इन महिलाओं को सलाम जिन्होंने अपनों की राह तकती वृद्धाओं संग बांटी खुशियां

वृद्धा आश्रम पहुंच कर मनाई खिचड़ी, हासिल किया आशीर्वाद

वाराणसी. एक तरफ सरकार और न्यायालय को यह व्यवस्था करनी पड़ रही है कि कोई भी युवा अपने माता-पिता को बेसहारा नहीं छोड़ेगा। ऐसे युवाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। ऐसी खबरें आए दिन सामने आ रही हैं जिनमें उन बच्चों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही कि अगर वो वृद्ध माता-पिता को घर से निकालते हैं तो वो दंड के भय से ही उन्हें अपने साथ रखें, सहारा दें। अब तो कानून ने बेटी-बेटा के साथ बहू और दामाद तक को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया है।

बावजूद इसके ऐसी तमाम बेसहरा महिलाएं हैं जो वृद्धा आश्रमों में अपनों की राह तक रही हैं। ऐसे में जब किसी समाज के बेटियां और बहुएं उनके पास पहुंचें और अपनेपन का एहसास कराते हुए उनके साथ खुशियां बांटें तो उन वृद्धाओ के भी खुशी का ठिकाना नहीं रहता।

ऐसा ही प्रयास किया महिला भूमिहार समाज ने। समाज की महिलाएं ऐसी ही माताओं के साथ भेलुपर स्थित वृद्धा आश्रम में मकर संक्रांति के इस महापर्व को चूड़ा दही व पट्टी खिला कर मनाने के साथ ही शीतलहर व ठंड को देखते हुए कंबल वितरण कर अपनापन देने की कोशिश की।

इस मौके पर अधिवक्ता राजलक्ष्मी राय ने बताया कि आज के समय में वो परिवार बहुत ही अभागा है जिनके सिर पर अपने माता-पिता का साया नही है। वो परिवार जो अपने माता-पिता का तिरस्कार कर रहा है वो कभी भी तरक्की नहीं कर सकता क्योंकि माता-पिता के चरणों में ही जन्नत है।

शालिनी सिंह ने बताया कि इस तरह के लोगों के साथ महिला भूमिहार समाज हमेशा परिवार बन कर खड़ा रहेगा और हर संभव मदद की कोशिश करता रहेगा।
इस दौरान रीमा राय, रीतु राय, डॉ सुनीता सिंह राय, रूपम सिंह, सुमन सिंह, परी राय, खुशबू राय, शकुंतला राय, रीमा राय, रेनू सिंह सहित दर्जनों महिलाएं उपस्थित थी।

Show More
Ajay Chaturvedi
और पढ़े
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned