Teachers Day: नवसाधना कला केंद्र के युवा कलाकारों ने नृत्य संगीत से डॉ. राधाकृष्णन को दी श्रद्धांजलि

Teachers Day: विद्वानों ने कहा डॉ. राधाकृष्णन ने संघर्षों को देखा और उससे एक नया जीवन विकसित किया
बोले, जीवन का आधार आध्यात्मिक होना चाहिए'
-'मदर तेरेसा का जीवन ही उनका संदेश'

By: Ajay Chaturvedi

Published: 05 Sep 2019, 07:19 PM IST

वाराणसी. Teachers Day पर नवसाधना कला केंद्र में बही सुर संगीत की रसधार। युवा कलाकारों ने नृत्य व संगीत से दी प्रथम राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि। इस मौके पर संगीत की हर विधा की आकर्षक प्रस्तुति दी युवा कलाकारों ने। अपनी स्वरांजलि से इन कलाकारों ने सभी को सम्मोहित किया।

शिक्षक दिवस पर नवसाधना कला केंद्र के युवा कलाकारों ने कुछ ऐसी दी डॉ राधा कृष्णन को श्रद्धांजलि
IMAGE CREDIT: पत्रिका

शिक्षक दिवस का शुभारंभ गायन के कलासाधक मोहित, मनीष, अभिषेक ,विनोद, विकास व प्रज्ज्वल के मधुर गायन से हुआ। हारमोनियम पर अभिषेक ने और तबले पर गुरु राकेश ने संगत किया। गीत के बोल थे, जो ज्ञान दान दे जाता है जग में अमर कहलाता है...।

भरतनाट्यम के कला साधकों ने भरतनाट्यम की विधा श्लोका के माध्यम से गुरु वंदना की। इसके तुरंत बाद भरतनाट्यम के वाद्य अंगों से सजे गीत जयति मुग्ध वीणा के द्वारा अपने पद संचालन और मुद्रा व अभिनय के द्वारा नृत्य-सरिता प्रस्तुत कर ढेरों तालियां बटोरीं।

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गुरु ए. रॉबिन के निर्देशन में भरतनाट्यम के कला साधकों ने कीर्तनम् नृत्य तमिल गाने के बोलों पर प्रस्तुत किया।

इसके बाद नेहा केसरी के निर्देशन में महालक्ष्मी की आराधना को समर्पित महाराष्ट्र का प्रचलित लोकनृत्य पोतराज प्रस्तुत किया। इसमें भक्त महालक्ष्मी की आराधना करते हैं, कमल के फूलों की माला पहनते हैं और उसी का घुंघरू बांधते हैं। स्त्री वेशभूषा में पति नृत्य करता है तो पत्नी ढोलक बजाती है। कलासाथकों के इस नृत्य ने अलग ही रंग प्रस्तुत किया। जोरदार तालियों से सभी ने सराहा। भरतनाट्यम के कलासाथक सुमिता और अरुण ने हरि तुम हरो जन की पीर... गीत के माध्यम से श्री कृष्ण की कथा को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। इस नृत्य ने ढेरों आशीर्वाद पाएं।

राग यमन कल्याण छोटा ख्याल लेकर दीपक, प्रकाश व ऋत्विक मंच पर जब आए तो सुरों की गंगा से सराबोर कर दिया। तबले पर गुरु राकेश ने संगत किया। इसी के साथ भजन मेरी चुनरी में पड़ गयो दाग री कैसो चटक रंग डारो... प्रस्तुत कर सभी को आनंदित कर दिया।

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इस मौके पर नवसाधना कला केंद्र के प्राचार्य डॉ. फादर विल्फ्रेड मोरस ने कहा, हमारे में सकारात्मकता का सागर होना चाहिए। एक अचल श्रद्धा जो हमारे जीवन की कसौटी पर खरा उतरे। मनुष्य जो भी अपने जीवन में करता है वही उसे कर्म फल के रूप में वापस मिलता है। भारतरत्न डॉ. राधाकृष्णन का जन्म ऐसे समय में हुआ जब उन्होंने संघर्षों को देखा और उससे उन्होंने एक नया जीवन विकसित किया।

शिक्षक दिवस पर नवसाधना कला केंद्र के युवा कलाकारों ने कुछ ऐसी दी डॉ राधा कृष्णन को श्रद्धांजलि

उन्होंने कहा कि आज ही के दिन भारत रत्न संत मदर टेरेसा का भी अवसान दिवस है, हम उन्हें भी श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। उनका जीवन ही उनका संदेश है उस संदेश को अपनाकर हमें मानव सेवा के लिए आगे बढ़ना चाहिए। नवसाधना कला केंद्र के असिस्टेंट प्रोफेसर कामिनी मोहन पांडेय ने कहा कि जो भी अज्ञान है वह सिर्फ इसलिए है क्योंकि व्यक्ति में श्रद्धा और विश्वास की कमी है। हमें अपने जीवन को आध्यात्मिक आधार प्रदान करना चाहिए। जैसे-जैसे हमारे अंदर श्रद्धा और विश्वास मजबूत होता है। हमारा संशय मिट जाता है। उन्होंने भारत रत्न डॉ राधाकृष्णन और मदर तेरेसा के संदेशों को वर्णित किया। इससे पूर्व कलासाधक अनुराग ने डॉ. राधाकृष्णन के जीवन वृत्त पर प्रकाश डाला।

शिक्षक दिवस पर नवसाधना कला केंद्र के युवा कलाकारों ने कुछ ऐसी दी डॉ राधा कृष्णन को श्रद्धांजलि

इस मौके पर डॉ. फादर विल्फ्रेड मोरस, सि. रोजली, सि. संगीता, सि. हेमलता, सि. अगाथा, फादर सुनील मथाइस, डॉ. रामसुधार सिंह, डॉ. भुवनेश्वर प्रसाद तिवारी, गोविंद वर्मा, नेहा केसरी, रोस्मा रुबा, ए. रॉबिन, राकेश एडविन, कामिनी मोहन, अनंग गुप्ता समेत सभी कलासाधक उपस्थित रहे। मंच संचालन अर्चना ने किया।

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