सरदार सरोवर पर PM मोदी के बयान पर बनारसवासियों ने जताया खेद

-सरदार सरोवर पीड़ितों को न्याय के लिए संघर्षरत मेधा पाटकर के समर्थन में काशी में हस्ताक्षर अभियान
-पीड़ितों को अविलंब पुनर्वास और राहत मुहैया कराने की मांग
-सर्वोच्च न्यायलय के आदेश के पालन की मांग

वाराणसी. सरदार सरोवर बांध पीड़ितों के समर्थन में पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की जनता उतरी सड़क पर। लोगो ने इस मुद्दे पर सात दिन से पीड़ितों के साथ उपवास पर बैठीं मेधा पाटकर का समर्थन करने के साथ ही सरकार को उनसे इस मुद्दे पर वार्ता कर समुचित कार्रवाई की भी मांग की। लोगों ने पर्यावरण संरक्ष के मुद्दे भी उठाए। इस मौके पर सामाजिक संस्थाओं ने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया।

साझा संस्कृति मंच वाराणसी, एसएसएम और जनांदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय एनएपीएम ने बीएचयू गेट लंका वाराणसी पर सरदार सरोवर बांध के प्रभावितो के लिए अनिश्चित कालीन अनशन पर बैठीं सामाजिक कार्यकर्ती मेधा पाटकर के समर्थन में जनसभा आयोजित की। साथ ही बांध प्रभावितों के राहत और पुनर्वास के लिए हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से जुटाया समर्थन।

मेधा पाटकर के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान

बीएचयू गेट पर जुटे छात्रों बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से अपील की की नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर से वार्ता करें और बांध प्रभावितों के राहत और पुनर्वास के इंतजाम सुनिश्चित करे। सभास्थल पर उपस्थित पर्यावरण प्रेमियों ने वैश्विक अध्ययनों की शोध रपट का हवाला देते हुए बड़े बांधों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए। बड़े बांधो पर होने वाला खर्च, अनगिन विस्थापनों का दर्द और उसके बाद प्राप्य बिजली, पीने के पानी की उपलब्धता, रोजगार आदि के वादे एक लम्बे समय में राजनैतिक जुमले मात्र सिद्ध होते रहे है। समय आ गया है जब पर्यावरण के सवाल जल जंगल जमीन के सवाल प्राथमिकता से तय किये जाएं।

वक्ताओं कहा की नर्मदा घाटी में 32 हजार परिवार सरदार सरोवर बांध से प्रभावित है अभी तक इनका पुनर्वास नहीं हो पाया है। वर्तमान सरकार केवल कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से सरदार सरोवर का जलस्तर 139 मीटर तक ले जाना चाहती है। ये सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना कर रही है जबकि सर्वोच्च न्यायलय ने अपने आदेश में कहा था कि जब तक सभी का उचित पुनर्वास न हो जाय तब तक बांध का जलस्तर न बढ़ाया जाय।

मेधा पाटकर के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान

समर्थन में आए एक छात्र ने कहा कि प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ती मेधा पाटकर बड़वानी, मध्य प्रदेश में पिछले 7 दिनों से अनिश्चित कालीन अनशन पर हैं। उनका स्वास्थ्य स्तर खराब हो रहा है। पुनर्वास और राहत के बिना एक बड़े भूभाग पर इस तरह बांध के पानी से ' डूब ' ले आना एक निर्मम एवं अमानवीय कृत्य है। क्षेत्र के रहवासी जिनकी वो जमीन पेड़ खेत गली सड़के कुंवे तालाब आदि थे, वे किंकर्तव्यविमूढ़ आज परेशान हाल सरकार द्वारा उठाए जा रहे इस कदम से सपरिवार परेशानी में है। हम सभी को नर्मदा बचाओ आंदोलन के समर्थन में खड़े होने का समय है।

मेधा पाटकर के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान

सामाजिक कार्यकर्ती जागृति राही ने कहा की हम आजादी के बाद के भारत में सबसे लंबे नागरिक प्रतिरोध आंदोलनों, नर्मदा बचाओ आंदोलन में से एक के साक्षी बन रहे हैं, जो पिछले 35 वर्षों में विकास के नाम पर अन्याय, सामाजिक असमानता, सहभागी लोकतंत्र के कई प्रासंगिक सवाल उठा रहा है, जो 'विकास' के प्रतिमान को चुनौती देने के लिए दुनिया भर से कई लोगों के आंदोलनों को प्रेरित कर रहा है।

मध्य प्रदेश राज्य के मुख्य सचिव द्वारा नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण (एनसीए) को दिनांक 27 मई, 2019 को लिखे गए एक हालिया पत्र के अनुसार, 76 गांवों के कुल 6,000 परिवार डूब क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। लगभग 8,500 आवेदन, जिनमें से खेतिहर भूमि के लिए 2,952 रुपये तक के और अन्य पात्रताओं में रु 60 लाख का मुआवजा, जोकि शीर्ष अदालत द्वारा निर्देशित है, अभी भी लंबित हैं।

हालांकि, नर्मदा बचाओ आंदोलन का अनुमान है कि कम से कम 32,000 परिवारों को वैकल्पिक भूमि / आदिवासियों और किसानों से अधिगृहीत भूमि के मुआवजे, घर के भूखंड, पुनर्वास स्थलों पर सुविधाओं सहित कई पुनर्वास, पुनर्वास अनुदान और आजीविका विशेष रूप से दलितों और भूमिहीन श्रमिकों, मछुआरों, कुम्हारों, नावों, छोटे व्यापारियों और कारीगरों के लिए मुआवजे का इंतजार है।

उन्होंने कहा कि हम यह भी जान कर दुःखी हैं कि कुछ दिनों पहले प्रधान मंत्री ने यह कहते हुए ट्वीट किया कि वो सरदार सरोवर बांध की 134 मीटर तक की 'लुभावनी' दृष्टि से 'रोमांचित' है और यह भी कि वह पसंद करेंगे कि देश भर से लोग आएं और इसे देखें। साथ में 'प्रतिष्ठित' स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को भी निहारें। उन्होंने 2 लाख स्वदेशी, किसान, मछुआरे और अन्य परिवारों के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा, जो पर्यटन और विकास के पैकेज के इस आतंक की वास्तविक लागत का भुगतान कर रहे हैं। क्या हजारों लोगों के जीवन और आजीविका की तुलना में 'प्राकृतिक सुंदरता' अधिक महत्वपूर्ण है?

हालांकि मध्य प्रदेश सरकार ने अनिश्चित स्थिति पर विचार करने के लिए एक स्वागत योग्य कदम उठाया है और केंद्र को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए लिखा है। यह एक संपूर्ण क्षेत्र पर एक अन्याय होगा और इसे रोकने की जरूरत है। यह भी उजागर करने की आवश्यकता है कि यह पूरा क्षेत्र V- अनुसूची आदिवासी क्षेत्र के भीतर स्थित है जिसे भारत के संविधान के अनुसार एक विशेष दर्जा प्राप्त है और राष्ट्रपति के पास इस क्षेत्र में लोगों के हितों की रक्षा करने की जिम्मेवारी है।

मेधा पाटकर के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान

सभास्थल पर नर्मदा बचाओ आंदोलन और फ्रेंड्स ऑफ़ नर्मदा की ओर से जारी जानकारी साथ अग्रलिखित बिन्दुओ पर हस्ताक्षर अभियान चलाया गया...

क- सरदार सरोवर परियोजना जलाशय में जल स्तर बनाए रखने के लिए नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण को 122 मीटर पर रुकने को निर्देशित करें।

ख- बांध के फाटकों को बंद करने का जल्दबाजी में लिया गया निर्णय, जब तक कि सभी 32,000 परिवारों का वैध और भेदभावहीन पुनर्वास सुनिश्चित नहीं हो जाता।

ग- पहले से ही प्रभावित हजारों परिवारों को अंतरिम राहत प्रदान करें।

घ- 2000 के अक्टूबर के शीर्ष न्यायालय के फैसले के अनुसार, बांध कार्य के साथ आगे बढ़ने से पहले पुनर्वास और पर्यावरणीय उपायों पर अनुपालन के पैमाने और स्थिति का आकलन करने के लिए एक स्वतंत्र उच्च-संचालित समिति का गठन।

ये रहे मौजूद

जनसभा के दौरान प्रेरणा कला मन्च के साथियो ने जंगल जमीन के सवालों पर जागरूकता लाने के लिए गीत सुनाए। सभा और हस्ताक्षर अभियान में प्रमुख रूप से आत्म प्रकाश पांडेय, फादर दिवाकर, सतीश सिंह, डॉ अनूप श्रमिक, धनंजय त्रिपाठी, जागृति राही, डा मुनीजा रफीक खान, चिंतामणि सेठ, प्रेम कुमार, राम जनम, सानिया अनवर, मनीष शर्मा, नीरज, कुणाल, प्रियेश, अनंत, पंकज , विनय सिंह, मुकेश, चंदन आदि मौजूद रहे।

 

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Ajay Chaturvedi
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