सीएम योगी की चेतावनी भी नहीं आई काम, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे बनारसी

-09 साल में एक प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका
-पिछले दो साल से सीएम लगातार दे रहे हैं चेतावनी
-घर-घर पानी पहुंचाने को 2010 में जेएनएनयूआरएम के तहत शुरू हुई थी परियोजना
-338 करोड़ थी लागत
-2015 में पूरा होना था प्रोजेक्ट वर्क
-सीएम ने 30 जून 2019 तय की थी मियाद

By: Ajay Chaturvedi

Published: 01 Jul 2019, 05:13 PM IST

वाराणसी. गंगा किनारे के लोग प्यासे हैं। इन प्यासे लोगों की प्यास बुझाने को 2010 में तत्कालीन यूपी सरकार ने जवाहर लाल नेहरू राष्‍ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत 338 करोड़ की योजना पर काम शुरू कराया था। परियोजना 2015 में पूरी होनी थी। लेकिन तब से अब तक नौ साल बीत गए लेकिन घरों में पानी नहीं पहुंचा। हालांकि इसके लिए यूपी सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिम्मेदारों को कई बार चेतावनी दी। उन्होंने परियोजना पूरा करने के लिए 30 जून 2019 की तिथि मुकर्रर की थी जो बीत गई लेकिन काम पूरा नहीं हो सका। 600 करोड़ से बिछाई गई पाइप लाइनों से न तो जलापूर्ति शुरू हो सकी और न ही 35 ओवरहेड टैंक ही चालू हो पाए। अब देखना है कि मुख्‍यमंत्री के निर्देश के मुताबिक लापरवाह अभियंताओं पर मुकदमा कब दर्ज किया जाता है।

बता दें कि वाराणसी में हर घर के नल तक पानी पहुंचाने के लिए 2010 में जवाहर लाल नेहरू राष्‍ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत 338 करोड़ की योजना पर काम शुरू हुआ था। इस परियोजना को 2015 में पूरा हो जाना था। 2016 में केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत जेएनएनयूआरएम परियोजना में छूट गए शहर के बाहरी इलाकों में भी पेयजल उपलब्‍ध कराने के लिए और 250 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इतनी बड़ी धनराशि से शहर में 686 किलोमीटर पाइप लाइनों का जाल बिछाने के साथ 35 ओवरहेड टैंक का निर्माण किया गया, लेकिन नौ साल बीतने के बाद भी लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।

अब जलनिगम का काम तो पूरा हुआ नहीं। गंगा के जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। ऐसे में जलकल के महाप्रबंधक के पत्र के बाद सिंचाई विभाग ने जो कानपुर से गंगा बैराज का पानी गंगा में छोड़ने का वादा किया था वह भी अब तक बनारस नहीं पहंच पाया है। ऐसे में बनारस के लोग गंभीर संकट में हैं।

 

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मॉनसून सत्र से पहले मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने 22 जून को मंडलीय समीक्षा का दौर प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र से शुरू किया तो निशाने पर जल निगम के अभियंता रहे। योगी आदित्‍यनाथ ने सभी ओवरहेड टैंक से पेयजल की सप्‍लाइ शुरू करने के लिए 30 जून तक की समय सीमा दी थी। साफ कर दिया था कि इस समय तक काम पूरा न होने पर वर्ष 2010 से अब तक के सभी अभियंताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। चेतावनी का असर कई इलाकों में सड़कों पर खुदाई कर पाइप लाइन की लीकेज ठीक करने के रूप में दिखा जरूर पर मियाद खत्‍म होने के दिन तक 25 स्‍थानों पर लीकेज की मरम्‍मत करना बाकी है। जिन स्‍थानों पर दो दिन पहले लीकेज ठीक कराया गया, वहां फिर लीकेज हो गया।

मुख्‍यमंत्री की हिदायत को देखते हुए वाराणसी मंडल के कमिश्‍नर दीपक अग्रवाल व जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह प्रॉजेक्‍ट की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अफसरों को जल निगम की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। हालांकि जल निगम के एसई आर.पी.पांडेय का कहना है कि पांज जगहों पर लीकेज ठीक कराए जाने से तीन ओवरहेड टैंक से आपूर्ति की बाधा खत्‍म हो गई है। बाकी लीकेज भी दिन-रात काम करा ठीक कराए जा रहे हैं।

 

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