है लेकिन कुपोषण के चलते होने वाली बीमारियों की सूची बहुत लंबी है। गरीबी के चलते पर्याप्त मात्रा में संतुलित भोजन न मिलने के कारण बच्चे कुपोषण का शिकार होते हैं। भारत में संतुलित व प्रोटीनयुक्त भोजन के बारे में जानकारी और जागरूकता का अभाव है। गर्भधात्री स्त्री को पर्याप्त मात्रा में संतुलित भोजन न मिलने पर जन्म लिया बच्चा यदि ढाई किलो से कम है तो वह कुपोषित माना जाता है। लंबे समय तक पोषणयुक्त आहार न मिलने से कुपोषण की चपेट में आए बच्चों में बीमारियों से लडऩे की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। त्वचा और बाल रूखे-बेजान हो जाते हैं। 

गंदगी से निजात नहीं, स्वास्थ्य सुविधाओं का पता नहीं
अखिलेश यादव की सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य किए। समाजवादी एंबुलेंस से लेकर तमाम सुविधाएं दी लेकिन स्वास्थ्य महकमा उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। वाराणसी में कुपोषण से सर्वाधिक ग्रसित इलाका लोहता व आसपास का क्षेत्र है। सर्वाधिक मुस्लिम आबादी वाले इस क्षेत्र में गरीबी के साथ ही गंदगी का अंबार है। स्वास्थ्य महकमा यदाकदा इलाके में कैंप लगाता है। गंदगी के बीच पलने-बढऩे वाले बच्चे तमाम गंभीर बीमारियों की चपेट में आकर असमय अपनी जान गंवा रहे हैं। 

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