सड़क चोर निकला पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री का खास

सड़क चोर निकला पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री का खास
varanasi damage road

सुरेंद्र पटेल के इस खास को मिले सबसे अधिक ठेके

वाराणसी. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव से यूं ही पीडब्ल्यूडी नहीं छीना था। सड़क निर्माण में इतनी धांधली चल रही थी कि सड़क पूरी बनने से पहले ही जगह-जगह से टूट चुकी होती। शिवपाल के खास व वाराणसी निवासी सिंचाई एवं लोक निर्माण राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल भी अब घेरे में आ गए हैं। पीडब्ल्यू राज्यमंत्री का खासमसास ठेकेदार ही सड़क चोर निकला। ठेकेदार की काली करतूत उजागर होने के बाद जिला प्रशासन ने उसे ब्लैक लिस्ट में डालने से पहले चेतावनी दी है कि मानक के अनुरूप सड़क का निर्माण तय सीमा में करें। 
 
भाजपा विधायक रविंद्र जायसवाल द्वारा बीते दिनों शहर की क्षतिग्रस्त सड़कों को लेकर धरना-प्रदर्शन के साथ ही संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमा कायम कराने के लिए हर कोशिश की। विधायक के धरनान्-प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक अमला की नींद टूटी।
वाराणसी के जिलाधिकारी विजय किरण आनंद ने ग्रामीण क्षेत्रों व शहरों इलाकों में बन रही सड़कों का हालचाल लेना शुरू किया तो सड़क चोर ठेकेदारों में हड़कंप मच गया। 


जिलाधिकारी ने जब वाराणसी के महत्वपूर्ण इलाकों कैंट से लंका व छित्तूपुर-टिकरी मार्ग की सड़कों का जायजा लिया तो माथा ठनक गया। चार करोड़ चौहत्तर लाख रुपये की लागत से लगभग चार किलोमीटर बनी टिकरी मार्ग की सड़क निर्माण में धांधली पाई गई। सड़क मानक के अनुरूप तैयार नहीं किया गया था। सूत्रों के अनुसार इस सड़क का ठेका राज्यमंत्री ने अपने चहेते संजीव मिश्र को दिलाया था। मंत्री से जुड़ा ठेकेदार होने के कारण प्रशासन ने सख्त कार्रवाई के बजाय ब्लैक लिस्टेड करने की धमकी देते हुए 
तय समय में मानक के अनुरूप निर्माण की हिदायत देते हुए भुगतान पर रोक लगा दी है। टिकरी मार्ग पर राज्यमंत्री के चहेते द्वारा बनाई गई सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए निर्माण के दौरान ही पीडब्ल्यूडी राज्यंत्री व सपा जिलाध्यक्ष के बीच तकरार भी हुई थी। विभागीय मंत्री होने के कारण सपा जिलाध्यक्ष की एक न चली लेकिन अब जब सड़क निर्माण में धांधली की बात सामने आ चुकी है, मंत्री विरोधी गुट एक बार फिर सक्रिय हो गया है। 

पीडब्ल्यूडी से जुड़े ठेकेदारों ने बताया कि सपा सरकार आने के बाद से राज्यमंत्री के इशारे पर विभाग ने सबसे अधिक ठेके संजीव की फर्म को दिए। वाराणसी समेत आसपास के जिलों में भी मंत्री के प्रभाव से ठेकेदार को पांच करोड़ के भीतर का काम मिलता रहा। ठेकेदारों ने बताया कि थकहार कर जब वह भी विभाग पर शिकंजा कस चुके लोगों की शरण में पहुंचे तो सात प्रतिशत कमीशन पर ठेका देने की बात कही गई। जिन्हें जरूरत थी वह सात प्रतिशत देकर ठेका तो हासिल किए लेकिन कमीशन के चक्कर में उन्होंने भी ऐसी सड़कों का ही निर्माण किया जो एक साल भी न टिके। 


डीएम ने बीते एक सप्ताह में वाराणसी के कई इलाकों मसलन, चौबेपुर, लंका, कैंट मार्ग आदि की सड़कों का नमूना बीएचयू भेजा था जांच-परख को। एक भी सड़क का निर्माण मानक के अनुरूप नहीं मिला। बीएचयू की रिपोर्ट यह बताने को काफी है कि वाराणसी में सड़कों की दुर्दशा के लिए और कोई नहीं बल्कि राज्यमंत्री और उनके खास ठेकेदार हैं जो रहते भी बनारस में है और इनके परिजन भी इन्हीं सड़कों से गुजरने पर सरकार के साथ ही सड़क बनाने वालों को कोसते हैं। 
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