गरजेगा बसपा का गजराज, किसका कटेगा का टिकट कौन बचेगा

गरजेगा बसपा का गजराज, किसका कटेगा का टिकट कौन बचेगा
bsp rally file foto

कांशीराम के निर्वाण दिवस पर लखनऊ में ऐतिहासिक भीड़ का दावा, जानिए क्या चल रहा अंदरखाने में

वाराणसी. बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवारों का असली फाइनल मैच का फैसला आगामी नौ अक्टूबर को लखनऊ में होगा। संभावित व घोषित उम्मीदवारों का टिकट कटेगा या वे चुनावी जंग में कूदेंगे यह उस भीड़ पर निर्भर होगा जिसका दावा बसपा कर रही है। मतलब साफ है कि नौ अक्टूबर को कांशीराम के निर्वाण दिवस के अवसर पर   बसपा एक ओर विरोधियों को अपनी ताकत का अहसास कराएगी तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर मौजूद नेताओं के लिए भी वह दिन अग्रि परीक्षा से कम नहीं होगा। बसपा की इस आगामी रैली को लेकर पार्टी के अंदर जितनी हलचल है, उससे कहीं अधिक बेचैनी विरोधी दल सपा, कांग्रेस और भाजपा को है।  

उत्तर प्रदेश का सियासी संग्राम दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुका है। कुछ महीनों पूर्व यूपी में नंबर एक पर चल रही बसपा को दयाशंकर सिंह-स्वाति सिंह विवाद ने नंबर तीन की पोजिशन पर लाकर खड़ा कर दिया था। जोड़तोड़ की राजनीति में फंसी बसपा को संजीवनी मिली जब सपा सरकार में वर्चस्व को लेकर खींचतान शुरू हो गई। चाचा-भतीजे की लड़ाई के लाभ का एक बड़ा हिस्सा बसपा के खाते में गया और वह दोबारा नंबर गेम में शामिल हो गई। 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ही कई दंश झेल चुकी बसपा अब विरोधियों को अपनी असली ताकत का अहसास कराने के मूड में आ चुकी है। बसपा बॉस मायावती की ओर से प्रदेश के सभी जोनल को आर्डिनेटर को दिया गया यह टास्क कई प्रत्याशियों की राजनीति का भविष्य तय करेगा। साथ ही बसपा की यह रैली खास रणनीति के तहत हिट हुई तो कांग्रेस समेत सपा को सबसे अधिक झटका लगेगा। 

कांशीराम के निर्वाण दिवस पर बसपा की नौ अक्टूबर को लखनऊ में रैली प्रस्तावित है। बसपा बॉस मायावती ने उत्तर प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा सीट से कम से कम पांच हजार कार्यकर्ताओं को लखनऊ पहुंचने का आदेश दिया है। यूपी की सभी विधानसभा सीट को मिला दिया जाए तो लखनऊ में बीस लाख से अधिक भीड़ होगी। बसपा बॉस मायावती के आदेश और अनुमान का अनुपालन हुआ तो तय मानिए नौ अक्टूबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी नीले झंडे से अटी पड़ी होगी।  


कांशीराम के निर्वाण दिवस पर आयोजित रैली को लेकर मायावती इतनी संजीदा है कि उन्होंने पार्टी के सभी जोनल को आर्डिनेटर को साफ कर दिया है कि यदि किसी उम्मीदवार के विस क्षेत्र से पांच हजार से कम भीड़ हुई तो वे अपना टिकट कटा समझ लेंगे और दोबारा पार्टी कार्यालय आने की जरूरत नहीं। मायावती के तेवर को देखते हुए जोनल को आर्डिनेटर अपने-अपने क्षेत्र के विस प्रत्याशियों के साथ बैठक कर रणनीति बनाने में जुटे हैं। 

बसपा के टिकट पर चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे नेताओं ने अभी से बसों व अन्य सवारी वाहनों की बुकिंग शुरू कर दी है। वाहन संचालक भी मौके की नजाकत को देखते हुए अपना रेट बढ़ा दिए हैं। रेट बढऩे के बाद भी प्रत्याशियों के चेहरे पर शिकन नहीं है क्योंकि उन्हें पांच हजार कार्यकर्ताओं को लेकर लखनऊ पहुंचने का टास्क दिख रहा है क्योंकि यहीं टास्क उनके लिए विधानसभा के दरवाजे खोलेगा।
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