scriptSankatmochan Sangeet Samaroh 2022 start eminent artists presented Sangeetanjali in Hanumat Darbar | संकट मोचन संगीत समारोह के 99वें संस्करण का आगाजः शिवमणि और राजेश की जुगलबंदी पर झूमे श्रोता, विश्वमोहन की वीणा ने किया मंत्रमुग्ध | Patrika News

संकट मोचन संगीत समारोह के 99वें संस्करण का आगाजः शिवमणि और राजेश की जुगलबंदी पर झूमे श्रोता, विश्वमोहन की वीणा ने किया मंत्रमुग्ध

कोरोना काल के दो वर्षों में डिजिटली पवनसुत हनुमान के श्री चरणों में संगीतांजलि अर्पित करने के बाद बुधवार को देश के जाने माने कलाकारों का जुटान संकट मोचन मंदिर में हुआ। संकटमोचन संगीत समारोह के 99वें संस्करण का आगाज पद्मश्री ड्रमर शिवमणि और पद्मश्री मेंडोलिन वादक यू. राजेश की जुगलबंदी से हुआ तो बुधवार और गुरुवार की भोर में साजन मिश्र के गायन से पहली निशा का समापन हुआ।

वाराणसी

Published: April 21, 2022 12:27:43 pm

वाराणसी. कोरोना काल के दो वर्षों तक संकटमोचन हनुमान दरबार में डिजटली संगीतांजलि अर्पित करने के बाद देश के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों का फिर से हनुमत दरबार में जुटान हुआ। कलाकारल जुटे तो संगीत के रसिकों का भी मेला लगा। बजरंगबली के जयकारे संग महफिल का आगाज पद्मश्री ड्रमर शिवमणि और पद्मश्री मेंडोलिन वादक यू राजेश की जुगलबंदी से हुआ। संकटमोचन संगीत समारोह के 99वें संस्करण के आगाज के साथ ही काशी के इस अतिविशिष्ट आयोजन के शताब्दी वर्ष की शुरूआत भी हो गई।
शिमणि और राजेश ने ऐसे किया आगाज
शिमणि और राजेश ने ऐसे किया आगाज
संकटमोचन संगीत समारोह की पहली निशा का आगाज करते पद्मश्री ड्रम वादक शिवमणिशिवमणि और राजेश की जुगलबंदी ने श्रताओं को झूमने पर विवश कर दिया
हनुमत दरबार में बजरंगबली के जयकारे के साथ संगीत समारोह के मंच पर आए पद्मश्री ड्रमर शिवमणि और पद्मश्री मेंडलिन वादक यू राजेश। मैरून रंग का कुर्ता, लुंगी और उसी रंग का पटका सिर पर बांधे काला चश्मा लगाए शिवमिण और सफेद कुर्ता पायजामा पहले मेंडोलिन वादक यू राजेश ने महंत प्रो.विश्वंभर नाथ मिश्र का आशीर्वाद लेकर मंच पर पहुंचे। दोनों कलाकारों के मंच पर पहुंचते ही हनुमत दरबार में मौजूद संगीत प्रेमियं ने करतल ध्वनि से उनका स्वागत किया। हर-हर महादेव का उद्घोष हुआ। इसके बाद इन दोनों ही कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को झूमन पर विवश कर दिया। एक हाथ में घंटा तो दूसरे हाथ में शंख के समवेत स्वर से संपूर्ण वातावरण को गुंजायमान हो उठा। फिर शुरू हुई जुगलबंदी। प्रारंभ में राजेश की मेंडोलिन धुन मुखर हो रही थी तो उसके साथ शिवमणि ने खजड़ी बजाते हुए श्रोताओं को चिरपरिचित ताल का एहसास कराया।
शिवमणि के ड्रम वादन की कला ने कर दिया सम्मोहित
शिवमणि ने जिस अंदाज में ड्रम बजाया कि श्रोता वाह-वाह कर उठे। हाथ-पांव एक साथ चल रहे थे, मगर दोनों के बीच गजब का सामांजस्य रहा। दाहिना पैर बेस पर थाप दे रहा था तो दोनों हाथों की स्टिक दो जोड़ी ड्रम के छह टमटम पर आरोही-अवरोही क्रम में मुधर प्रहार कर रही थी। ताल यात्रा करते-कराते अचानक ही दोनों कलाकारों ने भजन की धुन की ओर रुख कर श्रोताओं को सम्मोहित कर दिया। करीब आघे घंटे तक ताल का जादू बिखरने के बाद भजन ‘गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो’ की धुन फिर शिवस्तुति और हनुमान बाहुक की चंद पंक्तियों को धुन में पिरोकर श्रोताओं को आनंदित किया।
प्रस्तुति देते शिमणि और राजेशपंडित जसराज के शिष्य गौतम काले ने गुर की उपस्थिति का कराया अहसास

