यूपी के बाहुबलियों की मसीहा बनेगी ये पार्टी, ये है गेम प्लान

यूपी के बाहुबलियों की मसीहा बनेगी ये पार्टी, ये है गेम प्लान
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माफिया से माननीय बने धनजंय समेत पूर्वांचल के कई दबंग हैं इस पार्टी के संपर्क में 

वाराणसी. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के रणक्षेत्र में कूदने के लिए माफिया से मानीनय बने यूपी, खासतौर से पूर्वांचल के कई दबंगों ने ऐसा चक्रव्यूह बनाया है जिससे तमाम राजनीतिक दलों के रणनीतिकार भी हैरान हैं। पूर्वांचल के कई बाहुबली नेता वर्तमान में जिस दल से जुड़े हैं, वहां तो हैं ही लेकिन साथ ही एक ऐसे दल से भी जुड़े हैं जिससे अंत समय में यदि उत्तर प्रदेश के मुख्य राजनीतिक दलों ने उन्हें टिकट में धोखा दे दिया तो भी विकल्प मौजूद रहे विधानसभा पहुंचने के लिए। 

बसपा में है निष्ठा पर बहन जी के मूड से हैं डरते

बात पूर्वांचल की जाए तो यहां के अधिकतर बाहुबलियों की पहली पसंद बसपा सरकार है। जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह, माफिया मुन्ना बजरंगी, पूर्व एमएलसी व दबंग विनीत सिंह से लगायत कभी उत्तर प्रदेश के मोस्ट वांटेंड और अब एमएलसी बृजेश सिंह के परिवार समेत पूर्वांचल के कई बाहुबली ऐसे हैं जो बसपा से जुड़े हैं। यहां तक की मऊ के बाहुबली विधायक मोख्तार अंसारी तक मायावती के शासनकाल में उनमें गहरी निष्ठा रखते थे लेकिन मऊ दंगे ने मायावती को मोख्तार व उसके कुनबे से दूर कर दिया। धनंजय सिंह जौनपुर से बसपा के टिकट पर चुनाव चाहते हैं तो विनीत सिंह को बसपा ने चंदौली के सैयदराजा से उम्मीदवार घोषित कर दिया है। चर्चित एमएलसी बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह भी बसपा से उम्मीदवारी के लिए जी-तोड़ लगी हैं। बसपा ने कुछ को टिकट थमा दिया है और कुछ को वेटिंग पाइप लाइन में डाल रखा है लेकिन दोनों ही डरे हैं कि कब बहन जी का मूड बदल जाए और उनका पत्ता कट जाए। ऐसे में बाहुबलियों ने विकल्प के तौर पर अपने लिए दरवाजे खोल दिए हैं क्योंकि उन्हें मालूम है कि निर्दल या अपनी पार्टी खड़ीकर लडऩे पर उनका हश्र भी बृजेश सिंह या मोख्तार के कौएद जैसा हो सकता है। 

कानून-व्यवस्था होगा चुनावी मुद्दा

उत्तर प्रदेश जिस तरह दंगा, हिंसा की आग में रह रहकर झुलस रहा है उससे यह तो तय है कि इस बार चुनाव में जातिगत राजनीति के साथ ही कानून-व्यवस्था मुख्य मुद्दा होगा। विपक्षी दल लगातार अखिलेश सरकार को निशाने पर लिए हैं। ऐसे में चुनाव की तिथि जैसे-जैस करीब आएगी राजनीतिक दल अपने रंग बदलेंगे। कानून-व्यवस्था के नाम पर यूपी के बाहुबलियों का टिकट भी काट सकते हैं भाजपा-सपा, बसपा और कांग्रेस। ऐसे में बाहुबलियों के पास चुनाव लडऩा तो आसान होगा लेकिन किला फतह करना लगभग नामुमकिन। बीते दिनों मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दबंग अतीक अहमद को सार्वजनिक मंच पर पीछे ढकेल दिया था। मुख्यमंत्री अखिलेश के विवादित पोस्टर के मामले में पूर्व एमएलसी व बसपा प्रत्याशी विनीत सिंह का हाल इस समय बेहाल है। 

पासवान का कंधा, बाहुबली की ताकत

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पड़ोसी राज्य बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शराबबंदी का मुद्दा लेकर जेडीयू को खड़ा करने की कोशिश में जुटे हैं। बिहार के एक और नेता की उत्तर पर नजर टिकी है और वह हैं केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान। राजग में शामिल राम विलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी उत्तर प्रदेश के चुनाव में माफिया से माननीय बनने को आतुर बाहुबलियों के बूते प्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है। दलित राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल राम विलास पासवान से इस समय बाहुबली धनंजय समेत प्रदेश के कई दबंग संपर्क में हैं। 

ये है बाहुबलियों का प्लान

जरायम की दुनिया में इस समय चुनावी चर्चाओं का बाजार गरम है। चर्चाओं की माने तो सपा इस बार बाहुबलियों को टिकट देने के मूड में नहीं दिख रही है। उधर बसपा का भी हाल कुछ ऐसा ही लेकिन यहां सबसे अधिक डर टिकट मिलने के बाद कटने का है क्योंकि बसपा के कई पदाधिकारी व नेता खुलेआम कह चुके हैं कि बसपा में टिकट उसी को मिलता है जिसकी बोली सबसे ऊंची जाती है। भाजपा भी दबंग सफेदपोश को वॉकओवर तो दे सकती है लेकिन पार्टी में शामिल कर टिकट देने में अंदखाने में रार मच जाएगी। पूर्वांचल के अधिकतर बाहुबलियों को उम्मीद है कि यूपी में कमल खिलेगा। ऐसे में लोक जनशक्ति पार्टी से टिकट लेकर चुनाव लडऩा बेहतर विकल्प है क्योंकि लोजपा राजग की सहयोगी पार्टी है। चुनाव में यदि लोजपा के टिकट पर जीत मिलती है तो भाजपा की सरकार बनने पर उनके रास्ते की रुकावटें दूर होंगी। 
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