बनारस क्लब पर बड़े घोटाले का आरोप, विधान परिषद समिति ने प्रमुख सचिव आवास, DM व VC VDA से मांगी रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की विकास प्राधिकरणों, आवास विकास परिषद, नगर निकायों, जिला पंचायतों पर अंकुश लगाने वाला समिति में उठा नजूल की भूमि पर अवैध कब्जे का मामला।

By: Ajay Chaturvedi

Published: 24 Jul 2018, 08:28 PM IST

वाराणसी. बनारस क्लब पर बड़े घोटाले का आरोप लगा है। ऐसे में विधान परिषद की विशेष समिति का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश विधान परिषद की विकास प्राधिकरणों, आवास विकास परिषद, नगर निकायों, जिला पंचायतों पर अंकुश लगाने वाला समिति की बैठक में बनारस क्लब का मुद्दा उठा। बैठक में बताया गया कि बनारस क्लब ने नजूल की भूमि के विक्रय के प्रलेख में लिखित शर्तों का उल्लंघन करते हुए गैर आवासीय अवैध निर्माण कराया है। नजूल भूमि पट्टे का नवीनीकरण तक नहीं कराया गया। यहां तक कि पत्रावलि में हेरफेर किया गया। महायोजना 2021 के प्रावधानों को ताख पर रखा। अब क्लब में अवैध तरीके से बार, स्वीमिंग पुल, बैंक्वेट आदि का अवैध तरीके से निर्माण कराया गया है जो नजूल नीति 1914 व 2015 तथा 2018 के सुसंगत प्रावधानों तथा भू प्रयोग नीति का खुला उल्लंघन है। बैठक में इस सारी गतिविधियों में सरकारी संरक्षण दिए जाने का आरोप भी लगा। इस पर समिति के सभापति नरेश उत्तम ने इसे गंभीर और लोकमहत्व से जुड़ा प्रकरण मानते हुए सभी बिंदुओं पर बैठक में उपस्थित प्रमुख सचिव आवास, जिलाधिकारी वाराणसी व उपाध्यक्ष वाराणसी विकास प्राधिकरण को समिति की अगली बैठक में सभी बिंदुओं पर स्पष्ट रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

नजूल भूमि पट्टे की अनदेखी, नजूल नीति का खुला उल्लंघन
सपा एमएलसी शतरुद्र प्रकाश ने पत्रिका को बताया कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद की विकास प्राधिकरणों, आवास विकास परिषद, नगर निकायों, जिला पंचायतों पर अंकुश लगाने वाला समिति की बैठक में उन्होंने ही यह मुद्दा उठाया। समिति को बताया कि बनारस क्लब का नजूल भूमि का पट्टा भी कथित रूप से 1935 में संपन्न हुआ बताया जा रहा है। नजूल पट्टा कुल 90 वर्ष के लिए हुआ था। लेकिन अन्य शर्तों के साथ मुख्य शर्त थी कि प्रत्येक 30 वर्ष की अवधि पर पट्टे का दो बार नवीनीकरण नए पट्टे के रूप में कराया जाएगा। इसके तहत 1965 में प्रथम नवीनीकरण कराना था जो नहीं हुआ। इसके बाद 1995 में दूसरी बार नवीनीकरण कराना था, वह भी नहीं हुआ। इस बीच 1985 में बैक डेट 1965 से 1995 तक किया गया। 1985 में लिख दिया गया कि पट्टा तब तक की अवधि के लिए रहेगा जब तक इस क्लब के अध्यक्ष मंडलायुक्त वाराणसी रहेंगे। यह शर्त मूल पट्टे में नहीं लिखी थी। ऐसे में आवास विभाग द्वारा नजूल नीति 1914 व 2015 तथा 2018 के सुसंगत प्रावधानों के अनुसार ही पट्टा किया जा सकता है।

