UP में औवैसी को रोकने के लिए शिवसेना ने चली यह चाल, पढि़ए ये खबर

UP में औवैसी को रोकने के लिए शिवसेना ने चली यह चाल, पढि़ए ये खबर
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उत्तर प्रदेश के चुनावी रणक्षेत्र में उतरेगी महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना

विकास बागी

वाराणसी. उत्तर प्रदेश में मिशन 2017 की लड़ाई के लिए राजनीतिक दल सियासी दांव-पेंच लगा रहे हैं। भाजपा-बसपा समेत कांग्रेस-सपा जाति की राजनीति का खेल खेल रहे हैं। सभी प्रमुख पार्टियों की नजर दलित वोट बैंक पर है। एआईएमआईएम के मुखिया ओवैसी ने भी मुस्लिम कार्ड खेलते हुए यूपी के चुनावी संग्राम में कूदने की तैयारी कर ली है। ओवैसी की पार्टी यूपी में मुस्लिम वोट बैंक पर निशाना लगा रही है। मिशन 2017 फतह करने की खातिर भाजपा ने हिंदूत्व के मुद्दे से किनारा कस लिया है। ऐसे में शिवसेना ने उत्तर प्रदेश में दहाड़ लगाने की तैयारी कर ली है। हिंदू कार्ड के बूते शिवसेना उत्तर प्रदेश में ओवैसी को टक्कर देेने के लिए चुनावी समर में कूदने की तैयारी कर रही है। महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना उत्तर प्रदेश में उसके खिलाफ खड़ी होगी।

दो सौ से अधिक सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार
कानपुर में रविवार को शिवसेना की बैठक हुई। बैठक में प्रदेश के सभी शिवसेना के प्रमुख पदाधिकारियों को बुलाया गया था। शिवसेना सांसद व प्रवक्ता संजय राउत की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय हुआ कि शिवसेना उत्तर प्रदेश में शिवसेना प्रमुखता से अपनी दावेदारी पेश करेगी। बैठक में यह बात सामने आई कि राम मंदिर निर्माण को लेकर भाजपा की वादाखिलाफी ने हिंदुओं को ठेस पहुंचाई है। इतना ही नहीं भाजपा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए हिंदू धर्म के बजाय जातिगत राजनीति पर उतर आई है जिससे हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है। बीजेपी की इस रणनीति के चलते आईएआइएएम मुखिया ओवैसी के लिए यूपी में मुस्लिम कार्ड खेलने के दरवाजे खुल गए है। ओवैसी को रोकने के लिए बीजेपी में दम नहीं है। यूपी को आने वाली अराजकता से बचाने के लिए शिवसेना को मजबूती के साथ चुनाव लडऩा होगा। बैठक में तय हुआ कि शिवसेना उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में 200 से अधिक सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी। 

ओवैसी की तरह ही चलेगी चाल
भारत माता की जय बोलने से इंकार करने वाले ओवैसी की पार्टी उन सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने की तैयारी में है जहां पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है। कुछ ऐसी ही रणनीति शिवसेना की भी है। शिवसेना उन सीटों पर अपने बांकुरे उतारने की तैयारी कर रही है जहां हिंदुओं की संख्या और हिंदू विचारधारा को मानने वाले अधिक हैं। 

बिहार ने बढ़ाया हौसला
महाराष्ट्र शिवसेना के जोनल कोआर्डिनेटर विनय शुक्ला ने पत्रिका को बताया कि बिहार , जहां शिवसेना को लेकर लोगों के मन में नकारात्मक छवि बनाई गई है, वहां के चुनाव में शिवसेना को ढाई लाख से अधिक मत मिले। बिहार के मतदाताओं द्वारा शिवसेना पर जताया गए विश्वास ने यूपी के चुनाव में उतरने के लिए संजीवनी का काम किया है। यूपी में हिंदूत्व विचारधारा को मानने वाले अधिक हैं। यूं कहिए कि हिंदुओं की आस्था का केंद्र अयोध्या, मथुरा, और काशी यूपी में है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में घोर हिंदूत्ववादी  शिवसेना से लोगों को उम्मीदें हैं। 

उत्तर प्रदेश के चुनावी रणक्षेत्र में उतरेगी महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना
 शिवसेना के पदाधिकारियों की माने तो उत्तर प्रदेश के चुनावी रणक्षेत्र में बाला साहेब ठाकरे के परिवार की युवा पीढ़ी कमान संभालेगी। सूत्रों के अनुसार आदित्य ठाकरे उत्तर प्रदेश में शिवसेना का चेहरा होंगे। मकसद सिर्फ और सिर्फ ओवैसी को रोकना है। 
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