scriptStudents wrote letters within blood to President, Vice President, Prime Minister and Chief Minister against Roza Iftar in BHU | रोज़ा इफ्तार मामलाः बीएचयू के छात्रों ने कुलपति आवास के सामने बैठकर खून से लिखा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र | Patrika News

रोज़ा इफ्तार मामलाः बीएचयू के छात्रों ने कुलपति आवास के सामने बैठकर खून से लिखा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के महिला महाविद्यालय में आयोजित रोज़ा इफ्तार पार्टी को लेकर छात्र गुटों का विरोध प्रदर्शन जारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन की सफाई भी इन छात्रों के विरोध पर कोई असर नहीं डाल रही। इनका धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है। शनिवार को भी ये कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठे हैं।

वाराणसी

Published: May 07, 2022 02:18:22 pm

वाराणसी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में रोज़ा इफ्तार का विरोध का क्रम शनिवार को भी जारी है। छात्रों का एक गुट कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठा है। ये छात्र विश्वविद्यालय में हुए रोज़ा इफ्तार पार्टी और उसमें कुलपति के शामिल होने का विरोध कर रहे हैं। इन्होंने अब राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को खून से लिखा पत्र भेजा है।
कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठे छात्र
कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठे छात्र
बीएचयू के छात्रों ने कुलपति आवास के सामने बैठकर खून से लिखा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र गंगा जल के छिड़काव और मुंडन से लगायत पुतला तक जला चुके हैं छात्र
बता दें कि पिछले महीने महिला महाविद्यालय में रोज़ा इफ्तार पार्टी आयोजित की गई थी। उसमें कुलपति प्रो सुधीर जैन भी शामिल हुए थे। इसकी जानकारी होते ही छात्रों का एक गुट विरोध में खड़ा हो गया। शुरू हो गया धरना-प्रदर्शन का सिलसिला। यहां तक इस छात्र गुट ने कुलपति आवास के सामने गंगा जल का छिड़काव किया। मुंडन कराया। कुलपति का प्रतीकात्मक पुतला जलाया। कुलपति से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की मांग तक की।
विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क, परंपरागत तरीक से मनाई गई इफ्तार पार्टी
इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन अपने अधिकृत ट्विटर हैंडल पर इस संबंध में सफाई भी दे चुका है। प्रशासन का कहना है कि ये कोई नई परंपरा नहीं बल्कि पहले से ही ऐसा होता आया है। विश्वविद्यालय में हर धर्म को मान्यता है और उसके अनुरूप समय-समय पर कार्यक्रम होते रहते हैं। केवल कोरोना काल में दो साल के लिए इस तरह के कोई आयोजन नहीं हुए थे।

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