तो क्या सपा की हार का कारण बनेगी यूपी पुलिस

तो क्या सपा की हार का कारण बनेगी यूपी पुलिस
akhilesh yadav

वीकली ऑफ का लालीपॉप, डीजीपी के आदेश और एमएलसी के आरोप से बन रही कहानी

वाराणसी. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सपा की हार की कारण बनेगी उत्तर प्रदेश पुलिस। कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर अखिलेश सरकार को पुलिस ने कई बार कटघरे में खड़ा किया है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि हालात कह रहे हैं। एक तरफ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कानून-व्यवस्था के बाबत सूबे के उच्च पुलिस अधिकारियों की क्लास लगाते है तो दूसरी ओर चौबीस घंटे के भीतर ही उनके पिता मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ की जेल में बंद कुख्यात संजय सरकारी ठेके को लेकर एमएलसी को धमकी देते हुए गालीगलौज करता है। पुलिस सब जानने के बाद भी दम साधे बैठे रहती है। 

उत्तर प्रदेश में सिपाहियों से लेकर थानेदार से लगायत आला अधिकारियों के रवैया और कार्यप्रणाली से सपा सरकार भी वाकिफ है। सूबे के मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद को एक बार फिर सर्कुलर जारी करना पड़ रहा है कि सभी थानेदार व पुलिस अधिकारी अपने सीयूजी नंबर को चौबीस घंटे स्विच ऑन मोड में रखें और कॉल रिसिव करें। 

दरअसल, शासन तक इस बाबत कई शिकायतें पहुंची हैं कि थानेदार सीयूजी नंबर पर कॉल करने के बाद भी कॉल रिसिव नहीं करते हैं। कई बार पुलिस अधिकारियों के कॉल रिसिव न करने के कारण वारदात के बाद अपराधी फरार हो गए तो कई मामलों में पुलिस की देरी के कारण लोगों की जान चली गई। धमकी वाले प्रकरण में भी एमएलसी चंचल सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में पुलिस अधिकारियों द्वारा फोन न उठाने की शिकायत की गई है। 

डीजीपी जावीद अहमद ने जारी आदेश में थानेदार व संबंधित दारोगा से लेकर उन सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है जो सीयूजी नंबर का उपयोग करते हैं कि सभी मोबाइल फोन चौबीस घंटे स्विच ऑन रहेंगे। यदि किसी कारण से फोन तत्काल नहीं उठाते हैं तो समय मिलते ही संबंधित को कॉल बैक कर मामला पता करें। शिकायतकर्ता की पूरी बात सुनने के साथ ही मामले की शीघ्र पड़ताल करें जिससे पीडि़त को यह राहत मिले कि पुलिस उसके साथ है। 

पुलिस की कार्यप्रणाली के चलते ही अखिलेश यादव भी अपनी जीत को लेकर संशकित हो उठे हैं। यूपी पुलिस के रवैया को देखते हुए ही सरकार ने प्रदेश में पुलिसकर्मियों को  वीकली ऑफ का लालीपॉप थमाया है लेकिन उससे भी बात बनती नहीं दिख रही है।  प्रमोशन से लेकर पुलिस महकमे में ऐसी विसंगतिया है जिसके कारण सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर ढीले पड़ गए हैं। सूबे के कई थानों में पुलिसकर्मी सपाइयों के हाथों पिट चुके हैं। इन पांच सालों में यूपी  पुलिस ने अपने कई अधिकारियों व जवानों को गंवाया है जिसको लेकर पुलिस वालों के परिवार में काफी रोष है। सपा सरकार ने यदि चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश के पुलिसकर्मियों के सुधार के लिए कुछ खास नहीं किया तो यह तो तय है कि पुलिस महकमा भी सपा सरकार की हार का एक बड़ा कारण बनेगा। 
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