विश्व अर्थ डेः चुनावी घोषणा पत्र के पन्नों में ही दब कर रह गया प्रदूषण

Ajay Chaturvedi

Publish: Apr, 22 2019 03:05:02 PM (IST)

Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

वाराणसी. ड्राइंग रूम में बैठ कर ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन आदि-आदि तमाम चर्चाएं होती रहती हैं। वाराणसी समेत पूरी दुनिया का वातावरण दिन-ब-दिन खराब होता जा रहा है, लेकिन इससे राजनीतिक दलों को कोई फर्क नहीं पड़ता। राजनीति उन लोगों के द्वारा ही की जाती है जो पर्यावरण प्रदूषण के शिकार हो रहे हैं। तमाम तरह की बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं। लेकिन उसकी चर्चा तक नहीं की जाती। इस 17वीं लोकसभा के लिए हो रहे चुनाव से पहले क्लाइमेट एजेंडा ने राजनीतिक दलों पर दबाव बनाया तो कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने प्रदूषण को अपने घोषणा पत्र में तो शामिल किया, लेकिन किसी भी नेता ने किसी चुनावी रैली में प्रदूषण के 'प्र' तक का नाम नहीं लिया। ऐसे में इनके घोषणा पत्र में किए वादे पर ही सवाल उठने लगा है। लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि जब चुनावी रैली में इसका जिक्र नहीं तो चुनाव जीतने के बाद क्या करेंगे।

देश के दो राष्ट्रीय दलों ने इसे घोषणा पत्र में जगह दी भी पर क्षेत्रीय दलों ने तो इतने गंभीर मसले को बिसरा ही दिया। खास तौर पर हम बनारस की बात करें तो दुनिया के प्रदूषित शहरों के टॉप 05 में इसका नाम शुमार है। लेकिन यहां भी किसी की जुबान पर इसका जिक्र नहीं आता। आम आदमी पार्टी दिल्ली के प्रदूषण की तो बात करती है लेकिन वाराणसी का उल्लेख कोई नहीं करता।

हाल यह है कि वाराणसी ऐसा संवेदनशील शहर बन चुका है जहां प्रदूषण के चलते लोग स्किन डिजीज, काली खांसी, दमा के साथ-साथ कई ऐसी बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे है जो लाइलाज हैं। एमएनडी इसी में एक ऐसी बीमारी है जिसमें आदमी तिल-तिल कर मरता है। लेकिन प्रदूषण पर नियंत्रण की दिशा में न जिला प्रशासन जागरूक दिखता है न राजनीतिक दल।

वाराणसी में गंगा का प्रदूषण उच्च स्तर पर पहुंच गया है। पीना तो दूर आचमन करने काबिल नहीं। लेकिन तमाम बंदिशों के बावजूद गंगा में सीवर का गिरना जारी है। चोरी-छिपे गंगा में नए-नए नाले खोल दिए गए हैं। नमामि गंगे योजना अभी तक मूर्त रूप नहीं ले पाई है। गंगा एक्शन प्लान तो अब खत्म ही हो चुका है।

घोषणा पत्र में किए वादे
भाजपा- संकल्प पत्र में पार्टी ने लिखा है कि राष्ट्रीय वायु स्वच्छता कार्यक्रम को मिशन में बदलेंगे। पांच वर्ष में 35 प्रतिशत वायु प्रदूषण घटाएंगे।
जल संरक्षण के लिए नया मंत्रालय बनेगा, 2022 तक गंगा को स्वच्छ करने का संकल्प।

कांग्रेस- जल के लिए अलग मंत्रालय होगा। गंगा समेत अन्य सभी नदियों की स्वच्छता संबंधी योजनाओं का बजट दोगुना किया जाएगा।
वायु प्रदूषण को राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल कहा गया है।

-हाल ये कि 2017 में आठ में से कम से कम एक की मौत वायु प्रदूषण से हुई देश में।

-केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार 49 नदियां तीन साल में प्रदूषित हुईं। 2018 में 351 नदियां हैं प्रदूषित, 2015 में थीं 302। 80 फीसद आबादी की जलापूर्ति करने वाले भूमिगत जल में फ्लोराइड, नाइट्रोजन की मात्रा लगातार बढ़ रही है।

कोट

क्लाइमेट एजेंडा की मुख्य कार्यकर्ता एकता शेखर व शानिया अनवर कहती हैं कि हम ये लड़ाई लड़ रहे हैं। हम वाराणसी सहित पूरे देश के वातावरण को शुद्ध बनाना चाहते हैं। इसके लिए सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है। हमारे दबाव का ही नतीजा है कि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी प्रदूषण को अपने घोषणा पत्र में शामिल करने पर बाध्य हुए। हमारा प्रयास लगातार जारी रहेगा। सरकार जो आए उस पर हम दबाव बनाएंगे।

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गंगा में गिरता सीवरवाराणसी में वायु प्रदूषण
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