पीएम के संसदीय क्षेत्र में शुद्ध हवा के लिए अनोखा विरोध प्रदर्शन

प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय पर दिया धरना,बढ़ते प्रदूषण स्तर पर जताया रोष,विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की मांग.

By: Ajay Chaturvedi

Published: 11 May 2018, 03:40 PM IST

वाराणसी. प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र जहां विकास के नाम पर शहर की आबो हवा भी जहरीली हो गई है। आलम यह कि सांस लेना भी दूभर हो गया है। आम आदमी तरह-तरह की बीमारियों से ग्रस्त हो रहा है। डॉक्टरों के पास इलाज के लिए लंबी-लंबी लाइन लग रही है। हालत यह है कि दिल्ली एनसीआर से भी कहीं ज्यादा वाराणसी की आबो हवा जहरीली हो गई है। लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ऐसे में एयर पल्यूशन के खिलाफ वर्षों से जंग लड़ रही सामाजिक संस्था केयर 4 एयर की ओर से भेलूपुर स्थित क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय पर एक सांकेतिक धरने का आयोजन किया गया। इस धरना के माध्यम से जिम्मेदार अधिकारियों से यह मांग की गई कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए शहर की आबोहवा को स्वच्छ बनाने की दिशा में जरूरी कार्रवाई की जाए।


धरने में मौजूद क्लाइमेट एजेंडा की मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर ने कहा “शहर के अन्दर प्रदूषण के कुछ ऐसे श्रोत हैं जो पहले से ही चिन्हित हैं। आम लोगों और नगर निगम कर्मियों द्वारा कचरा जलाना, आबादी और सडकों की तुलना में वाहनों की संख्या में भारी बढोत्तरी, टूटी सडकों के कारण लगाने वाले जाम और उड़ने वाली धुल आदि कुछ ऐसे श्रोत हैं जिनसे अत्यधिक मात्रा में प्रदूषण होता है. सार्वजनिक स्थलों पर खुले में मौजूद उपरोक्त सभी श्रोतों पर स्वतः नजर पड़ने के बावजूद, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अकर्मण्यता के कारण ही बनारस को प्रदूषित शहरों की वैश्विक सूची में छठा स्थान मिला है।”
इस दौरान, प्रेरणा कला मंच की टीम ने एक नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया. डाल डाल पर जान नामक इस नाटक के माध्यम से यह बात सामने लाने का प्रयास किया गया कि दुनिया में प्रति वर्ष जिन 70 लाख लोगों की मौतें वायु प्रदूषण जनित बिमारियों के कारण होती हैं, उन्हें मरने से बचाया जा सकता है. नाटक के दौरान और ज्ञापन देने के लिए केयर 4 एयर के सदस्य कफन पहन कर सांकेतिक रूप से जिम्मेदार विभागों की अकर्मण्यता का विरोध कर रहे थे.

मौजूदा वायु प्रदूषण के सवाल पर गठित जिला फोरम के वरिष्ठ सदस्य सतीश सिंह ने बताया कि ज्ञापन के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से यह अपील की जा रही है कि जहरीली आबोहवा को जल्द से जल्द ठीक करने की दिशा में कार्य शुरू किए जाएं। ज्ञापन में उल्लेखित मुद्दों के बारे में बताते हुए सतीश सिंह ने कहा कि शहर में वायु गुणवत्ता जांच केंद्र बढाए जाने, वायु प्रदूषण (नियंत्रण एवं निषेध) अधिनियम 1981 का उचित अनुपालन, और औद्योगिक इकाइयों से होने वाले उत्सर्जन को मानकों के अनुरूप बनाए जाने की दिशा में ठोस कार्रवाई की मांग की।

