सीवर का पानी पीता है स्वच्छता अभियान में अव्वल बनारस 

सीवर का पानी पीता है स्वच्छता अभियान में अव्वल बनारस 
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सीवर का पानी पीता है स्वच्छता अभियान में अव्वल बनारस 

आवेश तिवारी 
वाराणसी।  स्वच्छता अभियान में उत्तर प्रदेश में नंबर एक रहा बनारस सीवर का पानी पीता है ! जी हाँ ,बनारस के ईश्वरगंगी ,जैतपुरा,विजयनगरम इत्यादि इलाकों  में जहाँ ज्यादातर बुनकरों की रिहाइश है पिछले एक माह से पानी की सप्लाई लाइन से सीवर का गन्दा पानी आ रहा है इस पानी का इस्तेमाल पीने ,नहाने खाना बनाने में तो दूर शौच में भी करना मुश्किल है दुखद है कि इस स्थिति की जानकारी वाराणसी नगर निगम के आला अधिकारियों तक को है परन्तु स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है गौरतलब है कि स्वच्छता के मामले में बनारस सूबे का अव्वल शहर बन गया है।  देश के 434 शहरों के बीच हुए स्वच्छता सर्वेक्षण में बनारस 32वें स्थान पर आया है। c 

पीएम कार्यालय को भी है सूचना 
 जैतपुरा के अनवर बताते हैं कि घरों में आ रहे सीवर के गंदले पानी की सूचना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्थानीय कार्यालय को भी दी गई थी लेकिन कहीं कोई कारवाई नहीं हुई । इस सम्बन्ध में जब बनारस के मेयर राम गोपाल मोहले से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह बात दो दिनों पहले ही हमारे संज्ञान में आई है हम इस पर कारवाई करने जा रहे हैं हमने इस हेतु सोमवार को एक बैठक भी बुलाई है । 

रोगों से जूझ रही मुस्लिम आबादी 
राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता रैंकिंग के टॉप 40 शहरों की सूची में उत्तर प्रदेश के किसी और शहर को स्थान नहीं मिल पाया है।, लेकिन जमीनी  हकीकत चौकाने वाली है।  बनारस शहर के कई इलाकों में लोग इस भीषण गर्मी में सीवर का गन्दा पानी पीने को मजबूर हैं नतीजा संक्रामक रोगों की शक्ल में सामने आ रहा है।  शहर के कई इलाकों में इस वक्त आंत्रशोथ ,पेचिस,टायफायड और जांडिस के रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है वही अस्पतालों पर दबाव बढा है।  जिन इलाकों में यह समस्या है वहां तकरीबन डेढ़ से दो लाख की आबादी रहती है जिनमे से ज्यदातर मुस्लिम इलाके में हैं।  स्वच्छता अभियान की हकीकत यह है कि ज्यादातर सुलभ शौचालयों में रात में ताला बंद हो जाता है वहीँ कई इलाकों में महीने भर से कूड़ा जमा हुआ है । देखिये वीडियो -


रात में बंद हो जाते है सुलभ शौचालय 
बनारस की सफाई को लेकर कुछ समय पूर्व केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति की थी  । जिसके बाद शहर के सभी 90 वार्डों में कूड़ा उठाने की शुरुआत तो हुई ठोक कचरा प्रबंधन के लिए स्थापित कचरा संयंत्र को संचालित किया गया। लेकिन सीवर की खराब लाइनों को ठीक कराने के लिए अब तक कोई भी गंभीर प्रयास नहीं किया गया । महत्वपूर्ण है कि बनारस में देश की सर्वाधिक पुरानी सीवर लाइन है।शहर में यही हाल सुलभ शौचालयों का है जिनके आधार पर यह स्वच्छता अभियान की रैंकिंग बनाई गई है।  ज्यादातर सुलभ शौचालयों में रात में ताला लग जाता है जो देर सुबह खुलता है लहुराबीर स्थित शौचालय पर मौजूद कर्मी कहता है कि दिन भर सुलभ शौचालय खोला जाना संभव नहीं है  हमें रात में ताला लगाने को कहा गया है।

जनता आखिर किससे कहे 
स्वच्छता अभियान में बनारस के अव्वल आने के सवाल पर जब हम स्थानीय लोगों से बात करते हैं तो सभी कहते हैं कि स्थिति में थोडा सुधार तो हुआ है लेकिन अभी भी हालात बहुत अच्छे नहीं है । ईश्वरगंगी में चाय की दूकान चलाने वाले रमापति कहते हैं" हमारे यहाँ का हाल देखना हो तो बरसात में देखिये, हालात नरक से भी बुरे हो जाते हैं ।b वहीँ मंजू कहती हैं 'नाली की सफाई कभी भी नियम से नहीं होती ,हम गरीब तो जानते भी नहीं कि शिकायत किससे करें?' सीवर के पानी की समस्या से विजयनगरम मार्केट कैंट के लोग भी जूझ रहे हैं । लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई दिनों से सीवर सड़क पर बह रहा है। जिससे आने जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। संबंधित विभागों से कई बार शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है। इससे क्षुब्ध लोगों ने सीवर के गंदे जल में खड़े होकर प्रदर्शन किया। 

शोधित जल में भी मिल जा रहा सीवर का पानी 
शहर में पानी की कमी से ज्यादा समस्या पानी की गंदगी से है।गंगा अनुसंधान कार्यक्रम के प्रो बीडी त्रिपाठी कहते हैं असली समस्या यह है कि शोधित जल में भी सीवर का पानी मिल जा रहा है इसकी बड़ी वजह यह है कि पीने के पानी की लाइन शहर में जगह जगह पर टूटी हुई है।दिन में चूँकि इन पाइपों में पानी का दबाव रहता है इसलिए इसमें सीवर का पानी नहीं घुस पाता ,लेकिन जब शाम को दबाव कम होता है सीवर का पानी ,पीने के पानी के नलों में प्रवेश कर जाता है और लोगों को सुबह गन्दा पानी पीना पड़ता है। बनारस में वो गंगाजल जो लोगों को सप्लाई किया जा रहा है उसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि प्रति 100 एमएल जल में कोलिफोर्म बैक्टेरिया 1988 के 14,300 से बढ़कर 2014 में 24 लाख हो गया।


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