मोदी के गढ़ में मुलायम के संसदीय क्षेत्र से अधिक बलात्कारी

मोदी के गढ़ में मुलायम के संसदीय क्षेत्र से अधिक बलात्कारी
modi and mulayam

आतंक की नर्सरी कहे जाने वाले आजमगढ़ में बनारस से कम है अपराध, देखिए ये आंकड़े

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही अच्छे दिन का जुमला छोड़ते रहते हैं लेकिन यह अच्छे दिन कम से कम बनारस के लिए तो नहीं हो सकता जहां कानून-व्यवस्था तार-तार है। आतंक की नर्सरी का खिताब पा चुके आजमगढ़ में बनारस की तुलना में आपराधिक वारदातें कम हैं। यह हम नहीं पुलिस का रिकार्ड कह रहा है। 

उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग से मिली रिपोर्ट का बीते तीन सालों का अध्ययन करने पर मालूम होता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में अपराध कम है। वाराणसी में बीते तीन सालों में बलात्कार के 102 मामले सामने आए हैं जबकि आजमगढ़ में 76। 

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में वर्ष 2014 में बलात्कार के सबसे कम 26 मामले सामने आए। जैसे-जैसे साल आगे बढ़ा दुराचार की घटनाएं भी बढ़ती गई।  2015 में 28 मामले आए जबकि 2016 में जुलाई माह तक वाराणसी में दुराचार के 48 मामले सामने आ चुके हैं। सात माह में ही बलात्कार की घटनाओं ने बीते दोनों वर्षों से दो गुने का आकंड़ा पार कर लिया है। 

सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ की बात की जाए तो यहां 2015 वर्ष में दुराचार की 19 घटनाएं हुईं जबकि 2014 में 26। मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र में भी मौजूदा साल में बलात्कार की घटनाओं में वृद्धि हुई। जनवरी 2016 से जुलाई 2016 तक पुलिस रिकार्ड में दुष्कर्म की 31 घटनाएं दर्ज हो चुकी है। 

सपा सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तमाम योजनाओं के सफल संचालन का दावा करती है लेकिन पुलिस के रिकार्ड इन दावों की हवा निकाल देते हैं। छेडख़ानी की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। दिल्ली के निर्भया कांड के बाद लड़कियों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाए गए लेकिन नया कानून जब से अस्तित्व में आया है, वारदातों में कमी के बजाय बाढ़ सी आ गई है। 

महिलाओं के साथ बढ़ते अपराध के मामले सामने आने के मामले में कानून से जुड़े विश्लेषकों की राय थोड़ी भिन्न है। कानून-व्यवस्था से जुड़े विश्लेषकों का मानना है कि दरअसल, वारदातें तो पहले भी होती थीं लेकिन तब लोग समाज में बदनामी के भय से सामने नहीं आते थे। पुलिस भी ऐसे मामलों को थाने के बाहर ही रफा-दफा कर देती थी लेकिन निर्भया कांड के बाद और सोशल मीडिया के चलते अब लोग सामने आने लगे हैं। अपने घर की महिलाओं के साथ हुए क्रूर व्यवहार को उजागर कर रहे हैं साथ ही दोषियों को कठघरे में लाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। सोशल मीडिया की जागरूकता के चलते अब पुलिस भी ऐसे मामलों को चाहकर दबा नहीं पा रही है और उसे मुकदमा कायम करना पड़ रहा है जिसके चलते अपराध के आंकड़ें बढ़ रहे हैं। 
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