सफाई चौकी के सामने नगर निगम पार्क में मंदिर का निर्माण, अफसर बेखबर

Ajay Chaturvedi

Updated: 24 Jan 2018, 06:03:45 PM (IST)

Varanasi, Uttar Pradesh, India

वाराणसी. एक तरफ जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस मिल कर पूरे शहर से अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चला रहा है। इस दौरान कई कच्चे-पक्के निर्माण गिराए भी गए। कई धार्मिक स्थलों पर भी जेसीबी मशीन चली। लेकिन इसी बीच शिवपुर, गिलट बाजार सफाई चौकी के ठीक सामने नगर निगम के पार्क में मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है। यह निर्माण पिछले दो दिनों से हो रहा है। मंदिर का लिंटर तक पड़ गया है लेकिन जिला और नगर निगम प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं है। यहां तक कि पार्क के ठीक सामने सफाई चौकी का दफ्तर है। वहां सफाईकर्मचारियों से लेकर सफाई इंस्पेक्टर तक रोजाना रहते हैं। लेकिन उन्हें भी यह मंदिर निर्माण नहीं दिख रहा है। यह सब तब हो रहा है जब सर्वोच्च न्यायालय 2009 में ही यह निर्देश दे चुका है कि किसी भी सार्वजनिक स्थल पर धार्मिक या किसी तरह का निर्माण नहीं हो सकता। इतना ही नहीं जिला, नगर निगम और पुलिस की लापरवही की इंतेहां तब है जब अभी हाल ही में दालमंडी में एक विशालकाय अवैध तहखाना मिला जिसे लेकर रोजाना हंगामा मचा हुआ है।

नगर निगम पार्क में मंदिर निर्माण

बता दें कि सरकारी जमीनों पर कब्जा करने का आसान तरीका है मंदिर निर्माण। एक बार मंदिर बन गया तो आस्था के सवाल पर पुलिस व प्रशासन भी पशोपेश में पड़ जाता है। उधर मंदिर की आड़ में तमाम दुकानें खुल जाती हैं और शुरू हो जाता है अवैध कारोबार। चाहे सड़क हो या पार्क इसी तरह से अतिक्रमण की भेंट चढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में नगर निगम के पार्क में इस मंदिर का निर्माण शुरू हुआ है। ऐसा नहीं कि इस पार्क में मंदिर निर्माण का यह पहला मौका है। इससे पहले भी पार्क में हनुमान मंदिर का निर्माण हो चुका है। 2013 में इस पार्क में एक अवैध हनुमान मंदिर निर्माण करा दिया गया,जिसे अवैध करार देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अनिल मौर्या ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दाखिल की थी। उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद अभी तक वह मंदिर अब तक कायम है। अब उसी पार्क में दूसरे मंदिर का निर्माण शुरू हो गया। इस संबंध में जब मौर्य ने स्वास्थ्य निरीक्षक संतोष सिंह प्रभारी पुरानी चुंगी स्थित सफाई चौकी को दी तो उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी। उनका जवाब था कि देखते हैं। इस पर मौर्य ने चेतावनी दी कि अगर इस मामले में संबंधित के विरुद्ध एफआईआर दर्ज नही हुई और तत्काल मंदिर निर्माण न रुका तो वह उच्च न्यायालय में पुनः याचिका दायर करेंगे। उधर स्थानीय लोगो ने बताया कि जमीन सरकारी है। भगवान की मर्जी थी, इसलिए किसी ने मूर्ति लगा दी। करीब 300 गज जमीन पर दो मंदिर, बनाकर पक्का निर्माण शुरू कर दिया है। उनके पास जमीन का पट्टा या कोई आवंटन एवम् अनुमति पत्र नहीं है। सामाजिक संगठन जनाधिकार मंच के अध्यक्ष अनिल मौर्या ने जनसुनवाई पोर्टल सहित जिलाधिकारी और कमिश्नर के सीयूजी नंबर पर शिकायत दर्ज करवा कर इस मामले में ठोस कार्रवाई की मांग की।

नगर निगम पार्क में मंदिर निर्माण

सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि किसी भी सार्वजनिक स्थान और मार्ग पर मंदिरों का निर्माण नहीं हो सकता। ऐसा करने वाले कोर्ट के आदेश का उल्लघंन कर रहे हैं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इस तरह कब्जा किए जाने की शिकायत आम लोगों को नगर निगम, जिला प्रशासन या पुलिस को करना चाहिए ताकि समय रहते उस पर कार्रवाई हो सके। कुछ ही समय पहले प्रशासन ने कई मार्गों के बाधक मंदिरों को हटाया है और आने वाले समय में भी हम इस तरह की कार्रवाई के लिए तैयार हैं।

अभी दिखवाता हूं, होगी कार्रवाईः नगर आयुक्त

इस संबंध में जब पत्रिका ने नगर आयुक्त डॉ नितिन बंसल से संपर्क किया तो उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं थी। पत्रिका द्वारा जानकारी देने पर उन्होंने कहा कि अभी दिखवाता हूं। कार्रवाई अवश्य होगी।

नगर निगम पार्क में मंदिर निर्माणनगर निगम पार्क में मंदिर निर्माण
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