बोले गोविंदाचार्य, देशभक्ति और साहस किसी एक विचारधारा की बपौती नहीं

55 साल के सामाजिक-राजनैतिक जीवन पर खुल कर बोले, कहा, मानवता और प्रकृति पर बाजारीकरण का वैश्विक संकट

By: Ajay Chaturvedi

Published: 03 Mar 2019, 06:52 PM IST

वाराणसी. चिंतक गोविंदाचार्य ने कहा है कि वर्तमान विश्व में मानवता और प्रकृति बाजारीकरण के संकटों से घिर गई है। इससे उबरने के उपायों पर विचार करना वक्त का तकाजा है। साथ ही कहा कि देशभक्ति, ईमानदारी, कर्मशीलता और साहस किसी एक विचारधारा की बपौती नहीं है। गोंविंदाचार्य रविवार को अपने 55 वर्षों के सामाजिक-राजनैतिक जीवन पर आयोजित संवाद व अभिनंदन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। गोंविंदाचार्य ने खुलकर अपने अनुभव और चिंतन को साझा किया। इस अवसर पर वैदिक विद्वानों ने उनका वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उनका अभिनंदन किया।

विश्वव्यापार संगठन के पश्चात देश और दुनियां की परिस्थिति पर गोंविंदाचार्य ने कहा कि केवल भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व बाजारवाद की चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि भूमंडलीकरण और उदारीकरण की नीतियों के बाद मानवीय सभ्यता पतन के दौर से गुजर रही है। बाजारवाद के चंगुल में फंसा उपभोक्तावादी समाज प्रकृति के नृशंस दोहन में संलिप्त है। उन्होंने कहा कि यह न केवल भारत बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए बेहद खतरनाक है।

देश के वर्तमान राजनैतिक हालात पर अपने अनुभवों को साझा करते हुए गोंविंदाचार्य ने कहा कि देशभक्ति, ईमानदारी, कर्मशीलता और साहस जैसे मूल्य किसी एक विचारधारा की बपौती नहीं है। मैंने जेपी आंदोलन के समय से अनुभव किया है कि देश के प्रति सभी विचारधारा के लोगों में सहज भक्ति भाव है। किसी एक या खास विचारधारा के लोगों में ही ईमानदारी और कर्मशीलता होने का दावा नहीं किया जा सकता, वह चहुंओर व्याप्त है। उन्होने कहा कि इन मानवीय और सामाजिक मूल्यों के आधार पर ही राजनैतिक दलों का आंकलन करने की जरूरत है।

इस अवसर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वेद विभाग के प्रो. पतंजलि मिश्र के नेतृत्व में वैदिक विद्वानों ने मंत्रोच्चार के साथ उनका अभिनंदन किया। गोंविंदाचार्य ने संवाद में शामिल लोगों के सवालों का खुलकर जवाब दिया।

संवाद में प्रो. शंकर शरण, डॉ रवि सिंह यादव, सेंट्रल एवं बनारस बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष अमरनाथ शर्मा, विवेक शंकर तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार ए. के. लारी, व्यापार मंडल के अनिल केशरी, विनायशंकर राय मुन्ना, चंद्रकांत सिंह, कॉमरेड सिद्धार्थ, सुधांशु सिंह, अजयेंद्र दुबे, प्रदीप राय,बीरेंद्र यादव, डॉ संजय सिंह गौतम, इंद्रेश सिंह, संजय शुक्ल, डॉ अवधेश दीक्षित, डा आनंद कर्ण, डा आनंद पाण्डेय,हरिओम दुबे, बृजेश सिंह,नीरज सिंह, शालिनी मिश्र, सुधा सिंह, इंद्रावती यादव और अनीता सिंह सहित सैकड़ों लोग शामिल थे। संचालन रूपेश पांडेय ने किया।

Ajay Chaturvedi
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