बनारस से उठी सवर्ण आयोग के गठन और 13 पॉइंट रोस्टर बहाली की मांग, चेताया नहीं बनी बात तो चुनाव में दिखाएंगे ताकत

बनारस से उठी सवर्ण आयोग के गठन और 13 पॉइंट रोस्टर बहाली की मांग, चेताया नहीं बनी बात तो चुनाव में दिखाएंगे ताकत
Workshop of UP Nota Campaign

Ajay Chaturvedi | Publish: Mar, 24 2019 08:05:58 PM (IST) Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

-कहा, नहीं हुई एससी-एसटी एक्ट अध्यादेश की वापसी तो दिखाएंगे सवर्ण वोटों की ताकत
-मांग पूरी होने तक जारी रहेगा नोटा अभियान
-बनारस में जुटे पूर्वांचल के नोटा समर्थक
- नोटा के समर्थन में बनारस,लखनऊ,अमेठी और अयोध्या में होगा प्रदर्शन
- नोटा के प्रचार में निकलेगी 15 दिन की यात्रा
- सार्थक राजनीति और वास्तविक लोकतंत्र बहाली का आंदोलन है नोटा अभियान

वाराणसी. सवर्ण आयोग का गठन, 13 प्वाइंट रोस्टर बहाली और एससी/एसटी अध्यादेश वापसी की मांग के समर्थन में बनारस से शुरू नोटा अभियान को धार मिलती दिखने लगी है। इसी के तहत रविवार को बनारस में नोटा समर्थकों की बड़ी जुटान हुई। नोटा समर्थकों ने लोकसभा चुनाव में अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए राजनैतिक दलों को सवर्ण वोटों की ताकत दिखाने का एलान किया। कहा कि अगर दलित और पिछड़े वोटों के दबाव में केंद्र सरकार और अन्य राजनैतिक दल सवर्ण हितों पर कुठाराघात करेंगे तो सवर्ण भी अपनी ताकत का एहसास करा देंगे।

नहीं हुई एससी-एसटी एक्ट अध्यादेश की वापसी तो दिखाएंगे सवर्ण वोटों की ताकत
वाराणसी के गोलघर कचहरी स्थित एक महाविद्यालय में हुई पूर्वांचल के नोटा समर्थकों की यह जुटान। इस दौरान नोटा के समर्थन में बनारस,लखनऊ,अमेठी और अयोध्या में प्रदर्शन के साथ नोटा के प्रचार में 15 दिन की यात्रा निकालने का प्रस्ताव पारित किया गया। समर्थकों ने कहा कि सवर्ण आयोग के गठन,एससी-एसटी एक्ट अध्यादेश की समाप्ति और 13 पॉइंट रोस्टर की बहाली तक यह अभियान जारी रहेगा। नोटा समर्थकों ने यह भी कहा कि नोटा अभियान किसी दल विशेष के विरुद्ध नहीं बल्कि सार्थक राजनीति और वास्तविक लोकतंत्र बहाली का आंदोलन है। |

केंद्र सरकार की सवर्ण,किसान,कारीगर,युवा और व्यापारी विरोधी नीतियों के प्रति जताई नाराजगी
केंद्र सरकार की सवर्ण, किसान, कारीगर, युवा और व्यापारी विरोधी नीतियों से नाराज नोटा अभियान के समर्थक रविवार को भारी संख्या में यहां एक महाविद्यालय में जुटे। पूर्वांचल के लगभग 15 जिलों के साथ बिहार और मध्य प्रदेश के भी नोटा समर्थक इस जुटान में शामिल हुए। सभा में नोटा अभिया के औचित्य के साथ,आगामी चुनाव में नोटा के प्रचार-प्रसार के कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कि नोटा केवल भाजपा के विरुद्ध है, कहा कि नोटा अभियान से केवल भाजपा ही डरी हुई है इससे साफ पता चलता है कि भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र की एनडीए सरकार ने सवर्ण, किसान, कारीगर, व्यापारी और युवा हितों के विरुद्ध काम किया है। वक्ताओं ने कहा की यह किसी दाल के विरुद्ध नहीं बल्कि सार्थक राजनीती और वास्तविक लोकतंत्र की बहाली का आंदोलन है।

केंद्र सरकार ने दलित वोटों के दबाव में

नोटा अभियान के मुद्दों को स्पष्ट करते हुए वक्ताओं ने कहा कि हमारे मुद्दे स्पष्ट हैं। केंद्र सरकार ने दलित वोटों के दबाव में एससी-एसटी एक्ट पर अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया, विश्वविद्यालयों-महाविद्यालयों में अध्यापकों की भर्ती और प्रमोशन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अध्यादेश लेकर सवर्णों के पेट पर लात मरने का काम किया है। वक्ताओं ने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति,पिछड़ा और महिला आयोग की तरह देश में सवर्ण आयोग का भी गठन होना चाहिए। जीएसटी और नोटबंदी को सरकार ने अपना ऐतिहासिक फैसला बताया था लेकिन अब वह इन मुद्दों पर वोट मांगने से भाग रही है क्योंकि वास्तव में इनसे व्यापारियों और उपभोक्ताओं का नुकसान हुआ है। विश्वनाथ कॉरिडोर का मुद्दा भी देशभर में नोटा अभियान का मुद्दा होगा।

ये प्रस्ताव हुए पारित

-15 दिवसीय यात्रा निकालेगी

-बनारस, लखनऊ, अमेठी और अयोध्या में होगी रैली

इन जिलों के प्रतिनिधियों ने लिया भाग
जुटान में लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, आंबेडकर नगर आज़मगढ़, गाज़ीपुर, देवरिया, जौनपुर, भदोही, मिर्ज़ापुर, सोनभद्र, बनारस, चित्रकूट, रीवां से आये सवर्ण सेना,राष्ट्रिय स्वाभिमान मंच और धरोहर बचाओ समिति काशी के लोग शामिल हुए |

इन्होंने किया संबोधित

सभा में डॉ गिरजानंद चौबे, राजनाथ तिवारी, प्रदीप राय, गौरव ओम, अनिल केशरी, विनयशंकर राय मुन्ना, गौरव सिंह, साकेत शुक्ला, ब्रह्मानंद उपाध्याय, कृष्णकुमार शर्मा, विश्वनाथ कुंवर, संतोष बिहारी, ओम प्रकाश सिंह, शुभम, रामउजागिर यादव, डॉ वीरेंदर यादव, अनुभव पांडेय, ओम मिश्रा, प्रिंस राय, रामहित यादव, कन्हैया मिश्रा और सचिन तिवारी, रूपेश पांडेय सहित लगभग 200 लोग उपस्थित थे।

 

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