बता दें कि 2 मई 2018 को जेनेवा स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यालय से विश्व में वायु प्रदूषण के वर्त्तमान हालात पर एक व्यापक रिपोर्ट जारी की गयी थी जिसके आधार पर दुनिया के प्रदूषित शहरों का आंकड़ा जारी किया गया था। इस रिपोर्ट ने 2010 से 2016 तक तमाम शहरों में उपलब्ध पी एम 2.5 के आंकड़ों की आधार पर एक विस्तरीत सूची बनाई है, जिस के आधार पर विश्व के प्रदूषित शहरों की क्रमवार सूची तैयार की गई है। इस रिपोर्ट के विस्तार से अध्ययन के आधार पर क्लाइमेट एजेंडा की मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर का कहना है : “डब्ल्यू एच ओ की यह ताजा रपट भारत में वायु प्रदूषण का विस्तृत चित्रण करती है। 2010 से लेकर 2016 तक के आंकड़ों के आधार पर बनी इस रपट के मुताबिक़, वाराणसी दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित शहर पाया गया है। इस लिस्ट में, शीर्ष 20 शहरों में उत्तर प्रदेश के कुल 6 शहर शामिल हैं जिनमे कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, आगरा और फिरोजाबाद क्रमशः (विश्व में) दूसरे, चौथा, 13वें,15वें बीसवें नंबर पर है.” उन्होंने आगे कहा कि “ दुनिया भर में होने वाली 70 लाख मौतों में ज्यादातर मौतें भारत के इन चुनिन्दा शहरों में हो रही हैं. ऐसे में, अब यह एक स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति बन चुकी है.” एकता शेखर ने कहा कि लम्बे समय से क्लाइमेट एजेंडा की यह मांग रही है कि देश के अन्दर वायु गुणवत्ता निगरानी तंत्र को पारदर्शी बनाया जाए, और राष्ट्रीय स्तर पर इस तंत्र का विस्तार किया जाए.
सौ प्रतिशत उत्तर प्रदेश अभियान व केयर 4 एयर की सचिवालय प्रभारी सानिया अनवर का कहना है : “विश्व के शीर्ष 20 प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के 6 शहरों का शामिल होना क्लाइमेट एजेंडा द्वारा जारी रिपोर्ट एयर किल्स में दिए गए आंकड़ों की भयावहता को पुख्ता करता है. डब्ल्यू एच ओ की ताजा रिपोर्ट यह साबित करती है की दुनिया में उत्तर प्रदेश वायु प्रदूषण का एक बड़ा हब बन चुका है.” समाधान के बारे में सुझाव देते हुए सुश्री अनवर ने कहा “ कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण, स्वच्छ ऊर्जा का अधिकतम उपयोग और जीवाश्म इंधन आधारित उद्योग धंधों को समयबद्ध तरीके से बंद करना ही भारत को स्वच्छ बना सकता है।” इस बारे में, पर्यावरण कार्यकर्ता श्री सुनील दहिया ने कहा: “ भारत में हालात इस रिपोर्ट में दर्शाए गए आंकड़ों से ज्यादा खराब हैं. केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नेशनल क्लीन एयर एक्शन प्लान में लक्ष्य तो बड़े बड़े रखे गएँ हैं, लेकिन उन्हें हासिल करने के लिए कोई भी ध्होस कार्ययोजना नहीं बनाई गयी है, यह एक चिंताजनक तथ्य है।”

धरने में शामिल जन संगठनों में मुख्य रूप से जिला फोरम, क्लाइमेट एजेंडा, प्रेरणा कला मंच, सर्वोदय विकास समिति, स्वराज अभियान, प्रगति पथ फाउंडेशन, केयर 4 एयर अभियान, 100 प्रतिशत उत्तर प्रदेश अभियान आदि शामिल रहे।

इस धरने में मुख्य रूप से राम जनम, एस पी राय, दीपक पुजारी, संगीता, सौरभ यादव, मुकेश झुनझुनवाला, सानिया अनवर, श्रुति सिंह, धीरज कुमार, ब्रिजेश पटेल, आशुतोष कुमार, रवि शेखर आदि मौजूद रहे. धरने का संचालन क्लाइमेट एजेंडा के अभियानकर्ता ओम प्रकाश मिश्र ने किया।

वायु प्रदूषण स्तर
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