वो ससुराल दहेज़ नहीं किताबें लेकर आई थी फिर दोनों आईएएस हो गए 

वो ससुराल दहेज़ नहीं किताबें लेकर आई थी फिर दोनों आईएएस हो गए 
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Awesh Tiwary | Updated: 02 Jun 2017, 03:24:00 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

वो ससुराल दहेज़ नहीं किताबें लेकर आई थी फिर दोनों आईएएस हो गए 

आवेश तिवारी 
वाराणसी।  पूर्वी उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में तैनात एडिशनल एसपी डॉ बीपी अशोक और पुलिस विभाग की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं है।   खुश हो भी क्यों नहीं जो डॉ अशोक की बेटी और दामाद दोनों ही सिविल सेव परीक्षा में एक साथ चयनित  हुए हैं ।  इस युगल जोड़े की सफलता की कहानी  में  एक बेहद खूबसूरत और अनोखी सी प्रेम कहानी भी छिपी हुई है जिसे डॉ अशोक और सिविल सेवा परीक्षा में चयनित उनके बेटी और दामाद की जुबान से हम भी सुनते हैं।   

वो ख़्वाबों के दिन वो किताबों के दिन 

डॉ अशोक बताते हैं कि पिछले साल मेरे एक रिश्तेदार ने बेटी डॉ अवलोकिता के लिए एक लड़का बताया, लड़का भी डॉ था तो हमें पसंद आ गया।   फिर क्या था हम अपने दामाद डॉ योगेश सागर के पिता से मिले और फिर पिछले साल अप्रैल में ही शादी कर दी।   दिलचस्प यह था कि दुल्हनें दहेज़ लेकर आती है लेकिन अवलोकिता अपने कोर्स की किताब लेकर ससुराल आई ।  आगे की कहानी डॉ योगेश बताते हैं ।  वो कहते हैं "शादी के बाद जहाँ आम जोड़े गृहस्थी में व्यस्त हो जाते  हैं हम दोनों ने पढ़ाई शुरू कर दी ।  मेरा विषय मेडिकल साइंस था और अवलोकिता का मानवशास्त्र लेकिन जनरल स्टडीज के पेपर दोनों में ही कामन थे।   फिर रात रात भर हमने एक साथ पढ़ाई शुरू की ।  गर बात करने को हम दोनों के बीच कुछ होता था तो वो केवल प्रश्नपत्र में आने वाले संभावित सवाल और उनके जवाब ।  अक्सर ऐसा भी होता था जब हम वैकल्पिक विषयों की पढ़ाई करते थे तो अलग अलग कमरों में होते थे ।"

  जब दोनों ने दी एक दूसरे को बधाई 
योगेश से हम पूछते हैं कि क्या आप दोनों ने एक दूसरे को बधाई दी? तो वो थोडा सा सकुचाते हुए कहते हैं ' हाँ दे दी' ।  वो कहते हैं "मुझे लगता है हम दोनों ने एक दूसरे को विवाह का उपहार दिया है।   "डा. योगेश सागर ने दूसरे प्रयास में शानदार प्रदर्शन कर 223वीं रैंक हासिल की, वहीं उनकी पत्नी डा. अवलोकिता ने पहले प्रयास में 915 वी रैंक हासिल कर परिवार की खुशी को दोगुना कर दिया है। लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज दिल्ली से पढ़ी अवलोकिता कहती है "इन्होने ज्यादा पढ़ा था मैंने कम ,इसलिए इनकी रैंक भी अधिक है। ' गौरतलब है कि अवलोकिता का माँ मंजू अशोक भी वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी है ।  

सफलता ही नहीं मिली, जवाबदेही भी बढ़ी 
अवलोकिता से जब हम पूछते हैं कि कितना कुछ बदल जाएगा अब ? तो वो जवाब देती हैं 'अब समाज के प्रति जवाबदेही बढ़ जायेगी उत्तर प्रदेश में स्वास्थय और शिक्षा के क्षेत्र में बहुत कुछ किया जाना है चूँकि हम दोनों डाक्टर हैं इसलिए अन्य की तुलना में हमारी जिम्मेदारी ज्यादा है और हमें करना होगा ।  गौरतलब है कि यह दंपत्ति  यह दलित परिवार से ताल्लुक रखते हैं।   फिलहाल इनके घर में रिश्तेदारों का आना जाना लगा हुआ है ।  योगेश कहते है कि कोशिश करूँगा कुछ वक्त निकालकर अवलोकिता के साथ घूम कर आऊ ,इन्होने  हमेशा मुझे विश्वास दिलाया कि मैं बेहतर कर सकता हूँ महत्वपूर्ण है कि यह योगेश का दूसरा प्रयास था।   वही अवलोकिता कहती है योगेश मेरी प्रेरणा है,मेरा सब कुछ ।   

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