SP व BSP में गठबंधन हुआ नहीं और नेता बांटने लगे सीट

SP व BSP में गठबंधन हुआ नहीं और नेता बांटने लगे सीट
SP and BSP

संसदीय चुनाव 2019 के लिए आसान नहीं है दावेदारी, जानिए क्या है कहानी



वाराणसी. संसदीय चुनाव 2019 को लेकर सपा व बसपा में गठबंधन नहीं हुआ है, लेकिन स्थानीय नेता अपने स्तर से ही सीट बांटने में जुट गये हैं। महागठबंधन में कौन-कौन दल शामिल होते हैं यह तो समय ही बतायेगा। इतना तो साफ है कि  पूर्व सांसद व बड़े नेताओं ने अपनी दावेदारी पुख्ता करने के लिए नया दंाव खेल दिया है।

पीएम नरेन्द्र मोदी का जादू चलने से पहले पूर्वांचल की राजनीति पर सपा व बसपा का ही राज रहता  था। वर्ष 2014 संसदीय चुनाव की बात की जाये तो उस समय चली नरेन्द्र मोदी की आंधी में अच्छे से अच्छे नेता भी चुनाव हार गये थे, लेकिन आजमगढ़ की संसदीय सीट पर मुलायम सिंह यादव ने चुनाव जीत कर यह साबित किया था कि पूर्वांचल में सपा को कमजोर करना कठिन काम है।  यही हाल यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में हुआ था। पूर्वांचल के अधिकांश जिलों में बीजेपी ने सभी या फिर सबसे अधिक सीटे जीती थी लेकिन आजमगढ़ में बीजेपी अधिक सीट नहीं जीत पायी थी। अब सभी दलों की निगाहे संसदीय चुनाव 2019 पर लगी हुई है। इस चुनाव में सपा व बसपा में गठबंधन हो जाता है तो कई नेताओं के टिकट कटने तय होंगे। ऐसे में स्थानीय नेताओं ने अभी से अपने स्तर पर सीटों का बंटवारा करना शुरू कर दिया है।

दावेदारी पर लगेगी मुहर, तैयार हो रही रणनीति
सपा व बसपा के सूत्रों ने बताया कि पीए मोदी की लहर को देखते हुए संसदीय चुनाव से पहले महागठबंधन बनना तय है। सपा और बसपा साथ मिल कर चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में यूपी में प्रमुख रुप से 80 सीटों का बंटवारा सपा, कांग्रेस व बसपा के बीच होना है। सूत्रों ने कहा कि हम अभी से सामंजस्य बनाने में जुटे हैं, जिससे सापा बौर बसपा के नेताओं को सीट बंटवारे में नुकसान न हो। यदि सपा व बसपा में गठबंधन नहीं होता है तो नेताओं की दिक्कत भी खत्म हो जायेगी। कुल मिला कर स्थानीय नेताओं ने अपना दांव खेलना शुरू कर दिया है। इसका कितना फायदा होता है यह तो समय ही बतायेगा।

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लालू यादव की रैली पर टिकी निगाहे
पटना में अगस्त में होने वाली लालू यादव की रैली पर सबकी निगाहे लगी है। इस रैली में पहली बार सार्वजनिक मंच पर अखिलेश यादवमायावती साथ आ सकते हैं। स्थानीय नेताओं की माने तो यही रैली महागठबंधन पर मुहर लगायेगी। महागठबंधन होने से पहले स्थानीय नेता अपने स्तर से सीट बांट लेना चाहते हैं, जिससे बाद मेें किसी प्रकार का विवाद न हो।
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