क्या करेंगे अब केशव, स्वामी के आभामंडल से पार पाना बड़ी चुनौती

क्या करेंगे अब केशव, स्वामी के आभामंडल से पार पाना बड़ी चुनौती
swami prasad maurya and keshav maurya

स्वामी के बीजेपी में आने से घटेगा केशव का कद, जानिए क्यों चल रही बीजेपी के अंदरखाने में यह हवा

वाराणसी. बसपा का त्याग करने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य पर कई राजनीतिक दल भंवरे की तरह मंडरा रहे थे। पिछड़ों के वोट बैंक के लिए हर राजनीतिक दल स्वार्मी प्रसाद मौर्य को आस भरी निगाह से देख रहा था लेकिन सोमवार का तीसरा सोमवार बीजेपी के लिए राहत भरा दिन साबित हुआ क्योंकि स्वामी प्रसाद मौर्य अपने समर्थकों के साथ  अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण किए। सूत्रों की माने तो स्वामी को बीजेपी उत्तर प्रदेश में बड़ा ओहदे से नवाजने की तैयारी में भी है। 


पिछड़े वोट बैंक के सहारे सत्ता का सुख भोगने की तैयारी कर रही बीजेपी स्वामी प्रसाद मौर्य को अपने पाले में खींच तो लाई लेकिन इसी के साथ सवाल खड़े होने शुरू हो गए कि अब उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य क्या करेंगे। बीजेपी में स्वामी की एंट्री से केशव मौर्य के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। केशव प्रसाद मौर्य के लिए उत्तर प्रदेश में अब स्वामी प्रसाद मौर्य के आभामंडल से पार पाते हुए खुद को साबित करना बड़ी चुनौती साबित होगी। 


पार्टी के अंदरखाने में चल रही चर्चाओं की माने तो केशव मौर्य नहीं चाहते थे कि स्वामी प्रसाद मौर्य की एंट्री पार्टी में हो इसलिए वह स्वामी के लिए पुरजोर कोशिश नहीं कर रहे थे लेकिन पार्टी का एक धड़ा जो ओम माथुर के साथ खड़ा था, स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी में लाने की कोशिश में जुटा था और वे सफल भी हुए। 


इलाहाबाद के फूलपुर से सांसद केशव प्रसाद मौर्य को बीजेपी ने जब बीते अप्रैल माह में उत्तर प्रदेश में अपना चेहरा बनााया तब भी तमाम सवाल उठे थे लेकिन बीजेपी की अपनी रणनीति थी। सपा और बसपा से पिछड़ा वोट बैंक अपनी ओर खींचने के लिए केशव मौर्य को प्रदेश का अध्यक्ष बनाया गया था। संघ के करीबी और चाय-अखबार बेचकर करोड़ों की कंपनी के मालिक बने केशव मौर्य को लेकर बीजेपी आश्वस्त थी  लेकिन मन में कहीं न कहीं संदेह था कि क्या केशव अपने बूते पिछड़ों को बीजेपी में लाने में सफल हो सकेंगे। 


बीजेपी के आम कार्यकर्ताओं से लेकर वरिष्ठ नेताओं तक को इसमें संदेह नहीं था कि केशव प्रसाद मौर्य अच्छे वक्ता हैं लेकिन जनाधार के मामले में थोड़ा कमजोर। क्रिकेटर मो. कैफ को भी वह मोदी लहर में ही हरा पाए। इसके विपरीत स्वामी प्रसाद मौर्य का अपनी जाति के साथ ही प्रदेश के अन्य समुदायों में भी खासी पकड़ है। मायावती के शासनकाल में स्वार्मी प्रसाद मौर्य का जलवा लोग देख चुके हैं। केशव को पार्टी ने सिर्फ पिछड़ा वोट रिझाने के लिए बनाया था लेकिन अब बीजेपी के पास केशव से बड़ा चेहरा स्वामी प्रसाद मौर्य के रूप में आ चुका है। सूत्रों की माने तो 


भाजपा को यह तनिक भी भान नहीं था कि बसपा में इतनी बड़ी बगावत होगी और पार्टी के दिग्गज नेता भी मायावती का साथ छोडऩे में संकोच नहीं करेंगे। बीजेपी की उम्मीदों के विपरीत बसपा में बड़ी बगावत हो गई। बसपा में बगावत से पहले हुए सर्वे में पार्टी प्रदेश में तेजी से उभर रही थी जो बीजेपी के साथ ही सपा के लिए भी चिंता का विषय बना था। केशव प्रभाव नहीं छोड़ पा रहे थे ऊपर से उन्होंने जो नई टीम बनाई उसने भी पार्टी को बैकफुट पर ला दिया था। गौरतलब है कि केशव मौर्य ने अपनी टीम में दयाशंकर सिंह को उपाध्यक्ष बनाया था। उपाध्यक्ष बनते ही दयाशंकर सिंह ने बसपा सुप्रीमो पर टिकट वितरण को लेकर अशोभनीय टिप्पणी कर दी थी। 
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