वट सावित्री व्रत: कोरोना पर भारी पड़ा पत्नियों का पति प्रेम, निर्जला व्रत रखकर मांगी साजन की लंबी उम्र

इस बार जहां कोरोना वायरस और लॉकडाउन के कारण हर तरह की गतिविधियों पर तकरीबन रोक लगा दी गई है, तो वहीं पति की लंबी उम्र के लिये रखा जाने वाला वट सावित्री का व्रत इस बार भी पहले की तरह अद्भुत रहा

By: Karishma Lalwani

Published: 22 May 2020, 02:17 PM IST

वाराणसी. अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए वट सावित्री का व्रत (Vat Savitri Vrat) हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को रखा जाता है। इस बार जहां कोरोना वायरस और लॉकडाउन के कारण हर तरह की गतिविधियों पर तकरीबन रोक लगा दी गई है, तो वहीं पति की लंबी उम्र के लिये रखा जाने वाला वट सावित्री का व्रत इस बार भी पहले की तरह अद्भुत रहा। सभी संकट के बीच पत्नियों द्वारा पति की लम्बी उम्र की कामना करना कम न हुआ। इस पूजन का मुहूर्त दिन में 11.08 तक रहा। परव्रती महिलाएं पूरे दिन पूजन कर सकती हैं जो अब भी किया जा रहा है।

मास्क लगाकर पत्नियों ने की पूजा

बता दें कि शुक्रवार की सुबह से ही काशी में सुहागिन महिलाओं ने पति दीर्घायु के लिए बरगद के पेड़ के समीप जाकर पूजन किया। इलाके मे मंदिरों के बाहर सुबह से ही सुहगिनों की भीड़ दिख रही। वट वृक्ष के समीप इतनी भीड़ है कि शारीरिक दूरी समाप्त हो गया है। आज का दिन सुहगिनो के लिये विशेष दिन है। पति की लम्बी उम्र के लिये निर्जला व्रत रख कर सावित्री, सत्यवान, यमराज के साथ वट वृक्ष की पूजा कर रही है। इस दौरान महिलाओं में संक्रमण की चिंता नहीं देखी। व्रती महिलाओं ने मॉस्क लगाकर पूजन-अर्चन किया।

लहुराबीर, रामकटोरा, शिवपुरवा, पिशाचमोचन सहित अन्य वट वृक्षों के समीप सुहागिनों ने वट सावित्री का पूजन-अर्चन किया। इन महिलाओं ने पति के प्रेम में कोरोना के डर को भी मात दे दिया। विधि-विधान के साथ बेखौफ तरीके से वट सावित्री का पूजा-अर्चना कर पति के लंबी उम्र की मंगल कामना की। परिवार के सुख-समृद्ध के लिए प्रार्थना की।

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क्या है धार्मिक महत्व

ज्योतिषाचार बताते हैं कि जब यमराज ने सावित्री के पति सत्यवान के प्राण हर लिए तो सावित्री ने उनके मृत शरीर को बरगद के पेड़ के नीचे लेटाया और यमराज के पीछे-पीछे चल दीं। जब यमराज ने उन्हें लौटने के लिए कहा तो सावित्री ने उनसे पति धर्म और मर्यादा को निभाने की बात कही और लगातार पीछे चलती रहीं। माना जाता है कि वटवृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने पति व्रत की प्रभाव से मृत पड़े सत्यवान को पुनः जीवित किया था। तभी से इस व्रत को वट सावित्री नाम से ही जाना जाता है। इसमें वटवृक्ष की श्रद्धा भक्ति के साथ पूजा की जाती है।

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पुराणों में यह स्पष्ट किया गया है कि वट में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास है। मान्यता अनुसार इस व्रत को करने से पति की अकाल मृत्यु टल जाती है। वट अर्थात बरगद का वृक्ष आपकी हर तरह की मन्नत को पूर्ण करने की क्षमता रखता है। पीपल और वट वृक्ष की परिक्रमा का विधान है। इनकी पूजा के भी कई कारण है। आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो वट वृक्ष दीर्घायु व अमरत्व के बोध के नाते भी स्वीकार किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि वट वृक्ष की पूजा लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य देने के साथ ही हर तरह के कलह और संताप मिटाने वाली होती है। ऐसे में महिलाओं ने फिर साबित कर दिया ही की संकट चाहे जो हो पर परिवार के लिए उनकी आस्था सबसे अलग है।

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