प्रथम निशा की दूसरी प्रस्तुति इंदौर के गौतम काले की रही। पं. जसराज के शिष्य गौतम काले ने राग जोग की अवतारणा की। उन्होंने गायन की शुरुआत विलंबित एक ताल में निबद्ध बंदिश ‘पिया घर न आए’ से की। आलाप का गांभीर्य और स्वरों की सहजता से उन्होंने श्रोताओं को बांधे रखा। इसके बाद मध्य लय तीन ताल में ‘तुम बिन कैसे कटे रतिया’ के बाद गुरु पंडित जसराज की प्रिय रचना ‘हनुमान लला मेरे प्यारे लला...’ गा कर संगीत रसिकों के बीच पंडित जसराज की स्मृति ताजा कर दी। इसके बाद उन्होंने हवेली संगीत के पदों से भी श्रोताओं को रससिक्त किया। ‘ब्रज वसंतम नवनीत चौरम’ के बाद उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित ‘लाल गोपाल गुलाल हमारे’ से गायन को विराम दिया। उनके साथ हारमोनियम पर विनय मिश्रा और तबले पर रजनीश मिश्रा ने संगत की।
संकटमोचन संगीत समारोह की पहली निशा की दूसरी प्रस्तुतमोहन और सात्विक वीणा से मुखर हुए समान सुर
पद्मभूषण पं. विश्वमोहन भट्ट और उनके पुत्र सलिल भट्ट तीसरी प्रस्तुति लेकर मंचासीन हुए। भारत रत्न पं. रविशंकर के प्रिय शिष्यों में से एक पं. विश्वमोहन भट्ट ने मोहनवीणा और सलिल भट्ट ने सात्विक वीणा में समान सुर अवतरित किए। रात्रि साढ़े दस बजे उन्होंने पहली प्रस्तुति राग बिहाग में दी। आलाप की सुमधुरता में तल्लीन श्रोताओं ने युगल वादन के एक एक स्वर का आनंद लिया। स्वर रचना की पूर्णता के बाद राम भजन से उन्होंने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बीस तारों वाली मोहन और सात्विक वीणा से उभरते स्वर ने हृदय तक को झंकृत कर दिया। लंबे अंतराल के बाद संगीत समारोह में पधारे पं. विश्वमोहन भट्ट ने श्रोताओं के अनुरोध पर एक धुन भी सुनाई।
संकटमोचन के महंत प्रो विश्वंभर नाथ मिश्रसमय का ध्यान तक नही रहा संगीत रसिकों को

संगीत की इस पहली निशा का आलम ये रहा कि श्रोता इतने मंत्र मुग्ध रहे कि समय का पता ही नहीं चला। जब भोर में चिड़ियों की चहचहाट सुनाई दी तो भी लोगों को पल भर को यही लगा कि ये भी इन कलाकारों की प्रस्तुति ही है। इस तरह से पूरी रात देश के इन ख्यातिलब्ध कलाकारों जिनमें उल्हास कसालकर, कुमार बोस, प्रसाद खापर्डे, शिराज अली खां और साजन मिश्र हनुमत दरबार में प्रस्तुति समर्पित करते रहे।
भोजपुरी गीतकार हरिराम द्विवेदी ने किया स्वागत
भोजपुरी के शीर्ष गीतकार पं. हरिराम द्विवेदी ने अतिथि कलाकारों और श्रोताओं का चिरपरिचित अंदाज में स्वागत किया।’

संकटमोचन संगीत समारोह की पहली निशा में जमा श्रोतागणपरिसर में लगे कटआउट दिवंगत कलाकारों की उपस्थिति का कराते रहे अहसास
मंदिर परिसर में कोरोना काल में दिवंगत हुए देश के श्रेष्ठ संगीत साधकों के बड़े-बड़े कटाउट भी लगाए गए थे जो उनकी उपस्थित का अहसास करा रहे थे। दरअसल कोरोनाकाल में दिवंगत कलाकारों की यादों को ताजा रखने के लिए ही ये कटआउट लगाए गए हैं। इन कटआउट में सभी कलाकार भावपूर्ण मुद्रा में गायन-वादन और नृत्य करते दिख रहे हैं। परिसर स्थित प्राचीन बरगद के पेड़ के नीचे वाले चबूतरे पर पं. जसराज का कटआउट लगा है तो दक्षिण में पेड़ों के झुरमुट के नीचे कथक सम्राट पं. बिरजू महाराज और ख्याल गायिकी के फकीरी शैली के बादशाह पद्मभूषण पं. राजन मिश्र गायकी की भावपूर्ण मुद्रा वाला कटआउट है। वहीं अतिथि भवन के बरामदे में पूरब की ओर मुख किए देबू चौधरी और प्रतीक चौधरी के कटआउट हैं। यहां से कुछ ही दूरी पर पं. गोपाल पांडेय का कटआउट लगाया गया है।
संकट मोचन : कला दीर्घा ले रही है आकार

संकटमोचन संगीत समारोह का खास हिस्सा बन चुकी कला दीर्घा दो वर्ष के अंतराल पर आकार ले रही है। प्रथम संध्या में परिसर के दक्षिणी-पश्चिमी कोने पर स्थित मंच पर सांगीतिक प्रस्तुतियों का दौर चल रह था। ठीक उसी समय परिसर के पूर्वोत्तर कोने पर कला दीर्घा आकार ले रही थी। मंदिर के प्राचीन प्रवेश द्वार से मुख्य मंडप की ओर आने वाले रास्ते के दोनों ओर चित्रकृतियों को सजाया जा रहा था। कला दीर्घा में विगत वर्षों में काशी के नामचीन चित्रकारों द्वारा तैयार सौ से अधिक चित्रकृतियां सजाई जाएंगी। प्रथम दिन आधे से अधिक कृतियां गैलरी की शोभा बढ़ाती दिखीं।
संगीत समारोह में आज

अनू सिन्हा -कथक
सुलग्ना बनर्जी- कथक
कल्पना जोकरकर- गायन
देवज्योति बोस- सरोद
अनूप जलोटा- भजन
जयतीर्थ मेवुंडी- गायन
सुरेश तलवलकर- तबला वादन
देवाशीष डे- गायन

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