नगर योजना एवं विकास अधिनियम को रखा ताख पर
शतरुद्र प्रकाश ने पत्रिका को बताया कि 2014 तथा 2016 की नीति में स्पष्ट लिखा है कि प्रभावी महायोजना में प्रस्तावित भू प्रयोग के अनुसार ही नजूल पट्टा संभव है। वाराणसी विकास क्षेत्र महायोजना 2021 तता बनारस क्लब की भूमि को राजकीय कार्यालय तथा अर्द्ध राजकीय कार्यालय के रूप में दर्शाया गया था। बनारस क्लब द्वारा प्रश्नगत अवैध निर्माण 1991-2011 के बीच किया गया। तत्संभव वाराणसी महायोजना में भू-प्रयोग राजकीय कार्यालय व अर्द्ध राजकीय कार्यालय प्रस्तावित किया गया था। बावजूद इसून 2010के संबंधित निर्माण के बाबत वीडिए से अनुमति नहीं ली गई। वीडिए ने बनारस क्लब द्वारा 973.05 वर्ग मीटर के नाप में निर्मित अवैध निर्माण को 29 जून 2010 को नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 27 (2) के तहत निर्माण ध्वस्तीकरण आरंभ किया था। इसके विरुद्ध बनारस क्लब ने अधिनियम की धारा 27 (2) के अंतर्गत अध्यक्ष वीडिए के समक्ष अपील दाखिल किया। इस अपील को अध्यक्ष द्वारा 27 दिसंबर 2012 को वीडिए के अनुसार निस्तारित करने के लिए प्रत्यावर्तित कर दिया।

 

बनारस क्लब का बार

वीडिए अध्यक्ष की भूमिका पर सवालिया निशान
उन्होंने समिति को बताया कि बनारस क्लब द्वारा बार-बार अवैध निर्माण किए जाने पर वीडिए द्वारा 14 जून 2010 को अधिनियम की धारा 28 (1) (2) के तहत सीलबंदी की थी। इस पर बनारस क्लब ने इसके विरुद्ध भी वीडिए अध्यक्ष के समक्ष अपील किया। इस पर क्लब द्वारा दिए गए अंडर टेकिंग कि क्लब द्वारा कोई निर्माण नहीं किया गया है को स्वीकार करते हुए अध्यक्ष वीडिए ने 22 दिसंबर 2010 को सील खोलने का सशर्त आदेश निर्गत कर दिया। उसके बावजूद अवैध निर्माण किया गया तथा 27 अक्टूबर 2017 तथा उसके बाद भी अवैध निर्माण किया गया। लिफ्ट तक लगा दी गई। बार चलाया जा रहा है। बैंक्वेट हॉल निर्मित हो गया। जिम का भी उद्घाटन हो गया।

उत्तर प्रदेश सरकार बनारस क्लब पर करे कब्जा
उन्होंने बताया कि अवैध निर्माण के साथ अदियाम की धारा 16 का भी उल्लंघन किया गया है। महायोजना में प्रस्तावित भू-प्रयोग के विरुद्ध भूमि/ भवन का उपयोग किया जा रहा है जो अवैधानिक है। कहा कि चूंकि अवैध निर्माण द्वारा बनारस क्लब ने नजूल पट्टे में नजूल भूमि विक्रय पत्र में वर्णित शर्तों व बाध्यता का उल्लंघन किया है, ऐसे में राज्य/ राज्य सरकार को बनारस क्लब में पुनः प्रवेश करते हुए कब्जा करना चाहिए। साथ ही विक्रय पत्र निरस्त करना चाहिए।

क्लब की जमीन जिला कचहरी को दी जाए
सपा नेता ने कहा कि वाराणसी कचहरी विस्तार के मद्देनजर इसे जिला न्यायालय के कार्यालय व संबद्ध प्रयोजन के लिए इसे जिला वाराणसी कचहरी को हस्तगत कर देना चाहिए। यहां व्यावसायिक या फिर किसी भी निजी गतिविधियों के प्रयोजन के लिए नजूल भूमि का पट्टा नहीं हो सकता। इसके लिए नवीनीकरण या नया पट्टा या फ्री होल्ड नीलामी द्वारा ही संभव है। राजकीय अथवा अर्द्ध राजकीय कार्यालय या अन्य कार्यालय के लिए इसे वाराणसी जिला कचहरी के विस्तार के लिए कचहरी को दिया जाना ही औचित्यपूर्ण है।

बैठक में ये थे शामिल
समिति की बैठक में रविशंकर सिंह पप्पू, केदार सिंह, संतोष यादव सनी, आनंद भदौरिया, राकेश यादव, वासुदेव यादव, यशवंत सिंह आदि मौजूद रहे।

 

Ajay Chaturvedi
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