बनारस में RTE बना मजाक, मानक को दरकिनार कर गरीबों के बच्चों को भेज रहे 6 किलोमीटर दूर

बनारस में RTE बना मजाक, मानक को दरकिनार कर गरीबों के बच्चों को भेज रहे 6 किलोमीटर दूर
स्कूल जाते गरीबों के बच्चे

Ajay Chaturvedi | Updated: 14 Jun 2019, 06:14:04 PM (IST) Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

- निजी स्कूलों की फ्री सीट पर दाखिले में खेल ही खेल
-दर्जनों अभिभावकों ने जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई आपत्ति

वाराणसी. बनारस में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) का किस तरह से माखौल उड़ा जा रहा है उसकी कल्पना तक नही की जा सकती। सारे मानक ताख पर रख दिए गए हैं। छोटे-छोट बच्चों को उनके आवास से 4- 6 किलोमीटर दूर भेज दिया जा रहा है। इतना ही नहीं कुछ ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिसमें अभ्यर्थी को जो स्कूल आवंटित किया गया है वह बंद है। इसका खुलासा हुआ है जनसूचना का अधिकार (आटीआई) के तहत। कई अभिभावकों ने जनसुनवाई पोर्टल पर अपनी आपत्ति जता दी है।

विकास खंड आराजी लाईन निवासी उक्त आवेदको ने आरटीई के तहत दाखिले के लिए बीआरसी आराजी लाईन पर ऑफलाइन आवेदन किया था। इसमें उन्होंने 6 निजी विद्यालयों का विकल्प दिया था। लेकिन जब नतीजा निकला तो पता चला कि उन्हें मांगे गए विकल्प की जगह अन्य विद्यालय दे दिया गया है।

केस-1
आलम यह है कि आराजी लाईन में शिक्षा के घमहापुर निवासी अजय प्रकाश वर्मा ने अपने बेटे रूद्र वर्मा के नर्सरी कक्षा में दाखिले के लिए ऑफलाइन आवेदन किया था। उन्हें 6 किमी दूर गिरजा शंकर जूनियर हाई स्कूल बीरभानपुर आवंटित किया गया है।

केस-2
गंगापुर निवासी अशोक कुमार वर्मा ने अपने बेटे नीतीश कुमार के दाखिले के लिए आवेदन किया था जिन्हें स्कूल तो मानक के अनुरूप तीन किलोमीटर की दूरी वाला ही मिला पर यह स्कूल अब बंद चल रहा है।

केस-3
भिखारीपुर निवासी अनिल कुमार यादव ने अपनी बेटी माही यादव का नर्सरी कक्षा में दाखिले के लिए आवेदन किया था। उसे हाईवे सिक्स लेन उस पार उत्तरी तरफ के 4 किमी दूर बीरभानपुर का शिवरामा पब्लिक स्कूल आवंटित किया गया है।

केस-4
इसी तरह कचनार निवासी किशन लाल सोनकर के पुत्र रूबल सोनकर व पंकज केशरी के पुत्री वैष्णवी केशरी को भी हाईवे सिक्स लेन उस पार उत्तरी तरफ 4 किमी दूर बीरभानपुर के शिवरामा पब्लिक स्कूल आवंटित किया गया है।

केस-5
कचनार निवासी अनिल कुमार केशरी के पुत्र प्रतीक केशरी व वकील के पुत्र राज हाशमी को हाईवे सिक्स लेन उस पार उत्तरी तरफ 4 किमी दूर बीरभानपुर के श्री सद्गुरु कृपा पति नंदन सनराइज स्कूल बीरभानपुर आवंटित किया गया है।

 

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स्कूल जाते बच्चे

कचनार निवासी विधवा नगीना पटेल ने अपने दो बच्चों के दाखिले के लिए आवेदन के समय पांच स्कूलों का विकल्प भरा था। लेकिन जब नतीजे आए तो पता चला कि बेटी आर्या पटेल को सृजन पब्लिक स्कूल दीपापुर व बेटे आनंद पटेल को मदर लैंड पब्लिक स्कूल बीरभानपुर दो अलग अलग स्कूल आवंटित कर दिया गया जबकि आवेदन करते समय ही नगीना ने कहा था कि मेरे दोनों बच्चों को एक ही स्कूल आवंटित किया जाए ताकि बच्चे को आने ले जाने में कोई समस्या न हो। लेकिन उनके आवेदन को दरकिनार कर दिया गया है।

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इन समस्याओं को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अभिभावकों की लाइन लगी है। सैकड़ों अभिभावक चिलचिलाती धूप मे कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। कोई दाखिले के लिए जारी सूची में नाम न आने का कारण पूछने पहुंच रहा है तो कोई गलत विकल्प को सही कराने के लिए जानकारी लेने। कार्यालय पहुंच रहे अभिभावको ने बताया कि उन्होंने ऑफालाइन आवेदन किया था, लेकिन उनका नाम नहीं आया है और न ही निरस्त सूची में ही नाम है। विनोद कुमार ने बताया कि उन्होंने दो प्रतियो मे फार्म भरे थे, लिस्ट में बच्चे का नाम ही गलत हो गया है। और तो और बच्चे को यूकेजी में दाखिले लेना था और एडमिशन नर्सरी में हो गया है।

आरटीई एक्टिविस्ट राजकुमार गुप्ता का कहना है कि शिक्षा विभाग की मिलीभगत से आरटीई अधिनियम का माखौल उड़ाया जा रहा है। जरूरतमंदों की जगह आरटीई नियमों की अनदेखी कर प्रतिष्ठित स्कूल संपन्न एवं अपात्र लोगों को आवंटित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसे कई दर्जन मामले हैं जिनमें संपन्न एवं अपात्र आवेदकों को प्रतिष्ठित स्कूल आवंटित किए जा रहे हैं जबकि जरूरतमंदों को मानक के विपरीत दूर दराज के स्कूल। उन्होंने बताया कि इस तरह की कई शिकायतें मिल रही है, जिन्हें एकत्र कर जल्द ही रिपोर्ट बाल संरक्षण अधिकार आयोग को भेजी जाएगी।

वहीं शिक्षा अधिकार जिला समन्वयक जेपी सिंह ने बताया कि इस तरह की त्रुटियों, गड़बड़ियो की लिखित सूचना मिलने पर उसे सुधारा जाएगा।

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