बदला 90 साल का इतिहास, आरएसएस ने खाकी हाफ पैंट को किया अलविदा

बदला 90 साल का इतिहास, आरएसएस ने खाकी हाफ पैंट को किया अलविदा
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स्थापना दिवस पर वाराणसी में फुल पैंट में निकले गणवेश

वाराणसी. सीने पर हाथ रखकर देश की खातिर सर्वत्र न्यौछावर करने का वचन देने  वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक ने अपना नब्बे साल पुराना इतिहास बदल दिया है। देखा जाए तो स्थापना दिवस यानि दशहरा के दिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नए युग का सूत्रपात हो गया है। स्वयंसेवकों ने खाकी हाफ पैंट को अलविदा कह दिया है। खाकी हाफ पैंट के स्थान पर अब भूरी फुल पैंट ने स्थान ले लिया है। दशहरा के दिन नागपुर में आयोजित समारोह में सरसंघ चालक मोहन भागवत भी नए गणवेश में नजर आए। 

मंगलवार को वाराणसी में मैदागिन इलाके से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानि आरएसएस  के गण नए कलेवर में जब सड़कों पर उतरे तो लोगबाग चकित दिखे क्योंकि गणवेश एक कलेवर में थे। भारत माता की जय नारे लगाते गणवेश नगर के विभिन्न इलाकों में आयोजित पथ संचलन में हिस्सा लिए। संदेह नहीं कि संघ के बदले कलेवर ने युवाओं को एक बार फिर आरएसएस की तरफ रास्ता दिखाया है। देश की सेवा के लिए युवाओं को एक बार फिर संघ का वह साथ मिला जिसकी मांग वह बीते लंबे समय से कर रहे थे। वाराणसी के रहने वाले साफ्टवेयर इंजीनियर विनय सिंह का कहना था कि मैं संघ की नीतियों व कार्यशैली से प्रभावित था। संघ पर गर्व है लेकिन उससे जुडऩे में थोड़ी हिचक थी उसके पहनावे को लेकर। हाफ पैंट में काम करने में थोड़ी दिक्कत होती थी। अब संघ के साथ जुडऩे में कोई परेशानी नहीं होगी। 

आज से नब्बे वर्ष पूर्व सन् 1925 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना हुई थी। उस समय की ब्रिटिश पुलिस से प्रभावित थी संघ की पोशाक। उस दौरान ब्रिटिश पुलिस में भर्ती सिपाही-दारोगा भी हाफ पैंट में रहते थे। संघ की पोशाक में खाकी हाफ पैंट, सफेद शर्ट, चमड़े की बेल्ट, जूता, खाकी जुराब, काली टोपी और हाथ में डंडा यही संघियों की पहचान हुआ करती थी अब तक।

भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक संरक्षक कहते जाने वाले संगठन में नए युग के सूत्रपात की नींव वर्ष 2009 में ही पड़ गई थी लेकिन प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। इस बीच मोदी रंग में रंगी भाजपा नए कलेवर के साथ लोकसभा चुनाव मैदान में उतरी। चुनाव में सबसे अधिक जोर भाजपा का पहनावे पर था इसलिए चुनाव प्रचार के दौरान मोदी जैकेट ने ऐसा रंग बिखेरा की केंद्र की सत्ता बीजेपी के पास बहुमत से आई। 


मोदी स्टाइल में जीत के बाद एक बार फिर आरएसएस को भी नए कलेवर में रंगने की मांग उठी। सबसे अधिक जोर हाफ पैंट को बदलने पर था क्योंक इसी हाफ पैंट के चलते युवा चाहकर भी संघ से जुडऩे में हिचक रहे थे। बीते वर्ष फिर प्रस्ताव आया और इस बार गंभीरता से विमर्श हुआ। संघ के आला नेता भी चाहते थे कि संघ की पोशाक में अब बदलाव जरूरी है। विमर्श के बाद अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने नई पोशाक का अनुमोदन किया जो सर्वसम्मति से पास हुआ। 

नई परंपरा में गणवेश अब काली टोपी, सफेद शर्ट, काले जूते, भूरी जुराबें, काली बेल्ट पहनेंगे। सर्दी के मौसम में गणवेश गहरे भूरे रंग का स्वेटर पहनेंगे। जानकारी के अनुसार  आरएसएस ने स्वयं सेवकों को वितरित करने के लिए आठ लाख से अधिक फुल पैंट बांटा है। दो लाख से अधिक संघियों को कपड़ा वितरित करने के लिए संघ कार्यालय भिजवाया गया है। 
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