scriptSwami Avimukteshwaranand performed symbol worship of Adi Vishweshwar in Gauri Kedareshwar | ज्ञानवापी जाने से रोके गए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौरी केदारेश्वर में की आदि विश्वेश्वर की प्रतीक पूजा, दावा देश के 11 लाख स्थानों पर हुई पूजा | Patrika News

ज्ञानवापी जाने से रोके गए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौरी केदारेश्वर में की आदि विश्वेश्वर की प्रतीक पूजा, दावा देश के 11 लाख स्थानों पर हुई पूजा

ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के दौरान वजूखाने में मिली शिवलिंगनुमा आकृति को ही आदि विश्वेश्विर का शिवलिंग मान उसकी नियमित पूजा की मांग करने वाले ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शुक्रवार से शुरू की प्रतीकात्मक पूजा। श्री विद्यामठ का दावा है कि पहले दिन से ही देश के 11 लाख स्थान पर आदि विश्वेश्वर की पूजा आरंभ हो गई है।

वाराणसी

Published: June 17, 2022 01:23:51 pm

वाराणसी. ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शुक्रवार को ज्ञानवापी सर्वे के दौरान मिली शिवलिंगनुमा आकृति (आदि विश्वेश्वर) की प्रतीकात्मक पूजा काशी के गौरी केदारेश्वर मंदिर में की। केदार घाट स्थित श्री गौरी केदारेश्वर मंदिर में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ श्री मठ के बटुक और साध्वियां भी मौजूद रहीं। श्री विद्यामठ का दावा है कि स्वामी श्री के आह्वान पर पूरे देश के 11 लाख स्थानों पर श्री आदि विश्वेश्वर की प्रतीकात्मक पूजा हुई।
श्री गौरी केदारेश्वर मंदिर में आदि विश्वेश्वर की प्रतीकात्मक पूजा करते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
श्री गौरी केदारेश्वर मंदिर में आदि विश्वेश्वर की प्रतीकात्मक पूजा करते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
श्री गौरी केदारेश्वर मंदिर में आदि विश्वेश्वर की प्रतीकात्मक पूजा करते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदहिंदू अपने-अपने गांव मोहल्लों मे समिति बनाकर निकटस्थ शिवलिंग को ही काशी विश्वेश्वर मान करें उनकी प्रतीक पूजा

श्री गौरी केदारेश्वर मंदिर में जलाभिषेक के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जब तक ज्ञानवापी क्षेत्र में प्रकट हुए भगवान आदि विश्वेश्वर की प्रत्यक्ष पूजा नही हो पा रही है तब तक सभी हिंदू अपने-अपने गांव मोहल्लों मे समिति बनाकर निकटस्थ शिवलिंग को ही काशी विश्वेश्वर मानकर उनकी प्रतीक पूजा करें। उन्होंने कहा कि आज हमने भगवान् आदि विश्वेश्वर के प्रतीक के रूप में गौरी केदारेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना की। हमारी यह पूजा भगवान् विश्वेश्वर को ही समर्पित हुई है क्योकि उन्हीं को उद्देश्य करके समस्त विश्व के कल्याण के लिए यह पूजा हुई है।
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श्री गौरी केदारेश्वर मंदिर में आदि विश्वेश्वर की प्रतीकात्मक पूजा करते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंददलगत राजनीति ऊपर उठ कर करें आदि विश्वेश्वर की पूजा

उन्होंने आगे कहा कि सभी दलों में हिन्दू हैं और सबके ही मन में भगवान् आदि विश्वेश्वर के पूजा की इच्छा है। भले ही वह अपने दल के कारण सामने आकर आज न कह पा रहा हों पर मन में तो भाव रहता ही है। इसलिए भगवान् के इस कार्य में दल से ऊपर उठकर एक शुद्ध सनातनी हिन्दू के रूप में सभी आगे आकर भगवान् काशी विश्वेश्वर की प्रतीक पूजा करें।
श्री गौरी केदारेश्वर मंदिर में आदि विश्वेश्वर की प्रतीकात्मक पूजा करते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदये रहे मौजूद

शुक्रवार को पूर्वाह्न 9 बजे से श्री गौरी केदारेश्वर मंदिर में पूजन आरम्भ हुआ। आचार्य वीरेश्वर दातार जी के आचार्यत्व में पं दीपेश दुबे जी एवं पं विपिन पाण्डेय जी ने विधि-विधान से गौरी केदारेश्वर मंदिर में जलाभिषेक संपन्न कराया। पूजन में मुख्य रूप से पप्पू पंडा, अभिषेक पंडा, आशु महाराज तथा मोहल्ले के अनेक प्रमुख भक्त लोग उपस्थित रहे।
श्री गौरी केदारेश्वर मंदिर में आदि विश्वेश्वर की प्रतीकात्मक पूजा करते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदश्री विद्यामठ का दावा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया है कि शुक्रवार से पूरे देशभर में आदि विश्वेश्वर की प्रतीकात्मक पूजा की शुरुआत की गई है। योजना के तहत देश के 7 लाख गांव और 4 लाख शहरी मुहल्लों को मिलाकर कुल 11 लाख स्थानों पर भगवान विश्वेश्वर की प्रतीकात्मक पूजा आयोजित करने का लक्ष्य है।
हर गांव में एक से अधिक स्थान पर पूजा का संकल्प
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि हर गांव में कम से कम एक अधिक स्थान पर आदि विश्वेश्वर की प्रतीकात्मक पूजा का संकल्प है। पूजा की शुरूआत आज से हो गई है। अब सभी प्रदेशों और जिलों के लिए कमेटी बनेगी जो गांव-गांव जाकर पूजा संपादित करवाएगी। अगले छह महीनों में इसको और विस्तार दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाबजूद भी हमें हठपूर्वक मठ में रोका गया

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा की यह हमें इसलिए करना पड़ रहा है की सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाबजूद भी हमें हठपूर्वक मठ में रोक दिया गया. जबकि यह दायित्व जिलाधिकारी का था की वह सनानतधर्मियों से भी वार्ता करें और शिवलिंग (आदि विशेश्वर) की पूजा करवाए. हम अपनी काशी में ही अपने आराध्य की पूजा करने से वंचित है.

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