वाराणसी में इंजीनियरिंग की छात्रा ने बनाया रोबो हेलमेट, सैनिकों की बचाएगा, गोलियां भी चलाएगा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत से मिली प्रेरणा, बना डाला सैनिकों की जान बचाने वाला रोबो हेलमेट। 15 दिन की मेहनत से महज 7000 से 8000 रुपये में कर डाला तैयार।

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत का सपना धीरे-धीरे हर आंख देखने लगी है। इन सपनों को पंख लग रहे हैं। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र की एक बेटी ने भी इस सपने को सच कर दिखाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। काशी की बेटी अंजलि श्रीवास्तव ने देश की सीमाओं की रक्षा में जान लड़ा देने वाले वीर जांबाज सैनिकों के लिये एक ऐसा रोबो हेलमेट तैयार किया है, हमारे जवानों को अनजाने हमलों से हमारे जवानों को अलर्ट करेगा। रोबो हेलमेट पीछे से होने वाले हमलों से जवानों को अलर्ट करने के साथ गोली चलाने में भी सक्षम है।

 

Robo Helmet

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आपदा को अवसर में बदलकर आत्मनिर्भर बनने का जो आह्वान किया वह उनके संसदीय क्षेत्र के एक निजी इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट की छात्रा अंजलि श्रीवास्तव के लिये मूल मंत्र बन गया। इससे प्रेरित होकर उसने सीमा पर तैनात जवानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसा डिवाइस बनाने की सूझी जिससे दुश्मनों से लेाहा लेते समय हमारे जवान ज्यादा सुरक्षित रहकर उनके छक्क छुड़ा सकें।

 

  • ''रोबो हेलमेट बेहद उपयोगी है। इसमें कुछ बदलाव करने के बाद इसकी लागत को और कम किया जा सकता है। भारतीय सेना को एक बार इसे देखना चाहिये।''
  • इंस्टीट्यूट के रिसर्च ऐण्ड डेवेलपमेंट हेड, श्याम चौरसिया

 

अपनी इन्नोवेटिव सोच को मूर्त रूप देते हुए अंजलि ने जवानों के लिये एक रोबो हेलमेट तैयार किया। जिसकी खासियत यह है कि यह पीछे से होने वाले हमलों से अलर्ट कर उनका जवाब दे सकता है और चारों तरफ घूमकर हमला करने में भी सक्षम है। यही नहीं हेलमेट को सिर पर पहनने के साथ ही जमीन पर रोबोट की तरह भी इस्तेमाल कर दुश्मन के हमलों का जवाब दिया जा सकता है। अंजली का कहना है कि देश की सीमा पर लगातार चल रहे विवाद और दुश्मनों की साजिश को देखते हुए उसे यह रोबो हेलमेट बनाने की प्रेरणा मिली।

 

Robo Helmet

 

कैसे काम करता है रोबो हेलमेट

रोबो हेलमेट वायरलेस टेक्नोलाॅजी से लैस है। अंजली श्रीवास्तव ने बताया कि हेलमेट का एक वायरलेस ट्रिगर है। यह रेडियो फ्रिक्वेंसी की मदद से हेलमेट में लगे बैरल से अटैच होता है। हेलमेट के ट्रिगर को किसी भी राइफल गन के ट्रिगर के पास फिट किया जा सकता है। जैसे ही कोई दुश्मन धोखे से या पीछे से हमला करने की कोशिश करता है, उसके पहले ही हेलमेट अलर्ट सिग्नल देता है। अलर्ट मिलने पर समय रहते जवान वायरलेस ट्रिगर की मदद से हेलमेट गन के पिछले हिस्से में लगे बैरल से फायर कर अपना बचाव कर सकेंगे।

 

Robo Helmet

 

क्या है खासियत

अंजली के बनाए रोबो हेलमेट की सबसे खास बात ये है कि यह वजन में काफी हल्का है और 360 डिग्री घूमकर दुश्मन को टारगेट कर सकता है। रोबो बा प्रोटोटाइप इंस्टीट्यूट के रिसर्च ऐण्ड डेवेलपमेंट डिपार्टमेंट में तैयार किया गया है। इसे संचालित करने का रेंज प्रोटोटाइप में करीब 50 मीटर है, जबकि हेलमेट में लगी गन की मारक क्षमता प्रोटोटाइप में 100 मीटर होगी। अंजली ने बताया कि इसे बनारे में 15 दिन का समय लगा और महज 7000 से 8000 रुपये का खर्च आया है।

 

रफतउद्दीन फरीद
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