scriptSurveillance petition filed in connection with tampering of Gyanvapi campus structure dismissed | ज्ञानवापी परिसर के ढांचे में छेड़छाड़ के मामले में दर्ज निगरानी याचिका खारिज | Patrika News

ज्ञानवापी परिसर के ढांचे में छेड़छाड़ के मामले में दर्ज निगरानी याचिका खारिज

ज्ञानवापी प्रकरण में परिसर स्थित ढांचे में छेड़छाड़ करने के मामले में जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में दाखिल निगरानी याचिका खारिज हो गई है। बता दें कि इस मामले को पहले ही सीजेएम अदालत में खारिज हो चुकी है। उसके बाद वादी ने जिला जज की अदालत में अर्जी लगाई थी जिस पर 23 जून को सुनवाई पूरी हो गई थी और जज ने आदेश सुरक्षित रख लिया था। वो आदेश आज पहली जुलाई को जारी कर दिया गया.

वाराणसी

Published: July 01, 2022 03:42:13 pm

वाराणसी. ज्ञानवापी प्रकरण में परिसर में स्थित मूल ढांचे में छेड़छाड़ पर मुकदमा दर्ज करने और संबंधितों को दंडित करने संबंधी याचिका जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने खारिज कर दी है। बता दें कि जिला जज की अदालत से पहले यह याचिका स्पेशल सीजेएम की अदालत में दाखिल की गई थी मगर अदालत ने उसे खारिज कर दिया था। उसके बाद जिला जज की अदालत दाखिल याचिका पर जिला जज की अदालत ने 23 जून को सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिया था। वो आदेश शुक्रवार यानी पहली जुलाई को जारी किया गया जिसके तहत याचिका खारिज कर दी गई है।
वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय
वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय
ये थी याचिका

वादी की ओर से अधिवक्ता शिवम गौड़, अनुपम द्विवेदी और मान बहादुर सिंह ने जिला जज की अदालत में निगरानी अर्जी दाखिल की थी। दाखिल प्रार्थना पत्र के माध्यम से बताया था कि ज्ञानवापी ढांचा को हटाने के लिए मुगल बादशाहों ने तोड़ने की कोशिश की। बाद में शेष बचे हिस्से पर पेंटिंग व चूनाकली कर मंदिर की पहचान को मिटाना का प्रयास किया गया, जो उपासनास्थल अधिनियम-1991 की धारा-3 का उल्लंघन है। वादी ने ये भी कहा था कि ज्ञानवापी परिसर स्थित ढांचा (मस्जिद) की देखरेख का जिम्मा अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी करती है। ऐसे में कमेटी के पदाधिकारियों के विरुद्ध उपासनास्थल अधिनियम-1991 की धारा-3 (6) के तहत कार्रवाई की जाए।
वादी ने स्पेशल सीजेएम के आदेश को निरस्त करने को दिया था आवेदन

आवेदन में ये भी बताया गया था कि स्पेशल सीजेएम की अदालत ने प्रार्थना पत्र को गंभीरता को नहीं लिया औऱ एक ही दिन की सुनवाई के बाद 30 मई को उसे खारिज कर दिया। लिहाजा निचली अदालत के आदेश को खारिज कर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया जाए।
जिला जज ने जारी किया 23 जून को सुरक्षित आदेश

इस प्रकरण पर जिला जज एके विश्वेश ने 23 जून को इस केस की सुनवाई के दौरान कहा था कि इसी प्रकरण के मूलवाद में सिविल वाद दाखिल है जिसकी सुनवाई चल भी रही है। इसमें इन तथ्यों से कोर्ट अवगत है। शुक्रवार को जारी आदेश में अदालत ने कहा है कि निचली अदालत ने जो आदेश दिया है वह तार्किक व विधि सम्मत है, क्योंकि वादी की ओर से अर्जी के संबंध में कोई ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे विपक्षी पर आरोप साबित हो। लिहाजा, यह अर्जी सुनने योग्य नहीं है। इसे खारिज किया जाता है।

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