राजा भइया के पिता मोहर्रम पर फिर भंडारा कराने की तैयारी में!, हाईकोर्ट ने पिछले साल लगा दी थी रोक

राजा भइया के पिता मोहर्रम पर फिर भंडारा कराने की तैयारी में!, हाईकोर्ट ने पिछले साल लगा दी थी रोक

Rafatuddin Faridi | Publish: Sep, 29 2017 11:46:09 PM (IST) | Updated: Sep, 30 2017 03:11:13 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

मोहर्रम के दिन ताजिया जुलूस के रास्ते में हनुमान मंदिर पर राजा भइया के पिता कराते हैं भण्डारा, पिछले साल कोर्ट के आदेश पर लगी थी रोक।

प्रतापगढ़. राजा भइया के पिता महाराज उदय प्रताप सिंह एक बार फिर मोहर्रम पर परंपरागत भंडारा कराने की तैयारी में हैं ? उनकी तैयारियों की आ रही खबरों को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस की चिंता बढ़ गयी है। राजा भइया के पिता जी हर साल मोहर्रम के दिन एक बंदर की याद में उसी रास्ते में हनुमान मंदिर पर भंडारा कराते हैं जहां से ताजिया का जुलूस गुजरता है। पिछले साल हाईाकोर्ट की रोक और पुलिस की सख्ती के चलते मजाराज उदय प्रताप सिंह के अड़ जाने के बाद भी भण्डारा नहीं हुआ था। इस बार फिर भण्डारे की तैयारियां शुरू होने की बात कही जा रही है। उधर डीएम और पुलिस अधीक्षक ने सभी से साम्प्रदायिक सद्भाव मनाए रखने की अपील की है।

 

हालांकि इस बात का कोई बाकायदा ऐलान तो नहीं हुआ है। पर उस जगह जहां हनुमान मंदिर पर भण्डारा होता चला आया है वहां साफ-सफाई कराए जाने व झण्डा भी लगे होने की सूचना आ रही है। इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है तैयारी भण्डारे की है। अगर यह सच हुआ तो पुलिस के लिये चिंता का विषय होगा। हालांकि पुलिस ने दावा किया है कि भण्डारा नहीं होगा।

 

दलअसल हर साल राजा भइया के पिता महाराज उदय प्रताप सिंह मोहर्रम के दिन कुण्डा के शेखपुरा आशिक गांव में हनुमान मंदिर पर उसी रास्ते पर भण्डारा कराते हैं जहां से ताजिया का जुलूस गुजरता है। इसको लेकर समुदाय की शिकायत काफी पुरानी रही है। पिछले वर्ष इस मामले में किसी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी, जिसके बाद हाईकोर्ट की ओर से भण्डारे को रोक दिया गया। पर महाराज मानने को तैयार नहीं थे।

 

बावजूद इसके महाराज भण्डारा कराने पर अड़ गए। ठीक मोहर्रम के दिन मंदिर पर हलवाई बैठा दिया गया। सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन में खलबली मच गयी। तत्कालीन एसपी एमपी वर्मा मौके पर पुलिस बल नेकर पहुंच गए। खबर आयी कि महराज को गिरफ्तार कर लिया गया है। पर पुलिस ने तुरंत इसका खण्डन किया, हालांकि महल में ही नजरबंद करने की बात कबूली। मामला इतना बड़ा था कि तत्कालीन डीजीपी खुद लखनऊ से नजर रखे हए थे।

by SUNIL SOMVANSHI

 

 

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