बनारस को मथुरा बनाने की तैयारी कर रहा ये सपाई

बनारस को मथुरा बनाने की तैयारी कर रहा ये सपाई
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अतिक्रमण हटाओ अभियान दस्ता के साथ झड़प के बाद अस्पताल में भर्ती सपा महानगर उपाध्यक्ष

वाराणसी. अतिक्रमण और अवैध कब्जे की जंग ने मथुरा के जवाहरबाग को रणक्षेत्र बना दिया। पुलिसकर्मी शहीद हो गए तो न जाने कितने बेकसूर मारे गए। यह तो एक बानगी भर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में तो कदम-कदत पर अतिक्रमण व अवैध कब्जा की लड़ाई है। बनारस को भी कुछ लोग अपनी राजनीतिकक रोटी सेंकने के लिए मथुरा और खुद को रामवृक्ष यादव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बनारस में अतिक्रमण हटाओ अभियान का पहला दिन ही राजनीति की भेंट चढ़ता दिख रहा है ऐसे में जिला प्रशासन की टीम राजनीतिक दबाव के बीच कैसे अतिक्रमणकारियों से निबटेगी यह यक्ष प्रश्न है क्योंकि तीन साल पहले ऐसी ही कोशिश जिले के पूर्व कप्तान अजय मिश्र और जिलाधिकारी प्रांजल यादव ने की थी लेकिन अजय मिश्र का राजनीतिक दबाव के चलते बनारस से तबादला कर दिया गया। 
बनारस की बिगड़ी तस्वीर सुधारने के लिए शासन ने डीएम विजय किरन आनंद पर भरोसा करते हुए उन्हें कुछ दिनों पहले भेजा। डीएम ने ताबड़तोड़ बैटिंग भी शुरू कर दी। शहर को अतिक्रमण व अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन की टीम सोमवार को मय फोर्स सबसे पहले सिगरा पहुंची और वहां सड़क पर मौजूद चंदुआ सब्जी सट्टी को हटवाया। अतिक्रमण हटाओ अभियान दस्ता की एक टीम ने मैदागिन क्षेत्र में अभियान चलाया। इस दौरान वहां सपा के महानगर उपाध्यक्ष राजेंद्र त्रिवेदी के अवैध कब्जों व एक होटल पर हथौड़ा बरसा तो राजेंद्र त्रिवेदी बिफर पड़े। आरोप है कि वहां मौजूद समर्थकों को उकसाने के साथ ही सरकारी कर्मचारियों से उलझ पड़े। पुलिस ने किसी तरह हटाया-बढ़ाया। थोड़ी देर बाद अचानक सूचना मिली कि राजेंद्र त्रिवेदी मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में भर्ती हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर राजेंद्र त्रिवेदी ने मारपीट करने का आरोप लगाया। गौरतलब है कि नब्बे के दशक में पूर्व डिप्टी मेयर अनिल राय के भाई सुनील राय पर नरिया इलाके में गोलियां बरसी थी। कई लोग मारे गए, उस समय मौके पर मौजूद राजेंद्र त्रिवेदी को भी गोलियां लगी थी लेकिन वह बच गए थे। पेशे से अधिवक्ता राजेंद्र त्रिवेदी उर्फ राजू त्रिवेदी पर टाउन हाल समेत अन्य स्थानों पर कब्जे के आरोप लगते रहे हैं। अतिक्रमण हटाओ अभियान की टीम के साथ झड़प के बाद राजेंद्र त्रिवेदी ने सपा के कई पदाधिकारियों को भी फोन किया था लेकिन मौके की नजाकत, पूर्व के आरोप व डीएम के कड़े तेवर को देखते हुए सपा के बड़े पदाधिकारियों ने मामले से खुद को अलग रखने में ही भलाई समझी। 
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