समुद्री डकैतों की फायरिंग पर छुप कर बचायी जान

समुद्री डकैतों की फायरिंग पर छुप कर बचायी जान

कुत्ते-बंदर का गोश्त परोसा गया, जानिए क्या है मामला

वाराणसी. नाइजीरिया के समुद्री डकैतों ने जब फायरिंग किया तो सभी लोगों को छिप कर जान बचानी पड़ी। एक पल लगा कि अब बचना मुश्किल है। डकैतों ने जहाज को जब अपने कब्जे में लिया तो जिंदगी ही खत्म हो गयी है। शुक्र है कि विदेश मंत्री सुषभा स्वराज का जिन्होंने हम लोगों को नाइजीरिया के समुद्री डकैतों से छुड़वाया। यह कहानी है मंडुआडीह के कंचनपुर के राजतिलक निवासी इंजीनियर संतोष भारद्वाज की, जिन्हें 46 दिनों तक नाइजीरिया के समुद्री डकैतों ने बंधक बनाया था और बीती देर वह घर आये तो सारी कहानी सुनायी।
संतोष ने बताया कि 25 मार्च को वह कंपनी के शिप के साथ नाइजीरिया के पास से गुजर रहे थे। इसी बीच शिप पर नाइजीरिया के समुद्री डकैतों ने हमला कर दिया। हम लोगों के शिप में ऐसा कुछ नहीं था, जिसके सहारे समुद्री डकैतों का मुकाबला करते। डकैतों ने जहाज को अपने कब्जे में ले लिया और शिप के कैप्टन से महत्वपूर्ण पांच लोगों को लाइफ जैकेट पहना कर केबिन में बुलाया। पांच लोगों में संतोष भी थी। इसके बाद सभी पांच लोगों को एक बोट में लेकर समुद्री डकैत जंगल में जले गये। यहां पर दो दर्जन डकैत लगातार बंधकों की निगरानी करते थे और एक तंबू में सभी बंधकों को रखा गया था।
परोसा गया कुत्ते व बंदर का गोश्त
संतोष ने बताया कि एक दिन टापू पर रखने के बाद उन्हें अन्य जगह ले जाया गया। खाने में कुत्ते व बंदर का गोश्त दिया जाता था लेकिन उन लोगों ने गोश्त नहीं किया। नूडल खा कर अपना जीवन की रक्षा की। डकैतों ने सभी बंधकों से उनका लैपटाप व मोबाइल ले लिया था, जिससे वह अन्य किसी को अपने लोकेशन की जानकारी नहीं दे पाये।
फिरौती मिलने के बाद हुई रिहाई
समुद्री डकैतों ने बंधकों की रिहाई के लिए संतोष की सिंगापुर की शिपिंग कंपनी से एक मिलियन डॉलर की फिरौती मांगी थी। कंपनी में एक कर्मचारी ऐसा था जिसका भी पूर्व में डाकुओं ने अपहरण कर लिया था। इसी कर्मचारियों ने बिचौलिये की भूमिका निभायी और संतोष व उनके चार साथियों को 46 दिन बाद डकैतों की कैद से मुक्ति मिली।
परोसा गया कुत्ते व बंदर का गोश्त
संतोष अपनी शादी की सालगिरह के निद घर वापस आये। संतोष की बेटी चारू ने पापा से लिपट कर खुशियंा मनायी। संतोष की पत्नी कंचन, पिता विरेन्द्र ठाकुर व उनकी पत्नी निर्मला ठाकुर के घर फिर से खुशियां लौट आयी है। संतोष सही सभी परिवारजनों से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को थैंक्स कहा। उन्होंने कहा कि सुषमा स्वराज का यह एहसान जिंदगी भर नहीं भूल पायेंगे, जिनकी मेहनत से संतोष अपने परिजनों से मिल पाया।

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