BHU : रणक्षेत्र में तब्दील हो गई महामना की कर्मभूमि, आए दिन होता है फसाद

BHU :  रणक्षेत्र में तब्दील हो गई महामना की कर्मभूमि, आए दिन होता है फसाद

Ajay Chaturvedi | Publish: Jan, 14 2018 04:23:45 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

अबकी मेडिकल के छात्र भिड़े, परिसर में तनावपूर्ण शांति।

वाराणसी. महामना की कर्मभूमि काशी हिंदू विश्वविद्यालय शिक्षा का मंदिर नहीं रणक्षेत्र बन गया है। आए दिन झगड़ा फसाद, लाठीचार्ज, छेड़खानी जैसी घटनाएं चर्चा में रहती हैं। परिसर प्रायः पुलिस छावनी में तब्दील रहता है। हाल के दिनों के हालात विश्वविद्याय की छवि बिगाड़ने में सहायक हो रहा है। मानने वालों का कहना है कि ऐसा विश्वविद्यालय में अनुशासन की बहाली में कमी मुख्य कारण है। परिसर की कानून व्यवस्था पर किसी का नियंत्रण नहीं रहा। लोगों का यह भी कहना है कि अनाथ संस्था के साथ इससे बेहतर और क्या हो सकता है। बता दें कि अक्टूबर से यहां कोई स्थाई कुलपति नहीं है। विश्वविद्यालय को कब मिलेगा कुलपति इसका अंदाजा लगाना भी आसान नहीं। दरअसल केंद्र सरकार इसके लिए संजीदा भी नहीं है शायद।

बता दें कि अभी कुछ ही दिन पहले बीएचयू परिसर जल उठा था। वह मसला अभी शांत भी नहीं हुआ कि अब फिर से मेडिकल के छात्र आपस में भिड़ गए। जमकर दोनों पक्षों में मारपीट हुई। परिसर में अफरा-तफरी मच गई। फिर बुलाना पड़ा पुलिस को। पुलिस ने किसी तरह से मामले को संभाला। घायल छात्रों को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है, वहां पुलिस की तैनाती कर दी गई है। परिसर में तनावपूर्ण शांति है। ऐसा बीएचयू प्रशासन का दावा है।

 

बीएचयू बवाल के बाद ट्रामा सेंटर में घायल मरीजों की रक्षा में पुलिस

शनिवार को रूईया हॉस्टल के छात्रों के बीच आपस में हुई मारपीट में आधा दर्जन छात्रों को चोट आई हैं, जिनका इलाज ट्रामा सेंटर में चल रहा है। एहतियात के तौर पर पुलिस व पीएसी तैनात कर दी गई है। बता दें कि विश्वविद्यालय परिसर में हर दिन शाम को छात्र क्रिकेट खेलते हैं। शनिवार की शाम को भी मैच चल रहा था कि रूईया छात्रावास में रहने वाले मेडिकल छात्रों (बीडीएस और एमबीबीएस) की आपस में क्रिकेट के बॉल को लेकर कहासुनी हो गई। मैच के दौरान बस हल्की मारपीट के बाद मामला शांत हो गया और छात्र हॉस्टल लौट आए। इसी बीच रात करीब आठ बजे एक बार फिर दोनों गुटों के बीच जमकर मारपीट हुई। करीब आधे घंटे तक चले इस बवाल में दोनों पक्षों से तीन-तीन छात्र घायल हैं।

बता दें कि पिछेल तीन साल से विश्वविद्यालय परिसर में मारपीट, हंगामा, छेड़खानी, हास्टर में घुसना, धरना-प्रदर्शन, लाठीचार्ज यही सब चल रहा है। ताजा उदाहरण ले तो 21 सितंबर को एक छात्रा के साथ छेड़खानी हुई तो छात्राओं के धैर्य का बांध टूट पड़ा और वे धरने पर बैठ गईं। सिंह द्वार पर दो दिन तक धऱना चला लेकिन दूसरे दिन उन्हीं छात्राओं पर विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों ने तब लाठीचार्ज किया जब वे वीसी से मिलने उनके आवास पर गई थीं। मामला तूल पकड़ा और एमएचआरडी ने वीसी को फोर्स लीव पर भेज दिया। उसके बाद से नए वीसी की नियुक्ति की बाट जोह रहा है विश्वविद्यालय। चौथा महीना चल रहा लेकिन अभी नए वीसी की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में अनाथ विश्वविद्यालय में गत 20 दिसंबर को छात्रों ने जम कर बवाल मचाया। सौ से अधिक वाहनों को क्षति पहुंचाई गई। स्कूल बस में आग लगा दी गई। जमकर तोड़फोड़ हुआ। समाजवादी छात्रसभा के नेता आशुतोष को जेल भेजा गया तो वह जेल में ही धरने पर बैठ गए। समाजवादी छात्रसभा और सपा के लोगों ने जेल के सामने प्रदर्शन किया। समाजवादी पार्टी की पदाधिकारी डीएम से मिलने तक चले गए। उस प्रकरण में 15 लोगों को नामजद किया गया था जिसमें 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसी बीच विश्वविद्यालय के पीआरओ को फोन पर धमकी देने की घटना वायरल हुई। धमकी देने वाला अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। यही नहीं कुछ लड़को ने आईआईटी बीएचयू के सांस्कृतिक कार्यक्रम का विरोध किया। सरसुंदर लाल चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के घर पेट्रोल बम फेका गया। आईआईटी बीएचयू के निदेश के फेसबुक अकाउंट से गालीगलौज का मामला भी सामने आया। ये सारी घटनाएं सितंबर से दिसंबर तक की हैं। अब जनवरी में यह मेडिकल छात्रों का मामला सामने आया है।

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