कलाकारों की आवाजः विलुप्त हो रही काशी की संस्कृति व कला, इसे अक्षुण्ण रखने को चाहिए बड़ा मंच

कलाकारों की आवाजः विलुप्त हो रही काशी की संस्कृति व कला, इसे अक्षुण्ण रखने को चाहिए बड़ा मंच
Shat Vibhuti samman smaroh

संकट मोचन फाउंडेशन के शत-विभूति सम्मान समारोह, में नवोदित कलाकारों का हुआ सम्मान।

वाराणसी. दुनिया का सबसे छोटा और सबसे प्राचीन जिंदा शहर जिसमें समाहित है सारे जहां का हुनर। लेकिन अफसोस कि यहां के कलाकारों के लिए एक कला दीर्घा तक नहीं जहां उदीयमान कलाकारों को  अपने पूर्वजों के हुनर को आत्मसात करने का मौका मिले। मुंबई और बंगलोर जैसे शहरों में कला दीर्घा  है पर जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है वहां ही इसका न होना खटकता है। यही वजह है कि बनारस घराने की कला और संस्कृति अब धीरे-धीरे लुप्त हो जा रही है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि काशी की कला और संस्कृति को अक्षुण्ण रखने के लिए यहां एक कला दीर्घा की स्थापना हो जहां यहां के उदीयमान कलाकार पूर्वजों की थाती को जीवित रख सकें जिस तरह से प्राचीन नगरी जीवंत है उसी तरह से यहां की कला भी जीवित रह सके। यह आवाज उठी रविवार को तुलसी घाट पर। मौका था संकट मोचन फाउंडेशन द्वारा आयोजित शत-विभूति सम्मान समारोह का।



कला, साहित्य और संस्कृति की नगरी काशी सदैव से ऐसे कलाकारों को जन्म देती आई है जिनका डंका पूरे देश में बजता आया है। भारतरत्न विस्मिल्लाह खां, पंडित रविशंकर, तबला उस्ताद किशन महराज, अमरनाथ जी जैसे कई कलाकार इसी काशी में जन्मे और अपने रियाज से अपना मुकाम हासिल किया। अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर काशी का नाम रोशन किया। इनमें से किसी ने किसी संस्था में जा कर हुनर नहीं सीखा अपितु अपनी नैसर्गिक प्रतिभा को रियाज से माजा।  उन्हीं कलाओं में कई ऐसी विधाएं हैं जो अब विलुप्त होती जा रही हैं। उन्हें सजोना कठिन हो रहा है। वक्त का तकाजा है कि उन विधाओं को बचाया जाए। इसके लिए किसी न किसी को आगे आना ही होगा। और यह काम भली भांति कर रहा है संकट मोचन फाउंडेशन। संकट मोचन फाउंडेशन न केवल संगीत समारोह आयोजित करता है बल्कि अब तो इसने बकायदा, चित्रकारी की विधा को भी जिवंत करने का बीड़ा उठा लिया है। चाहे वह संकट मोचन संगीत समारोह हो या ध्रुपद मेला। दोनों ही मौकों पर काशी के उदीयमान चित्रकारों का समूह जिसे मशहूर चित्रकार एस प्रणाम सिंह ने आनंद वन नाम दिया है के नाम से जीवंत किया है। यह आनंद वन चित्रकारों का एक समूह है जिसके सदस्य हफ्ते या महीने में एक बारगी आपस में मिलते हैं, अपनी कला पर चर्चा करते हैं। उसे बड़ा आकार देने पर चर्चा करते हैं। लेकिन बात इतने से ही बनती नहीं, अब जरूरत है एक बड़े मंच की जहां काशी की कला, संस्कृति और परंपरा को जीवित रखा जा सके। यह कहना था एस प्रणाम सिंह और सुनील विश्वकर्मा का।



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इस मौके पर मुख्य अतिथि शहर उत्तरी के विधायक रवींद्र जायसवाल ने संकट मोचन फाउंडेशन के इस प्रयास की सराहना की। साथ ही वादा किया कि वह फाउंडेशन के प्रयासों में एक काशी की 100 विभूतियों के चित्रों से सजे 3डी कोलार्ज को तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाएंगे ही। साथ ही काशी की संस्कृति और कला को अक्षुण्ण रखने के लिए कला दीर्घा की स्थापना के लिए भी वार्ता कर उसे मूर्त रूप देने का प्रयास करेंगे।





उन्होंने काशी की 100 विभूतियों से उकेरे गये कोलॉर्ज को देखकर कहा कि यह महज एक कोलॉर्ज नहीं अपितु काशी का संक्षिप्त दर्शन है। उन्होंने कहा कि इस तस्वीर को युवा कलाकारों के साथ संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र के अनुज व ख्यात न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. विजयनाथ मिश्र की अगुवाई में पीएम नरेंद्र मोदी को भेंट की जाएगी। हम सब उनसे अनुरोध करेंगे कि काशी की दीवारों पर केंद्र सरकार की योजना से उकेरी जा रही तस्वीरों को यूनिवर्सिटी के युवाओं और काशी के रहने वाले कलाकरों से बनवाई जाए ताकि असल काशी का दृश्य उभरकर सामने आए। उन्होंने संकटमोचन फाउंडेशन के प्रयासों को सराहते हुए कहा कि हम सबको फाउंडेशन के साथ आगे बढ़ना चाहिए।


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 भाजपा नेता दयाशंकर मिश्र 'दयालु' ने कहा कि इस अद्भुत तस्वीर को काशी के प्रसिद्ध जगहों पर लगाया जाए ताकि नई पीढियां जान सके। विशिष्ठ अतिथि वरिष्ठ पत्रकार रजनीश त्रिपाठी ने कहा कि यह प्रयास वक्त की जरूरत है। काशी की कलाकारी, चित्रकारी को संरक्षण दिया जाए। संकट मोचन फाउंडेशन का प्रयास सराहनीय है जिसने उन युवा कलाकारों को मंच दिया है जो कलाकारी के क्षेत्र में अपना भविष्य उज्जवल देख रहे है। उन्होंने कहा कि संकटमोचन संगीत समारोह के दौरान सजी कला दीर्घा में यह अनूठा प्रयोग किया गया जो सराहनीय है। संगीत समारोह पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है काशी के युवा कलादूत उस प्लेटफार्म से अपने संदेश दूर तलक तक पहुंचा सकते हैं।



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इस दौरान अतिथियों ने आनंदवन ग्रुप के कलाकारों और संकटमोचन संगीत समारोह के दौरान हनुमान जी के विराट रुप बनाने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया। साथ ही राम भक्त हनुमान के अलग-अलग रूपों पर आधारित चित्रों के एलबम का लोकार्पण भी हुआ।






कार्यक्रम में आए अतिथियों का स्वागत युवा कलाकार दीपिका शर्मा और पूजा शाह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन फाउंडेशन के निदेशक एसएन उपाध्याय ने दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. विजयनाथ मिश्र ने किया।



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