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साक्षी और विनेश के आंसुओं से पिघली सरकार, संजय सिंह के वो फैसले जो 4 दिन के अंदर ही पलट दिए गए

locationवाराणसीPublished: Dec 24, 2023 01:12:00 pm

Submitted by:

Anand Shukla

WFI Suspended: 21 दिसंबर को भारतीय कुश्ती संघ को नया अध्यक्ष संजय सिंह के रुप में मिला। इसके बाद पहलवानों ने बृजभूषण सिंह का करीबी होने के नाते संजय सिंह का विरोध लगे। वहीं, अब खेल मंत्रालय ने 4 दिन में ही संजय सिंह के फैसले को पलटते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया है।

 

WFI new Sanjay Singh decisions changed by the Sports Ministry within 4 days
खेल मंत्रालय ने भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष को निलंबित कर दिया है।
WFI Suspended: केंद्र सरकार ने पहलवानों का विरोध देखते हुए भारतीय कुश्ती संघ के नए अध्यक्ष संजय सिंह को निलंबित कर दिया है। 21 दिसंबर को डब्ल्यूएफआई यानी भारतीय कुश्ती महासंघ के चुनाव हुए, जिसमें बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह को जीत मिली थी। संजय सिंह का मुकाबला कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुकी अनीता श्योराण से था। संजय सिंह ने पहलवान अनीता श्योराण को हराकर भारतीय कुश्ती महासंघ के नए अध्यक्ष बने। इसके बाद पहलवानों ने संजय सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
महिला रेसलर साक्षी मलिक ने कुश्ती से संन्यास की घोषणा कर दी थी। इतना ही नहीं बजरंग पुनिया ने अपना पद्म श्री वापस कर दिया। पहलवानों के विरोध को देखते हुए अब खेल मंत्रालय ने नए कुश्ती संघ को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही कुश्‍ती संघ के नए अध्‍यक्ष संजय सिंह की मान्‍यता भी रद्द कर दी है।
WFI चीफ बनते ही संजय सिंह लिए फैसले
WFI का अध्यक्ष बनते ही संजय सिंह ने कुश्ती कराने का फैसला लिया है। साल खत्म होने से पहले संजय सिंह ने अंडर 15 और अंडर 20 नेशनल रेसलिंग के ट्रायल नंदिनी नगर गोंडा में आयोजन करवाने की बात की थी। इसके अलावा कई अन्य वजह भी हैं। आइए जानते हैं।
1. जल्दबाजी में प्रतियोगिता कराने की घोषणा
खेल मंत्रालय ने WFI को रद्द करने की वजह में बताया कि 21 दिसंबर को नए अध्यक्ष चुने गए। इसके तुरंत बाद उन्होंने गोंडा में अंडर-15 और अंडर-20 वर्ग की प्रतियोगिता कराने की घोषणा कर दी। यह घोषणा जल्दबाजी में की गई है। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले पहलवानों को पहले से ना कोई सूचना दी गई और न ही WFI के संविधान के प्रावधानों का पालन किया गया।
2. WFI पर पुराने अधिकारियों का है कब्जा
खेल मंत्रालय द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि फेडरेशन का कारोबार पूर्व पदाधिकारियों के नियंत्रण वाले परिसर से चलाया जा रहा है, जहां खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था और ये मामला अदालत में चल रहा है। इससे यह लगता है कि नए फेडरेशन खेल एथिक्स की अवहेलना करते हुए पूर्व पदाधिकारियों के कंट्रोल में है।
3. 'WFI ने संविधान के नियमों पर नहीं दिया ध्यान
खेल मंत्रालय की नोटिस में कहा गया है कि WFI के संविधान की प्रस्तावना के खंड-3 के अनुसार, फेडरेशन का उद्देश्य कार्यकारी समिति द्वारा चयनित स्थानों पर UWW नियमों के अनुसार सीनियर, जूनियर और सब जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप आयोजित करने की व्यवस्था करना है। ऐसे निर्णय कार्यकारी समिति द्वारा लिए जाते हैं, जिसके सामने एजेंडे को विचार के लिए रखा जाना आवश्यक होता है। इसके लिए बैठक होती है, नोटिस देना होता है, कोरम पूरा करना होता। इस सभी में 15 दिन का समय का प्रावधान है, लेकिन WFI के फैसले में इन नियमों का पालन नहीं किया।
4. 'WFI के फैसलों से नई फेडरेशन की मनमानी की बू आ रही'
नोटिस में आगे कहा गया है कि WFI के प्रावधानों के साथ ही नेशनल स्पोर्ट्स डेवलेपमेंट कोड का भी उल्लंघन किया है। नए अध्यक्ष फैसले लेने में मनमानी कर रहे हैं। ये सिद्धांतों के विपरीत है और इसमें पारदर्शिता भी नहीं है। निष्पक्ष खेल और पारदर्शिता के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नियमों की पालना अहम है। एथलीट, हितधारक और जनता के बीच विश्वास कायम करना जरूरी है।
5. खेल एथिक्स और संविधान का किया उल्लंघन
खेल मंत्रालय ने कहा कि WFI के नवनिर्वाचित निकाय द्वारा लिए गए फैसले संवैधानिक प्रावधानों और राष्ट्रीय खेल विकास संहिता दोनों का उल्लंघन करते हैं। ये फैसले स्थापित कानूनी और प्रक्रियात्मक मानदंडों के प्रति घोर उपेक्षा दर्शाते हैं। इसके अलावा, कुश्ती के लिए अंतर्राष्ट्रीय निकाय, UWW ने अभी तक WFI के निलंबन को हटाने के लिए आधिकारिक नोटिस जारी नहीं किया है।

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