Varanasi stampede बनारस में थी जवाहर बाग बसाने की तैयारी

Varanasi stampede बनारस में थी जवाहर बाग बसाने की तैयारी
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पश्चिम के बाद पूरब में जड़ जमाने की चल रही थी योजना

वाराणसी. वाराणसी में जय गुरुदेव के श्रद्धालुओं की जुटान आध्यात्मिक नगरी काशी में यू हीं नहीं जुटी थी। इस आयोजन को लेकर व्यापक पैमाने पर तैयारी की गई थी। भगदड़ में इतने लोगों की मौत न होती तो जिला प्रशासन और पुलिस महकमा सोता रहता और बनारस में गंगा किनारे मथुरा के जवाहर बाग की तर्ज पर एक शहर बसा दिया गया होता। 

धर्म नगरी मथुरा के जवाहर बाग में जय गुरुदेव के शिष्य रामवृक्ष यादव ने कब्जा कर रखा था। बाग में हथियार बंद लड़ाकों की फौज थी। बीते जून को जब पुलिस जवाहर बाग खाली कराने पहुंची थी तब रामवृक्ष के समर्थकों ने हल्ला बोल दिया था और तत्कालीन एसपी सिटी की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। रामवृक्ष भी जय गुरुदेव का उत्तराधिकारी बनने की कतार में था लेकिन सपा सुप्रीमो के भाई शिवपाल यादव का हाथ उनके दूसरे शिष्य पंकज यादव पर था और पंकज को उन्होंने उत्तराधिकारी बनवा दिया। 

सूत्रों के अनुसार पंकज यादव जय गुरुदेव का उत्तराधिकारी बनने के बाद शिवपाल यादव का और खास बन गया। पश्चिम में सपा के मजबूत होने के बाद शिवपाल की निगाहें पूर्वी उत्तर प्रदेश पर थी। पंकज यादव को पूरब में जमीन तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सूत्रों के अनुसार पंकज यादव ने मथुरा के बाद पूरब में जड़ें जमाने के लिए धर्म नगरी काशी को चुना। 

पंकज यादव व उसके समर्थक लंबे समय से यहां मद्य निषेध यात्रा के बहाने वाराणसी में बड़ा आयोजन करना चाहते थे। रामनगर में गंगा किनारे डोमरी, कटेसर इलाके को चुना गया। अनुयायियों को ठहराने के नाम पर रामनगर में गंगा किनारे बीते एक माह से तैयारी चल रही थी। सारा काम बड़ी खामोशी से हो रहा था और जिला प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई। भगदड़ के बाद जब आला अधिकारी मौके पर पहुंचे तो हैरान रह गए क्योंकि उनके सामने नजारा कुछ ऐसा था। नेपाल से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से समर्थक अपने साजो-सामान के साथ आए थे। 

जय गुरुदेव के अनुयायियों ने गंगा किनारे एक छोटा सा शहर बसा दिया था। टेंट लगाकर सिर छिपाने की जगह के साथ ही आठ सौ से अधिक पंडाल बनाए गए थे। एक छोटा सा बाजार भी बन गया था जहां रोजमर्रा की जरूरतों के सारे सामान मिल रहे थे। पेयजल के लिए जमीन खोदकर ट्यूबवेल लगा दिया गया था। बिजली, पानी, अन्न, पार्किंग आदि की व्यवस्था भी आयोजकों ने कर रखी थी। पंकज यादव के संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने इन सब कार्यों के लिए बाकायदा अलग-अलग विभाग बना रखे थे और अपने साथियों की तैनाती कर रखी थी। 

मथुरा के जवाहर बाग में जिस तरह रामवृक्ष यादव समानांतर सरकार चला रहा था, वाराणसी में भी पंकज यादव की गंगा किनारे पांच किलोमीटर के दायरे में एक तरह से सरकार चल रही थी। सूत्रों की माने तो पंकज यादव व उनके समर्थकों की योजना तो यहीं थी कि पहले एक सभा करके इधर के लोगों का मूड भांपेंगे और फिर आगे की रूपरेखा तय की जाएगी। पंकज यादव को भी उम्मीद नहीं थी कि भीड़ इतनी हो जाएगी। 

पूरब में इतनी भीड़ देखकर प्रफुल्लित पंकज यादव अपनी योजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी में था कि भगदड़ मच गई और सारी योजनाएं धरी रह गई। सत्संग समागम के पहले दिन ही हादसा होने से दूसरे दिन की सभा शोकसभा में बदल गई लेकिन पंकज यादव ने फिर भी दो घंटे तक प्रवचन दिया और अपने अनुयायियों को शहीद का दर्जा तक दे दिया था। 

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