निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ नागरिकों ने निकाला मार्च, PMO पर प्रदर्शन

निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ नागरिकों ने निकाला मार्च, PMO पर प्रदर्शन

Ajay Chaturvedi | Publish: Apr, 17 2018 05:43:44 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

निजी स्कूल संचालकों पर कमीशनखोरी का लगाया आरोप।

वाराणसी. अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों में जबरदस्त आक्रोश है। वे स्कूलों पर मनामी फीस वसूली, ड्रेस व पाठ्य पुस्कतों के नाम पर कमीशनखोरी का भी आरोप लगा रहे हैं। कहते हैं इसका विरोध करने पर बच्चों को धमकाया जाता है। इन सभी मुद्दों को लेकर अभिभावकों ने मंगलवार को दुर्गाकुंड से विरोध मार्च निकाला और रविंद्रपुरी स्थित प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय पर जम कर पदर्शन किया। अभिभावकों का आरोप था कि यूपी सरकार भले ही प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सख्ती का ढकोसला कर रही है पर हकीकत कुछ और ही है। कम से कम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के अभिभावक तो इन स्कूलों की मनमानी से त्रस्त हैं। कभी यूनीफार्म के नाम पर तो कभी पाठ्यपुस्तकों के नाम पर अभिभावकों का शोषण किया जा रहा है। प्रायः हर स्कूल की दुकानें तय हैं और अभिभावकों को वहीं से सामान खरीदने को विवश किया जाता है। इसके पीछे सीधे-सीधे कमीशनखोरी है।

इस मुद्दे पर स्वराज संस्था ने दुर्गाकुंड स्थित आनंद पार्क से रविंद्र पुरी स्थित संसदीय कार्यालय तक पैदल मार्च निकालकर विरोध दर्ज कराया। स्वराज संस्था के सचिव विकास चंद्र तिवारी मार्च का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए भले ही आदेश दे रहे हैं, यूपी में कानून बनाया जा रहा है लेकिन निजी स्कूलों पर उसका कोई प्रभाव नहीं है।

आलम यह है कि यूपी बोर्ड में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू कर दिया गया है। लेकिन यूपी बोर्ड के निजी स्कूलों में भी अब तक एनसीईआरटी की किताबों को अपने यहां लागू नहीं किया है। किताबों से लगायत स्कूल ड्रेस जूते-मोजे हर चीज में दुकानदारों से कमीशन सेट कर यह अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं और अभिभावकों का आर्थिक और मानसिक शोषण कर रहे हैं। परेशान अभिवावकों ने इस मुद्दे पर मुखर विरोध दर्ज करा कर अपनी पीड़ा जाहिर की। स्वराज संस्था ने प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय में ज्ञापन देकर स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की। तिवारी का कहना था कि अगर सरकार की तरफ से प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो हम सभी अभिभावक आमरण अनशन पर बैठेंगे और जब तक हमारी मांग पूरी नहीं हो जाएगी तब तक इस आंदोलन को जारी रखेंगे।

 

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