नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद नेेेेे कहा, CAA मुद्दे पर भाजपा और आरएसएस ने यूपी में फैलाई हिंसा

-बनारस में सपा नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, रंगकर्मी और बीएचयू के छात्रों ने नहीं की अराजकता
-जेल में बंद लोगों की हालत ठीक नहीं, संगीन धाराएं लगाना गलत

By: Ajay Chaturvedi

Published: 29 Dec 2019, 05:58 PM IST

वाराणसी. यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का कहना है कि CAA , NRC के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश में भाजपा और आरएसएस के लोगों ने हिंसा फैलाई। इस हिंसा में न तो किसी सपा नेता-कार्यकर्ता का हाथ है न अन्य छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, रंगकर्मियों का। कहा कि भाजपा और आरएसएस की मुहिम में पुलिस व प्रशासन ने भी सहयोग किया। जहां तक वाराणसी का सवाल है तो यहां अराजकता हुई, लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत छात्र, सामाजिक संगठनों के लोग सीएए व एनआरसी का विरोध करने के लिए निकले थे, उन्होंने कहीं कोई हिंसात्मक कार्रवाई नहीं की। बावजूद इसके न केवल उन्हें गिरफ्तार किया गया बल्कि संगीन धाराओं में जेल भेज दिया गया। समाजवादी पार्टी केंद्र व राज्य सरकार के इस कृत्य का पुरजोर विरोध करती है और इसके खिलाफ अंतिम दम तक संघर्ष किया जाएगा।

बता दें कि सपा अध्यक्ष व पूर्व सीएम अखिलेश यादव के निर्देश पर नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी के नेतृत्व में बब्बन सिंह चौहान (पूर्व विधायक), प्रभुनाथ यादव (विधायक चंदौली), नफ़ीस अहमद (विधायक आज़मगढ़) व ज़ाहिद बेग (पूर्व विधायक भदोही) की टीम रविार को बनारस आई थी। चौधरी ने सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत में कहा कि यह टीम जिला कारागार में बंद सामाजिक कार्यकर्ताओं, लोकतंत्र सेनानियों और बीएचयू के छात्रों से मिली और उनका हाल जाना। फिर बीएचयू के ट्रामा सेंटर पहुंच कर बजरडीहा में हुए लाठीचार्ज और भगदड़ में घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात की। इसी प्रकरण में मृत बच्चे के घर जा कर उनके परिजनों से भी वार्ता की। उन्होंने कहा कि अब सारी रिपोर्ट लखनऊ जा कर अखिलेश यादव को दी जाएगी।

चौधरी ने कहा कि बनारस सहित पूरे प्रदेश और देश में सीएए व एनआरसी के विरोध में शुरू हुए जनांदोलन को बदनाम करने और उसे कुचलने के इरादे से भाजपा और आरएसएस के लोगों ने जहां-तहां हिंसा फैलाई। विपक्ष हो या आमजन जिनमें साहित्यकार, कवि, लेखक, रंगकर्मी और छात्र शामिल है इनमें से किसी ने कहीं भी हिंसा नहीं की। ये सभी सीएए व एनआरसी का लोकतात्रिक ढंग से अहिंसात्मक तरीके से विरोध कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि 19 दिसंबर को बनारस सहित पूरे प्रदेश में सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण ढंग से धरना दिया और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा। सपा कार्यकर्ता तो दो बजे तक धरना खत्म कर अपने-अपने घरों को जा चुके थे। इन्होंने हिंसा नहीं की। लखनऊ का उदाहरण देते हुए कहा कि शाम करीब 4-4.30 बजे के करीब साफा बांधे कुछ युवा बाइक से आए और पहले से ही टूटी बस में आग लगा दी। उन्होंने प्रदेश के कई हिस्सों में पुलिस द्वारा भी हिंसा फैलाने और आगजनी का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि सरकार ने साजिशन धारा 144 लागू किया।

बनारस के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जिला कारागार में बंद लोगों ने जो बताया वह दहला देने वाला है। वो बहुत डरे हुए हैं। कहा कि निश्चित तौर पर बनारस में 19 दिसंबर को अत्याचार हुआ। कहा कि जेल में बंद लोगों ने बताया कि वो तो गांधीवादी तरीके से जुलूस निकाल रहे थे लेकिन धारा 144 का हवाला देते हुए पहले हिरासत में लिया गया फिर संगीन धाराओं में जेल में डाल दिया गया।

उन्होंने कहा कि मौजूदा केंद्र व राज्य सरकार ने तो अंग्रेजी हुकूमत को भी फेल कर दिया है। 1942 के आंदोलन में भी ब्रिटिश हुकूमत ने ऐसा नहीं किया जो यह सरकार कर रही है। लेकिन यह विरोध थमने वाला नहीं है। सीएए व एनआरसी का विरोध जारी रहेगा। सपा अंतिम दम तक इसके खिलाफ संघर्ष करेगी।

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