गणेश चतुर्थी 2018: इस शुभ मुहुर्त में करें पूजा, घर में आएगी खुशहाली, भरेगी सूनी गोद

संकष्टी चतुर्थी पर इस विधि से करें गणेश जी पूजा

By: sarveshwari Mishra

Published: 04 Jan 2018, 09:28 AM IST

वाराणसी. सकष्टी चतुर्थी का व्रत हर माह होता है, लेकिन यह पर्व माघ स्नान का प्रथम सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। इस वर्ष संकट चतुर्थी व्रत 5 जनवरी 2018 को है। संकष्टी चतुर्थी को सभी संकटों से मुक्ति दिलाने वाला चतुर्थी माना जाता है। इस पर्व को संकट चतुर्थी व्रत के अलावा वक्रतुंडी चतुर्थी, माघी चौथ अथवा तिलकुटा चौथ व्रत भी कहा जाता है। इस दिन श्री गणेश जी की पूजा-अर्चना और व्रत करने से मनुष्य के समस्त संकट दूर हो जाते हैं।

संकट चतुर्थी पर इस विधि से करें गणेश जी पूजा
सर्व प्रथम प्रातःकाल स्नान करके गणेश जी की पूजा का संकल्प लें।
पूरे दिन भर जलहार या फलाहार ग्रहण करना उत्तम रहेगा।
शाम के समय भगवान गणेश की विधिवत आराधना करें।
साथ ही साथ भगवान गणेश जी को मोदक (लड्डू), दूर्वा और पीले पुष्प अर्पित करें।
चंद्रमा को मस्तक नीचे कर अर्घ्य दें।
भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें।
मनोकामना पूर्ति के लिए 11 दूर्वा भगवान गणेश को अर्पित करें।
आरती में गणेश वंदना करना बेहद शुभ फलदायक होगा।

संकट चतुर्थी व्रत संतान कष्ट दूर करता है
विना किसी विघ्न के कार्यों की समाप्ति हेतु सर्वप्रथम गणेश जी की पुजा जाती है। गणपति हिन्दू समाज में शुभता के प्रतीक हैं। यही नहीं गणेश पूजन किए बिना कोई भी देवी-देवता, त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु और महेश, आदिशक्ति, परमपिता परमेश्वर की भक्ति-शक्ति प्राप्त नहीं कर सकता। स्पष्ट है कि केवल गणेश जी पूजा मात्र से ही समस्त देवी-देवता, त्रिदेव, आदिशक्ति, परमपिता परमेश्वर प्रसन्न हो उठते हैं। गणेशजी को यह वरदान माता-पिता शिव-पार्वती की सेवा करने से प्राप्त हुआ। गणेशजी को प्रतिदिन स्नान के बाद उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके एक बार जल अर्पित करना चाहिए।


संकट चतुर्थी व्रत कथा
इस व्रत की एक प्रचलित कथा है- सतयुग में महाराज हरिश्चंद्र के नगर में एक कुम्हार रहता था। एक बार कुम्हार ने बर्तन बना कर आंवा लगाया, पर आंवा पका ही नहीं बर्तन कच्चे रह गए। इससे कुम्हार बहुत परेशान हो गया और बार-बार नुकसान होते देख उसने एक तांत्रिक के पास जाकर पूछा तो उसने कहा कि इस संकट से बचने के लिए किसी एक बच्चे की बलि देना पड़ेगा। बलि के बाद तुम्हारे सभी संकट दूर हो जाएगा। तब उसने तपस्वी ऋषि शर्मा की मृत्यु से बेसहारा हुए उनके पुत्र को पकड़ कर संकट चौथ के दिन आंवा में डाल दिया। परन्तु सौभाग्यवश बालक की माता ने उस दिन गणेशजी की पूजा की थी। बहुत खोजने के बाद भी जब पुत्र नहीं मिला तो गणेशजी से प्रार्थना की।

सुबह कुम्हार ने देखा कि आंवा तो पक गया, परन्तु बच्चा जीवित और सुरक्षित था। डर कर उसने राजा के सामने अपना पाप स्वीकार कर लिया। राजा ने माता से इस चमत्कार का रहस्य पूछा तो उसने गणेश पूजा के बारे में बताया। राजा ने संकट चतुर्थी व्रत की महिमा स्वीकार की तथा पूरे नगर में गणेश पूजा करने का आदेश दिया। इसी कारण प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकटहारिणी माना जाता है और इस दिन गणेश जी की पूजा अर्चना करने से सभी प्रकार के कष्ट शीघ्र ही समाप्त हो जाते हैं।

Show More
sarveshwari Mishra
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned