Patrika Breaking- आम चुनाव से पहले कांग्रेस में बड़ा बदलाव, यूपी की कमान संभाल सकते हैं PL पुनिया, प्रियंका होंगी AICC की वरिष्ठ पदाधिकारी

यूपी में चार कार्यवाहक अध्यक्ष, जितिन प्रसाद और ललितेश का नाम लगभग फाइनल। खरवांस बाद घोषणा।

By: Ajay Chaturvedi

Published: 07 Jan 2019, 02:55 PM IST

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में व्यापक पैमाने पर फेर बदल कर लिया गया है। जिसका लोगों को था इंतजार उसकी घड़ियां भी खत्म होने को हैं। सब कुछ फाइनल कर लिया गया है, माना जा रहा है कि खरवांस बाद एआईसीसी से लेकर पीसीसी तक की घोषणा कर दी जाएगी। इसमें पूर्वाचंल को भी खास तरजीह दी गई है।

एक अध्यक्ष, चार कार्यवाहक अध्यक्ष
तकरीबन साल भर से यानी राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद से पार्टी में परिवर्तन की जो उम्मीद की जा रही थी उसकी प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है। यूपी में लोकसभा चुनाव राजबब्बर के नेतृत्व में नहीं लड़ा जाएगा यह भी तय हो गया है।राजबब्बर को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी दी जायेगी पार्टी ने एक अध्यक्ष और चार कार्यवाहक अध्यक्ष के फार्मूले को अख्तियार किया है।

पीएल पुनिया होंगे अध्यक्ष
पार्टी के भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो यूपी कांग्रेस की बागडोर वरिष्ठ कांग्रेसी, अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्य़क्ष रह चुके और हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में अपनी कुशल रणनीति से पार्टी को शानदार फतह दिलाने वाले पीएल पुनिया को सौंपी जा रही है। इसकी घोषणा संभवतः खरवास बाद यानी 15 जनवरी के बाद किसी समय हो सकती है।

कुशल राजनीतिज्ञ, दलितों-आदिवासियों में अच्छी पैठ का तर्क
पुनिया को यूपी की बागडोर सौंपने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनकी राजनीतिक सूझबूझ तो है ही जिसका परिचय उन्होंने हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में दिया है। साथ ही वह लंबे अरसे तक अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के चेयरमैन रहे हैं लिहाजा दलितों, आदिवासियों के बीच भी इनकी अच्छी खासी पैठ मानी जाती है। दूसरे समूची यूपी इन्हें जानती है और ये पूरे उत्तर प्रदेश के भूगोल व राजनीतिक गतिविधियों से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। तीसरी बात यह बतायी जा रही है कि यह एक बेदाग चेहरा होगा। अभी तक इन पर किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। व्यक्तित्व भी शालीन है और यह एक कुशल ब्यूरोक्रेट भी रह चुके हैं।

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ की तर्ज पर अनुभव व जोश का समन्वय
सूत्र बताते है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तरह यूपी में भी अनुभव के साथ युवा जोश को तरजीह दी जा रही है। इसके तहत प्रदेश अध्यक्ष के साथ चार कार्यवाहक अध्यक्ष होंगे। इसमें से दो नाम लगभग फाइनल हो चुके हैं, इसमें एक बनारस के खांटी कांग्रेसी परिवार पं कमलापति त्रिपाठी के प्रपौत्र ललितेशपति त्रिपाठी हैं तो दूसरा नाम भी खांटी कांग्रेसी परिवार राजीव गांधी के राजनैतिक सलाहकार व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व0 जितेन्द्र प्रसाद के पुत्र पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद हैं। अभी दो अन्य नामों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। सूत्र बताते हैं कि बनारस के पूर्व सांसद और वर्तमान प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ राजेश मिश्र को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में सचिव बनाया जा सकता है क्योंकि पूर्वांचल से कोई एक ही कार्यवाहक बनेगा।

पार्टी अकेले दम पर लडेगी चुनाव
एक अन्य महत्वपूर्ण तर्क जो पुनिया के पक्ष में दिया गया है वह यह है कि इस बार कांग्रेस यूपी में सपा या बसपा अथवा दोनें से गठबंधन नहीं करने जा रही है। कारण कि पार्टी के अंदरूनी सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस को गठबंधन से कोई फायदा नहीं होने वाला बल्कि नुकसान ही होगा। पूर्व का अनुभव भी यही रहा है चाहे बसपा से गठबंधन किया गया हो या सपा से कांग्रेस के वोटबैंक में ही सेंधमारी हुई है। ऐसी स्थिति में पुनिया को प्रदेश की कमान सौंपे जाने से दलित वोट बैंक में सेंधमारी भी हो सकेगी। सूत्रो के मुताबिक कांग्रेस यूपी के 65 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, शेष सीटों पर छोटे दलों से होगा तालमेल।

प्रियंका होंगी एआईसीसी की वरिष्ठ उपाध्यक्ष
सूत्रों के मुताबिक सबसे अहम् निर्णय गांधी परिवार की कूटनीतिज्ञ, फायरब्रांड प्रियंका गांधी बडेरा की पार्टी में सक्रिय भूमिका को लेकर है। सूत्रों ने बताया कि जनवरी अंत या फरवरी के प्रथम सप्ताह तक उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है। वह रायबरेली से लोकसभा चुनाव भी लड़ सकती हैं। वैसे अंतिम समय में वह यूपी के किसी अन्य जगहं से भी साथ-साथ उम्मीदवार हो सकती हैं लेकिन इसका खुलासा अभी नहीं किया जा रहा है। इसके लिए अन्य दलों के प्रत्याशियों के नाम की घोषणा के बाद का वक्त मुकर्रर किया गया है।

मेनका वरुण दे सकते हैं भाजपा को झटका
एक अन्य महत्वपूर्ण सियासी कदम के तहत गांधी परिवार से जुड़े दो नाम जल्द ही भाजपा को बड़ा झटका दे सकते हैं। इसके तहत मेनका गांधी और वरुण गांधी भाजपा छोड कर निर्दल प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। ऐसा होने पर कांग्रेस इन दोनों के खिलाफ अपना प्रत्याशी नहीं उतारेगी।

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