तिरंगा के नाम पर शिवसेना का सालाना नाटक

तिरंगा के नाम पर शिवसेना का सालाना नाटक
shiv sainik

सिर्फ विवाद के लिए माधव राव धरहरा पर आते हैं तिरंगा फहराने

वाराणसी. काशी में कुछ ऐसे लोगों के हाथों में शिवसेना की कमान आ गई है जो सिर्फ  साल में दो बार शहर में निकलते हैं और वह भी पूर्व नियोजित नाटकीय तरीके से। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पुरातात्विक माधव राव धरहरा और श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन के दौरान।
सोमवार को एक बार शिवसैनिकों का सालाना नाटक झंडा फहराने का हुआ। शिवसेना से निष्कासित अरुण पाठक समेत अन्य शिवसैनिक हाथों में तिरंगा और भगवा झंडा लेकर पचगंगा घाट की ओर बढ़े। पहले से मुस्तैद बनारस पुलिस ने सभी को मैदागिन चौराहे के समीप रोक दिया। हर बार की तरह हल्की-फुल्की नोकझोंक के बाद सभी कार्यकर्ता रस्म अदायगी के नाम पर गिरफ्तार किए गए और बाद में निजी मुचलके पर छोड़ दिए गए। 

शिवसेना के एक पूर्व नेता ने शिवसैनिकों के प्रतिवर्ष होने वालेे ड्रामे पर सवाल खड़े किए और कहा कि पूरे बनारस में कई स्थान ऐसे हैं जहां तिरंगा नहीं फहर पाता, ये कभी वहां क्यों नहीं जाते। काशी में तमाम छोटे-बड़े मंदिर जीर्ण-शीर्ण हो चुके हैं लेकिन इन शिवसैनिकों का कभी उधर ध्यान नहीं जाता। ये सालाना ड्रामा सिर्फ और सिर्फ सस्ती लोकप्रियता और मीडिया में जगह पाने के लिए किया जाता है। 

उधर वाराणसी पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि शिवसैनिक जहां झंडा फहराना चाहते थे वह पुरातत्व विभाग के अधीन हैं। इन लोगों को उक्त स्थान पर तिरंगा फहराने के लिए उनसे अनुमति लेनी चाहिए। उक्त स्थान को लेकर विवाद भी है और इतनी भीड़ यदि वहां पहुंचती तो अनहोनी का अंदेशा था इसलिए शिवसैनिकों को गिरफ्तार करने के बाद निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया। 
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