वाराणसी में एक बाइक सवार ने लिखी थी भगदड़ की स्क्रिप्ट

वाराणसी में एक बाइक सवार ने लिखी थी भगदड़ की स्क्रिप्ट
jai gurudev stamped

हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश, वाराणसी पुलिस-प्रशासन की लापरवाही से हुआ हादसा, आयोजकों पर भी उठे सवाल

वाराणसी. जय गुरुदेव के मद्य व मांसाहार निषेध के संकल्प को लेकर वाराणसी में जुटे जय गुरुदेव के समर्थकों का सत्संग समागम मौत के मातम में बदल गया। 19 मौतों ने पुलिस प्रशासन के साथ ही आयोजकों को जिनकी जिम्मेदारी व्यवस्था की थी, कठघरे में खड़ा करता है। जय गुरुदेव के सत्संग में उमडऩे वाली भीड़ का वाराणसी जिला प्रशासन ने ठीक से आकलन नहीं किया जिसके चलते पहले शहर जाम की चपेट में आया और फिर राजघाट पुल पर ऐसी भगदड़ मची कि लोग एक दूसरे के शरीर पर चढ़ते हुए इधर-उधर भागे और हादसे में कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हादसे की कमिश्रर के स्तर से जांच के आदेश दिए हैं। 


जानकारी के अनुसार जय गुरुदेव के शिष्य पंकज महराज की ओर से दो दिवसीय सत्संग का आयोजन रामगनर के डुमरिया में किया गया था। आयोजन के बाबत जिला प्रशासन से अनुमति भी मांगी गई थी। सत्संग स्थल पर तीन हजार लोगों के जुटने की बात लिखित में आयोजकों ने दी थी। आयोजकों के अनुमान से भीड़ कहीं अधिक बनारस में जुट गई। सूत्रों के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों से पांच से सात लाख श्रद्धालु बनारस पहुंच गए। 


लाखों की संख्या में जय गुरुदेव के समर्थक शनिवार सुबह वाराणसी के विभिन्न इलाकों में जुलूस की शक्ल में निकले और रामनगर की ओर बढ़े। उधर डुमरिया से भी हजारों की संख्या में समर्थक निकले थे। राजघाट पुल पर अचानक लाखों की संख्या में समर्थकों के पहुंचने से भयंकर जाम लग गया। सूत्रों के अनुसार जाम के चलते लोग परेशान जरूर थे लेकिन अव्यवस्थित नहीं थे। 


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाराणसी से रामनगर की ओर बढ़ रहे एक दूधिए वाले के चलते इतना बढ़ा हादसा हो गया। हुआ यूं कि दूधिया अपना बाल्टा लेकर बाइक से भीड़ के बीच घुस गया और तेजी से पुल पार करने की कोशिश करने लगा। इस दौरान संतुलन बिगडऩे से दूधिया की बाइक पुल से नीचे गिर गई जबकि वह बच गया। बाइक के नीचे पुल से नीचे गिरते ही भीड़ में भगदड़ मच गई। रामगनर की तरफ अवधूत भगवान राम आश्रम स्थल के समीप भगदड़ में कई महिलाएं व पुरूष गिर पड़े और लोग उन्हें कुचलते हुए इधर-उधर भागने लगे।

पुल पर भगदड़ से मौत की खबर जंगल में आग की तरह फैली। जिलाधिकारी से लगायत पुलिस अधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एंबुलेंस घटनास्थल को रवाना हुए लेकिन पुल पर  लगे जाम के चलते अधिकारी समय से घटनास्थल पर नहीं पहुंच सके। जिलाधिकारी स्वयं सड़क पर उतरकर जाम समाप्त कराने में जुटे। मशक्कत के बाद अधिकारी व चिकित्सकीय सुविधाएं मौके पर पहुंची लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। 

जिलाधिकारी विजय किरण आनंद के अनुसार आयोजकों ने तीन हजार लोगों के जुटने की बात कही थी लेकिन मौके पर तीन लाख से अधिक लोग पहुंचे जिसके चलते घटना हुई। मामले की मजिस्ट्रेटी जांच होगी। जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई तय होगी। जिलाधिकारी ने आयोजकों पर तो मामला ठेल दिया लेकिन वाराणसी पुलिस की इस मामले में भूमिका बेहद निराशाजनक रही। वाराणसी पुलिस का स्थानीय खुफिया तंत्र पूरी तरह फेल रहा। सुबह से ही कई सोशल मीडिया पर जय गुरुदेव के समर्थकों की लाखों की संख्या में बनारस में मौजूदगी और जाम की ओर ध्यान आकृष्ट कराया गया था। जिन ग्रुपों पर यह संदेश चल रहे थे, उस ग्रुप में एसएसपी समेत वाराणसी के तमाम आला अधिकारी भी जुड़े हैं लेकिन किसी ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया जिसके चलते राजघाट पुल पर पहले जाम लगा और फिर एक वाकये के बाद ऐसी भगदड़ मची कि कईयों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। 
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