scriptTrekking spot will be ready soon in Chandraprabha Century | चंद्रप्रभा सेंचुरी में जल्द ही वन विभाग ट्रेकिंग स्पॉट तैयार करेगा, जानिए और क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं | Patrika News

चंद्रप्रभा सेंचुरी में जल्द ही वन विभाग ट्रेकिंग स्पॉट तैयार करेगा, जानिए और क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं

चंद्रप्रभा अभ्यारण्य विजयगढ़ और नौगढ़ नाम की दो पहाड़ियों पर 9,600 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैले हैं। इस अभयारण्य में जंगली जानवरों की कई अन्य प्रजातियां देखने को मिलती हैं। यहां पर चीतल, नीलगाय, चिंकारा, ब्लैकबक्स, खरगोश, सांभर, चौसिंह, लकड़बग्घा और भारतीय चिंकारे समेत कई तरह के जानवर देखे जाते हैं।

वाराणसी

Published: May 07, 2022 09:03:54 pm

चंद्रप्रभा अभ्यारण्य में आने वाले एडवेंचर और ट्रैकिंग के शौकीनों को आने वाले दिनों में कई तरह की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। जल्द ही वन विभाग ट्रेकिंग स्पॉट तैयार करेगा। इसके अलावा, एडवेंचर का शौक रखने वालों को खूंखार जंगली जानवर, झरने, विजयगढ़ और नौगढ़ पहाड़, पेड़-पौधों के बारे में जानकारी भी उपलब्ध हो सकेगी। दरअसल बनारस और आसपास के जिलों में मौजूद जंगलों में पर्यटन को बढ़ाने के लिए जंगल में मौजूद पहाड़ों के बीच ट्रेकिंग स्पॉट को विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
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सर्वे के बाद तैयार होगा प्रस्ताव

गौरतलब है कि गुरुवार को योगी सरकार वन मंत्री ने केपी मलिक सर्किट हाउस में वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में जंगल में पर्यटन को बढ़ाने के लिए निर्देश दिए थे। वन मंत्री ने चंद्रप्रभा अभ्यारण्य में ट्रैकिंग और एडवेंचर का सर्वे करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। सर्वे के बाद इसका प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। वाराणसी जिला मुख्यालय से 68 किलोमीटर दूर चंद्रप्रभा वाइल्डलाइफ सेंचुरी को लोग चंद्रप्रभा के नाम से जानते हैं।
झरने देखने के लिए पहुंचते है पर्यटक

यहां इस सेंचुरी में पिकनिक स्थल हैं, इसके अलावा घने जंगल, राजदरी और देवदरी जैसे प्राकृतिक झरने भी बहते हैं। इन झरनों को देखने के लिए हर साल हजारों पर्यटक यहां पहुंचते हैं। अभयारण्य में जंगली जानवरों की कई अन्य प्रजातियां भी हैं।
कई तरह के दिखेंगे जानवर

यहां खरगोश, चौसिंह, नीलगाय, ब्लैकबक्स, लकड़बग्घा, चीतल, सांभर, चिंकारा और भारतीय चिंकारे समेत कई प्रकार के जानवर दिखाई देते हैं। 1958 में यहां पर तीन एशियाई शेर लाए गए थे। इसके बाद 1969 में यहां शेरों की संख्या 11 हो गई थी, लेकिन 1970 में यहां से सभी शेर लापता हो गए। इस वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना मई 1957 में हुई थी।
1958 में 3 एशियाई शेर लाए गए थे

चंद्रप्रभा वन्‍यजीव अभयारण्‍य प्रदेश के चंदौली में विंध्‍य वन रेंज में विजयगढ़ और नौगढ़ नामक दो पहाडियों पर 9,600 हेक्‍टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस सेंचुरी को मई, 1957 में स्‍थापित किया गया था और 1958 में तीन एशियाई शेरों को यहां लाया गया था। यह तीनों शेर, 1969 तक 11 हो गए थे। दुर्भाग्‍यवश, 1970 में वे सभी गायब हो गए थे।

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