बाहुबली को धूल चटाने वाली यूपी की यह चर्चित महिला नेता का आज भी चल रहा सिक्का, अब अपनाया नया ट्रेंड

बाहुबली को धूल चटाने वाली यूपी की यह चर्चित महिला नेता का आज भी चल रहा सिक्का, अब अपनाया नया ट्रेंड
puja pal

Sarweshwari Mishra | Publish: Oct, 12 2019 06:15:22 PM (IST) Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

दस साल तक रही चुकी है विधायक

वाराणसी. जिस समय बाहुबली अतीक अहमद को लोग आंख उठाकर देखने की हिम्मत तक नहीं करते थे उस वक्त अतीक के तिलिस्म में सेंध लगाने वाली साधारण सी महिला थी पूजा पाल। जो कभी अस्पताल में पोछा लगाती थी। तो कभी सड़क के किनारे पंचर की दुकान पर अपने पिता को खाना पहुंचाने जाती थी। वह महिला जो कभी बीच सड़क पर चलने की हिम्मत नहीं कर सकती थी। उसने सूबे के सबसे ताकतवर बाहुबली नेता को ठिकाने लगाने में बढ़ा अहम रोल अदा किया। पिछले दिनों पूजा पाल के खिलाफ ललित वर्मा हत्याकांड में पूजा पाल पर सीबीआई ने हत्या का मामला दर्ज किया है। इस हत्याकांड में पूजा पाल सहित 10 लोग आरोपी बनाए गए हैं।

दस साल तक रही चुकी है विधायक
पूजा पाल दस साल तक विधायक रह चुकी है। पति राजू पाल की हत्या के बाद मायावती ने प्रयागराज आकर पूजा पाल को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। राजू पाल के क़त्ल से खाली हुई इलाहाबाद वेस्ट सीट पर साल 2005 में फिर से उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में एसपी ने दोबारा अतीक के भाई अशरफ पर दांव लगाया, जबकि मायावती ने राजू पाल की विधवा पूजा पाल को उम्मीदवार बनाया। टिकट मिलने के वक्त पूजा पाल पर कम उम्र होने का आरोप भी लगा। हालांकि वोटों की पेशबंदी और सत्ता पक्ष द्वारा पूरी ताकत झोंके जाने की वजह से पूजा पाल यह उपचुनाव हार गईं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने न तो सियासत से नाता तोडा और न ही बीएसपी का दामन छोड़ा। साल 2007 में बीएसपी ने इसी सीट से उन्हें फिर टिकट दिया और मायावती लहर में वह विधायक बन गईं। पूजा पाल ने 2007 में अतीक के भाई अशरफ को हराया तो 2012 के चुनाव में उन्होंने इकहत्तर हजार वोट पाकर सीधे अतीक अहमद को मात दी। यूपी विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने उन्हें फिर से टिकट दे दिया है। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद पूजा पाल को अनुशासनहीनता के आरोप में मायावती ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उन्नाव से पूजा पाल को अपना उम्मीदवार बनाया । हालाकि पूजा पाल चुनाव नहीं लड़ पाई लेकिन सपा की स्टार प्रचारक होकर प्रदेश भर में समाजवादी पार्टी के लिए वोट मांगा।

अस्पताल में हुआ था राजू पाल से प्यार
अस्पताल में प्यार हुआ कम पढ़ी.लिखी पूजा पाल छोटी उम्र में ही पिता और परिवार जिम्मेदारियों को संभालने के लिए काम करने लगी। अस्पताल में घर में दफ्तर में झाड़ू पोछे के लिए जाने लगी । कुछ सालों बाद शहर के एक इलाके में चलने वाले निजी अस्पताल में काम मिल गया वहां काम सीखा और नौकरी करने लगी । उसी दौरान पूजा पाल की राजूपाल से मुलाकात हुई । जानकरी के अनुसार राजू पाल को गोली लगी थी वह उसी निजी अस्पताल में इलाज करा रहे थे । इलाज के दौरान राजू पाल की तीमारदारी की जिम्मेदारी पूजा पाल पर थी और तीमारदार प्यार में बदल गई और फिर दोनों ने शादी कर ली।

शादी के महज नौ दिन बाद हो गई थी विधवा
जून 2004 में हुए इस शहर पश्चिमी के उपचुनाव में बीएसपी ने राजू पाल को अपना उम्मीदवार बना दिया. टिकट पाने से पहले राजू पाल का किसी ने नाम भी नहीं सुना था। बहरहाल तकदीर ने उस चुनाव में राजू पाल का साथ दिया और वह अतीक अहमद के दबदबे को ख़त्म करते हुए पहली बार बीएसपी को यह सीट जिताने में कामयाब रहे। विधायक बनने के बाद राजू पाल अपने सियासी दुश्मनो के निशाने पर आ गए। उन पर दो बार जानलेवा हमला भी किया गया.
विधायक बनने के सात महीने बाद विधायक राजू पाल ने सोलह जनवरी साल 2005 को घर के नजदीक मंदिर में ही सादगी के साथ अपनी प्रेमिका पूजा से ब्याह रचा लिया. शादीशुदा ज़िंदगी को लेकर दोनों ने काफी सपने पाल लिए थे। हालांकि तकदीर को कुछ और ही मंजूर था. शादी के महज नौ दिन बाद पचीस जनवरी को शहर से घर वापस लौटते वक्त विधायक राजू पाल पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर मौत के घाट उतार दिया गया। इस सनसनीखेज क़त्ल के बाद इलाहाबाद कई दिनों तक हिंसा की चपेट में रहा। विधायक राजू पाल के क़त्ल का आरोप तत्कालीन एसपी सांसद अतीक अहमद और राजू पाल के खिलाफ चुनाव हारने वाले अतीक के छोटे भाई अशरफ पर लगा. दोनों को इस मामले में जेल भी जाना पड़ा।

साइकिल का पंक्चर बनाते थे पूजा के पिता
पूजा पाल इलाहाबाद के दरियाबाद इलाके में रहने वाले एक बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है. उसके पिता शहर के ही बलुआघाट चौराहे के पास फुटपाथ पर लकड़ी का एक बक्सा रखकर साइकिल का पंक्चर बनाते थे, जबकि मां घरों में झाडू-पोछा करती थी. मां-बाप ने अपनी इस बड़ी बिटिया को खूब पढ़ा-लिखाकर डॉक्टर बनाने का सपना देखा था, लेकिन गरीबी के चलते वह सातवीं क्लास से आगे स्कूल नहीं जा सकी थी।

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