मथुरा में आतंक का हथियार इकट्ठा करने को होती थी वाराणसी से फंडिंग

मथुरा में आतंक का हथियार इकट्ठा करने को होती थी वाराणसी से फंडिंग
ramvriksh ragister

पता था कि धार्मिक कार्यों के लिए देश से बगावत की थी तैयारी, खुफिया एजेेंसियां फिलहाल मामले को दूसरे पहलू से देख रही, जानकारी के बाद भी जांच नहीं 

वाराणसी. मथुरा के जवाहर बाग में आतंक की फैक्टरी में हथियार जुटाने के लिए बनारस से भी फंडिंग होती थी। जवाहर बाग में हुए खूनी खेल के बाद पुलिस ने जब तलाशी अभियान चलाया तब अधिकारियों को एक अधजला रजिस्टर मिला। मथुरा के कंस रामवृक्ष का यह रजिस्टर कुछ वैसा था जैसा महानायक अमिताभ बच्चन की फिल्म डॉन की वो लाल डायरी जिसमें गिरोह से जुड़े लोगों के नाम-पते के साथ ही लेनदेन का हिसाब-किताब भी रहता था। 
अधजले रजिस्टर में उन लोगों के नाम-पते व अन्य ब्यौरे दर्ज थे जो रामवृक्ष को आर्थिक मदद देते थे। आजाद हिंद फौज के नाम से बने रजिस्टर में एक नाम वाराणसी के नारायण सिंह का भी है। रामवृक्ष के इस रजिस्टर के हिसाब से नारायण सिंह वाराणसी के जगतगंज इलाके के रहने वाले हैं। पत्रिका ने जब इसकी पड़ताल मोहल्ले में जाकर की तब मालूम हुआ कि नारायण सिंह नाम का कोई शख्स नहीं है। जो पता था वह मकान नंबर खोजे नहीं मिला। हालांकि मोहल्ले में नारायण शब्द से मिलते-जुलते कई ऐसे नाम है जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं। एक खास बात यह कि जगतगंज मोहल्लेे में रहने वाले अधिकतर नारायण सिंह शब्द से मिलते-जुलते नामों वाले लोगों के संबंध गाजीपुर से हैं। गौरतलब है कि रामवृक्ष यादव भी गाजीपुर का ही रहने वाला था। आशंका है कि फर्जी नाम-पते का सहारा लेकर रामवृक्ष यादव को फंडिंग की जाती रही है। 
बड़ी बात यह कि जय गुरुदेव के निधन के बाद भी रामवृक्ष को आर्थिक मदद मिलती रही। मदद करने वालों को पता था कि इस धन का उपयोग धार्मिक व सामाजिक कार्यों के लिए वरन  देश से बगावत करने के लिए आतंक का हथियार जुटाने के लिए किए जा रहे हैं।
वाराणसी खुफिया एजेंसियां फिलहाल मामले को दूसरे पहलू से देख रही हैं। खुफिया अधिकारियों का कहना है कि जय गुरुदेव में लोगों की आस्था थी। वाराणसी समेत पूरे पूर्वांचल में उनका खासा प्रभाव था। कई भक्त उन्हें चंदा देते थे। नारायण सिंह जैसे न ्रजाने कितने लोग आज भी जय गुरुदेव की संस्था को सहयोग करते हैं। हो सकता है कि उनके देहांत के बाद लोगों की निष्ठा अलग-अलग लोगों में हो गई हो। कोई पंकज बाबा से प्रभावित था तो कोई रामवृक्ष को अपना नेता मानता है। संभव है कि दानदाताओं को इसकी जानकारी न हो कि उनके धन का किस तरह रामवृक्ष उपयोग कर रहा है। फिलहाल अभी इसकी कोई जांच नहीं हो रही है जब तक ऊपर से कोई आदेश न आए। 

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