अखिलेश सरकार को बदनाम करने के लिए कौन रच रहा साजिश,  बनारस की कचहरी में निष्प्रयोज्य बम का मिलना शरारत या कुछ और, पढि़ए ये खबर

अखिलेश सरकार को बदनाम करने के लिए कौन रच रहा साजिश,  बनारस की कचहरी में निष्प्रयोज्य बम का मिलना शरारत या कुछ और, पढि़ए ये खबर
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खुफिया एजेंसियों का दावा, आतंकी रिहर्सल नहीं सीधे करते हैं विस्फोट, 26 जनवरी को सर्किट हाउस के पास मिला था नकली बम

वाराणसी. आतंकियों की हिटलिस्ट में शुमार बनारस में शनिवार को काशीवासियों की सांसे अटकी थी जब कचहरी में हैंड ग्रेनेड मिलने की खबर जंगल में आग की तरह फैली। बम मिलने की सूचना के साथ ही कचहरी व कलेक्ट्रेट की घेरेबंदी कर दी गई। बम निरोधक दस्ते के साथ ही तमाम खुफिया एजेंसियों व वाराणसी की सुरक्षा-व्यवस्था से जुड़े आला अधिकारियों ने कचहरी में डेरा डाल दिया था। सभी ने राहत की सांस ली जब बम निरोधक दस्ते ने बताया कि हैंड ग्रेनेड में डेटोनेटर नहीं था इसलिए इससे विस्फोट नहीं हो सकता था। 
आतंकी घटना की गवाह रही कचहरी में एक बार फिर बम मिलने की घटना कई सवाल  छोड़ गई। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक रंग देना भी शुरू कर दिया है। कचहरी में लोगबाग चर्चा करते दिखे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार को बदनाम करने के लिए लगातार साजिश रची जा रही है। उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर विरोधी दल हमेशा से सपा सरकार को निशाने पर लेते आया है। खुफिया तंत्र की रिपोर्ट है कि बीते तीन-चार माह से लगातार असामाजिक तत्व बनारस में अराजकता फैलाने की साजिश रच रहा है। सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने भी बनारस में हैंड ग्रेनेड मिलने के बाद एक बयान जारी करने के कहा कि उत्तर प्रदेश में कुछ लोग दंगा-फसाद करके सांप्रदायिकता फैलाने की साजिश रच रहे हैं। चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश को दंगे की आग में झोंकना चाहते हैं। 

पहले भी हो चुकी साजिश
आतंकवाद निरोधक सेल यानि एटीएस के मुताबिक बीते 26 जनवरी को भी कचहरी परिसर के बाहर विकास भवन के समीप एक डिब्बा मिला था जिसे बम की शक्ल दी गई थी। नकली बम मिलने के कुछ दिनों पूर्व कचहरी में एक पत्र भी पहुंचा था जिसमें कचहरी परिसर को उड़ाने की धमकी भी दी गई थी। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि कचहरी में हैंड ग्रेनेड रखने वाले की मंशा सिर्फ दहशत फैलाने की थी। कचहरी में आतंकी वारदात वर्ष नौ साल पहले हो चुकी है। आतंकी संगठन जिस स्थान पर विस्फोट करते हैं वहां दोबारा धमाका नहीं करते हैं। हैंड ग्रेनेड कुछ इस तरह से चमकीले गिफ्ट पैकेटे में रखा था कि आसानी से पकड़ में आ जाए वरना कचहरी में कई ऐसे स्थान हैं जहां पर बम आसानी से प्लांट किया जा सकता था। हैंड ग्रेनेड में डेटोनेटर नहीं था।

कबाड़ी के यहां से कचहरी पहुंचा हैंड ग्रेनेड
सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि उक्त हैंड ग्रेनेड किसी कबाड़ी के यहां से होते हुए कचहरी तक पहुंचा था। जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि उक्त हैंड ग्रेनेड पुणे में बना था और पुलिस विभाग को आवंटित था। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि अभ्यास के दौरान कोई हैंड ग्रेनेड फटा नहीं और बाद में यह किसी आम नागरिक या कबाड़ी के हाथ लग गया था। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस पड़ताल में जुटी है कि यह हैंड ग्रेनेड कहां बना, किसे आवंटित हुआ और कहां से कहां पहुंचा। 

होता धमाका तो मोदी-अखिलेश दोनों निशाने पर आते
खुफिया तंत्र की माने तो कचहरी में वाकई में धमाका हो जाता तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों विरोधियों के निशाने पर होते। प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के कारण वाराणसी पर पूरे विश्व की नजरें रहती हैं। उधर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर जवाब देना मुश्किल होता। 
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