मोहनसराय के किसानों का ऐलान, फिर लिखेंगे PM को खून से खत, हमें खैरात नहीं वैधानिक अधिकार चाहिए

Ajay Chaturvedi

Publish: Feb, 08 2019 07:24:33 PM (IST)

Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

वाराणसी. मोहनसराय ट्रांसपोर्ट नगर योजना से प्रभावित किसानों ने ऐलान किया है, 'खैरात नहीं वैधानिक अधिकार चाहिए।' बैरवन में लगी चौपाल में उन्होंने फैसला किया कि हमें सरकारी खैरात नहीं वैधानिक हक अधिकार के तहत भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मोहनसराय ट्रांसपोर्ट नगर योजना से प्रभावित 1194 किसानों की जमीन वैधानिक रूप वापस की जाय।


उन्होंने जिला प्रशासन पर राज्य शासन के दबाव में कानून का खुला उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया। कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के खंड 24 धारा 5(1) में प्रावधान है कि पांच वर्ष तक योजना विकसित होकर चालू नहीं होती है तो योजना निरस्त कर किसानों की जमीन वैधानिक रूप वापस कर दी जाएगी। लिहाजा हमारी जमीन हमें वापस दी जाए। कहा कि अपनी ही जमीन पर राजस्व अभिलेखों में नाम नहीं होने के कारण हमें हर सरकारी योजना से वंचित कर दिया गया है। हमें तो अब सामाजिक रूप से तिरस्कृत होना पड़ रहा है। मोहनसराय ट्रांसपोर्ट नगर योजना से प्रभावित किसानों के बच्चों की शादिया नहीं हो पा रही है।

पंचायत में तय किया गया कि अब मोहनसराय ट्रांसपोर्ट नगर से प्रभावित बैरवन, सरायमोहन, कन्नाडाडी एवं मिल्कीचक चारों गांव के किसान रविवार को अपने सांसद और प्रधानमंत्री के नाम खून से खत लिखेंगे। खून से खत लिख कर अपना अधिकार मांगेंगे।
किसान नेता विनय शंकर राय मुन्ना ने बजट में 6000 रुपये के प्रावधान को धोखा बताते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के किसान लगातार अपने वैधानिक अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। किसानों के हक और अधिकार से वंचित करना प्रधानमंत्री की किसान विरोधी नीति एवं नियत को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है।

इस मौके पर प्रमुख रूप से दिनेश तिवारी, बद्री यादव, सुरेंद्र, विदना देवी , विजय गुप्ता, फूलपत्ती, बेला देवी, सावित्री देवी, मंजू, दुलारी, बलिराम पटेल, विजय पटेल, हरिशंकर पटेल, सुंदर पटेल, भाई लाल, संजय, छोटाई, बिरजू आदि शामिल थे। चौपाल का संचालन मेवा पटेल ने किया जबकि प्रेम शाह ने आभार जताया।

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