सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में अड़ंगा डालते रहे हैं शिवपाल

सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में अड़ंगा डालते रहे हैं शिवपाल
akhilesh and shivpal

दीपक सिंघल ने वरुणा कारिडोर के मामले में दो के खिलाफ बिना मतलब की थी कार्रवाई

वाराणसी. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच चल रही रस्साकसी की पथकथा आजकल नहीं बल्कि बीते दो वर्षों से लिखी जा रही थी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चाहकर भी अपने चाचा शिवपाल यादव की गोलबंदी से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। आलम यह कि शिवपाल ने अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट में भी अड़ंगा लगाना शुरू कर दिया था। 

वाराणसी में अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर के निर्माण के पीछे हुई देरी की वजह भी शिवापाल यादव व उनके खास सिंचाई राज्यमंत्री का खेल बताया जा रहा है जिसके चलते ड्रीम प्रोजेक्ट को शुरू होने में ही साढ़े चार साल लग गए। इतना ही नहीं अखिलेश की जब त्यौरी चढ़ी तब प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ लेकिन उसका समय ऐसा चुना गया जिसका खामियाजा अखिलेश यादव को भुगतना पड़ा। 


गौरतलब है कि शिवपाल के पास सिंचाई विभाग भी था। शिवपाल यादव के गुट से जुड़े सिंचाई राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल हैं। वरुणा कॉरिडोर के निर्माण का जिम्मा सिंचाई विभाग को सौंपा गया था। विभागीय सूत्रों की माने तो सत्ता में आने के साथ ही अखिलेश यादव ने वरुणा कॉरिडोर के निर्माण की रूपरेखा तैयार करा ली थी लेकिन उसे सिंचाई विभाग कोई न कोई पेच फंसाकर ड्रीम प्रोजेक्ट को लटकाता रहा। 

पानी जब सिर से ऊपर चला गया और मुख्यमंत्री ने क्लास लेनी शुरू की लेकिन   शिवपाल यादव का सिर पर हाथ होने व चाचा-भतीजे के बीच अनबन की जानकारी के चलते विभागीय अफसर फाइलों को इधर-उधर करने में ही जुटे रहे। इस बीच अचानक से आननफानन में तीन माह पूर्व वरुणा कॉरिडोर का काम शुरू किया गया। ऐसा समय चुना गया कि प्रोजेक्ट के शुरू होते ही मानसून आ गया और काम एक बार फिर ठप कर पड़ गया। 

सूत्रों के अनुसार यह सारा खेल शिवपाल समर्थकों ने इसलिए रचा ताकि जनता के बीच संदेश जाए कि अखिलेश यादव ने बारिश के मौसम में ही काम क्यों शुरू कराया। जनता का पैसा डूबाने के लिए ही वरुणा कॉरिडोर का काम ऐसे समय शुरू हुआ है। विभागीय अधिकारियों पर भरोसा करके अखिलेश तो अपने ड्रीम प्रोजेक्ट की प्रगति देखने नहीं आए लेकिन शिवपाल जरूर आए और आने के साथ ही बनारस में ऐसा मंत्र फूंका कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी वरुणा कॉरिडोर का काम ठप पड़ा हुआ है। अब वह तेजी भी नहीं दिख रही जो प्रोजेक्ट के शुरूआती दिनों में थी। 


वरुणा कॉरिडोर प्रोजेक्ट की शुरूआत होते ही अखिलेश का ग्राफ वाराणसी में तेजी से चढऩे लगा था कि तत्कालीन मुख्य सचिव दीपक सिंघल कार्य की समीक्षा करने आए और सिंचाई विभाग के दो अधिकारियों को संस्पेंड करने का दावा किया लापरवाही के आरोप में। विभागीय सूत्रों की माने तों दोनों अधिकारी अपना काम ठीक से कर रहे थे। उनकी तेजी शिवपाल गुट को खटक गई जिसके चलते मामला बिगड़ा। हालांकि दोनों अधिकारी लखनऊ में शरणागत हुए तब जाकर निलंबन का आदेश रोका गया। 


अखिलेश को वरुणा कॉरिडोर के नाम पर चाचा शिवपाल व उनके खासमखास मंत्री के  इस खेल के बारे में पता था लेकिन किन्हीं कारणों से वह भी खामोश रहे। सूत्र बताते हैं कि एक वरुणा कॉरिडोर का ही मामला नहीं था। दरअसल, शिवपाल के पास लोक निर्माण विभाग भी था और संयोग से शिवपाल के करीबी सुरेंद्र पटेल भी लोक निर्माण राज्यमंत्री का दायित्व संभाल रहे हैं। प्रदेश की सड़कों के टेंडर से लेकर ठेका सब कार्यों में शिवपाल गुट की ही चलती थी। सीएम सड़कों की दशा सुधारने में लगे थे लेकिन चाचा गिरोह कमीशन पर चल रहा था। कमीशन के चलते ही प्रदेश की सड़कें गुणवत्ता के विपरीत बनी।  
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