यूपी में जनता के सपनों पर सरकार का डाका

उत्तर प्रदेश में गिट्टी बालू के दाम में मनमाना बढ़ोत्तरी पर पत्रिका की पड़ताल

By: Ashish Shukla

Published: 04 Jan 2018, 07:59 PM IST

आवेश तिवारी

वाराणसी. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान गिट्टी बालू का दाम कम करने और गरीबों को सस्ते घर उपलब्ध कराने का वादा किया था ,लेकिन सरकार बनाने के 9 महीने बाद बिलकुल बदले हुए हैं। समूचे प्रदेश में गिट्टी बालू का का दाम आसमान को छू रहा है ,मजदूरों और राजगीरों के पास काम नहीं है ,आधे अधूरे मकान आम आदमी की नियति बन गए हैं ,यूपी सरकार द्वारा नई खनन नीति को लेकर किये गए तमाम दावे टांय टांय फीस हो गए हैं।

 

अभी इसी सप्ताह राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गाडी के नीचे एक युवक के आने का मामला सुर्ख़ियों में रहा ,दरअसल वो युवक उत्तर प्रदेश में अवैध खनन और खनन परमिट की कालाबाजारी और उसमे कथित तौर पर भाजपा नेताओं की संलिप्तता का विरोध कर रहा था ।

कैसे बढे गिट्टी के दाम

गिट्टी बालू के दाम में आये भारी उछाल का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि चुनाव पूर्व जहाँ पूर्वी उत्तर प्रदेश के गिट्टी बालू के खनन क्षेत्र में 100 फिट गिट्टी का भाव 3 हजार से 3500 रूपए था वो अब बढ़कर 5 से 6 हजार रुपये हो गया। इसकी वजहों में योगी सरकार की अपरिपक्व खनन नीति तो थी ही साथ में नौकरशाही के अपने फायदे नुकसान थे ।

 

दरअसल प्रदेश के सोनभद्र जनपद का बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र जो कि देश में सर्वाधिक डोलोमाईट उत्पादक क्षेत्रों में शुमार है मे सरकार बनने के बाद ही 100 से ज्यादा खनन पट्टे बंद हो गए ,इसकी वजह लीज की अवधि का समाप्त होना था जबकि सरकार चाहती तो इनका नवीनीकरण कर सकती थी। आश्चर्यजनक यह है कि 2012 के बाद इस क्षेत्र में एक भी नया खनन पट्टा नहीं हुआ है। अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में हुए 27 पट्टे उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिए ,अब हाल यह है कि यहाँ बमुश्किल 70 खदाने चल रही है ,जबकि मांग ज्यों की त्यों बनी हुई है। जिन खदानों की लीज है वो आम जनता से पैसा वसूलने की मशीन बन गए हैं।

बालू के दाम भी बेतहाशा बढ़े

इस बात को खान अधिकारी अमरेन्द्र दास भी स्वीकार करते हैं कि लीजों की कम संख्या अपने आम में एक बड़ी समस्या है मांग ज्यादा है और उत्पादन कम। वो कहते हैं कि फिलहाल हमने निर्णय लिया है कि सभी पट्टाधारक अपनी अपनी खदानों में खन सामग्री के मूल्य लिखा बोर्ड लगायेंगे। लेकिन इससे हालत कितना बदलेंगे कहना मुश्किल है। सोनभद्र में हाल के दिनों में केवल गिट्टी का दाम नहीं बढ़ा गिट्टी के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले परमिट का दाम कई गुना बढ़ गया और बाजार में वो ब्लैक में बिकने लगा। आज हाल यह है कि जो खनन परमिट 2200 रूपए प्रति पन्ने था आज वो खुले में 12 से 16 हजार में मिल रहा ।कमोवेश यही हाल बालू का है जिस बालू का शेड्यूल रेट 150 रूपए प्रति 100 फिट है लेकिन उसका दाम ठेकेदारों ने बोली के दौरान 13 सौ रूपए तक बढ़ा दिया है। यानि अब आम आदमी को बालू भी दस गुना ज्यादा दाम में मिलेगा ।

सड़क से बाजार तक चारों ओर सियापा

उत्तर प्रदेश में आम आदमी के लिए अपने घरौंदे बनाना अब नामुमकिन सा हो गया है ,सीमेंट और सरिया के दामों में बेतहाशा वृद्धि से निर्माण कार्यों में मंदी का दौर अभी थमा नहीं था कि गिट्टी ,बालू के दामों में अप्रत्याशित बढौतरी ने लोगों की नींदे उडा डी है ,ये सब कुछ उत्पादन में कमी या फिर मांग की अधिकता की वजह से नहीं हुआ है। ,

 

स्थिति का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है की किसी वक़्त हमेशा गुलजार रहने वाले बिल्ली -मारकुंडी खनन क्षेत्र में सियापा पसरा हुआ है ,दाम में बढोतरी तो हुई लेकिन खनन क्षेत्र से सरकार बनने के बाद तक़रीबन 40 हजार खनन मजदूरों को खदान बंद होने अपना रोजगार खोना पडा है। प्रदेश में गिट्टी के बड़े कारोबारियों ने सोनभद्र की राह छोड़कर बिहार ,छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से माल मांगना शुरू कर दिया है।

 

कहाँ जाए जनता कहाँ जाए सोनभद्र

कीमतों में इस भारी उछाल पर अधिकारियों के अपने तर्क है सोनभद्र के उप कलेक्टर और खनन प्रभारी सुरेश यादव कहते हैं कि हमने कुछ क्रशरों पर कारवाई की है जो अधिक दाम पर गिट्टियां बेंच रहे हैं। लेकिन अधिकारी परमिट की काला बाजारी पर कुछ नहीं कहते। दरअसल यह एक बड़ा सच है कि परमिट की काला बाजारी को वो क्रशर बढ़ावा देते हैं जिनके पास अपनी लीज नहीं है लेकिन जिन्हें गिट्टियां बेंचना है। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।

 

सबसे बुरे हाल उन उद्यमियों का है जिनके पट्टों का नवीनीकरण नहीं हो रहा एक खनन उद्यमी कहते हैं कि अगर सरकार की नीति में परिवर्तन नहीं हुआ तो वो दिन दूर नहीं जब तमाम खनन उद्यमी उत्तर प्रदेश छोड़ अन्य राज्यों में पलायन को मजबूर हो जायेंगे। वो कहते हैं खनिज विभाग प्रदेश में सर्वाधिक राजस्व देने वाले सोनभद्र के खनन उद्यमियों से मनमाना व्यवहार कर रहा है"हांलाकि यह भी एक सच्चाई है कि नियम कायदों को तोड़कर पूर्ववर्ती सरकार में हुए मनमाने खनन के बाद सोनभद्र इस कदर तबाह हुआ है कि यहाँ और खननपट्टे किया जाना नैतिक नहीं है ।

 

Ashish Shukla
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